मैनाठेर कांड: 'मैंने तो जिंदगी की उम्मीद छोड़ दी थी, पैर में घोंपा था सूजा', दोषियों को 28 को सुनाई जाएगी सजा
मैनाठेर कांड के दोषियों को 28 मार्च को सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने 23 मार्च को तत्कालीन डीआईजी पर हमले के मामले में 16 आरोपी दोषी करार दिए थे। उधर, बवाल में भीड़ के हमले में घायल हुए तत्कालीन डीआईजी के पीआरओ रहे रवि कुमार ने घटना के बारे में कई खुलासे किए।
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जिस तरह भीड़ ने हमला किया था मैं तो जिंदगी की उम्मीद ही छोड़ चुका था। भीड़ में मौजूद एक हमलावर ने मेरे पैर में सूजा घोंप दिया था। इससे खून ऐसे बह रहा था जैसे गोली लगी है। सिर को छोड़ कर शरीर पर जगह जगह पत्थर और ईंटें लगे थे। बस किसी तरह जिंदगी बच गई थी।
यह कहना है मैनाठेर बवाल में भीड़ के हमले में घायल हुए तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह के पीआरओ रहे रवि कुमार का। इस दुस्साहसिक वारदात के वह मुख्य चश्मदीद हैं और केस के वादी भी। वर्तमान में बरेली एसएसपी कार्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रवि कुमार ने बताया कि 2011 में वह मुरादाबाद में तैनात थे और एसएसपी/ डीआईजी के पीआरओ थे।
छह जुलाई 2011 को मैनाठेर बवाल की सूचना मिलने पर डीआईजी डीएम की गाड़ी में बैठकर घटनास्थल की ओर जा रहे थे। मैं डीआईजी की गाड़ी में ड्राइविंग सीट के बराबर वाली सीट पर बैठा था। डींगरपुर पेट्रोल पंप के पास भीड़ को देखकर डीआईजी अपनी गाड़ी से उतर गए थे और उन्हें समझाने लगे थे।
इसी दौरान 500 से ज्यादा लोगों ने उन्हें घेर लिया था। मैं तुरंत गाड़ी से निकल कर डीआईजी के पीछे खड़ा हो गया था इतनी ही देर में भीड़ ने हमला कर दिया। किसी तरह डीआईजी पेट्रोल पंप की ओर भागे लेकिन भीड़ पीछा करते हुए वहां भी पहुंच गई। मेरे ऊपर भी पत्थर फेंके गए। सिर बच गया था लेकिन एक हमलावर ने मेरे पैर में सूजा घोंप दिया था।
डीआईजी पेट्रोल पंप के अंदर कमरे में और मैं बाहर घायल अवस्था में पड़ा था। मैंने पुलिस को कॉल की। करीब दो घंटे बाद पुलिस पहुंची और हम दोनों को अस्पताल भिजवाया गया था। इस मामले में 25 नामजद और तीन सौ अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
तत्कालीन डीआईजी पर हमले के दोषियों को कल सुनाई जाएगी सजा
मैनाठेर बवाल के दौरान तत्कालीन डीआईजी पर हमले के मामले में 16 दोषियों को शनिवार को सजा सुनाई जाएगी। पहले शुक्रवार को सजा सुनाई जानी थी लेकिन उस दिन रामनवमी का अवकाश है। अदालत ने 23 मार्च को तत्कालीन डीआईजी पर हमले के मामले में 16 आरोपी दोषी करार दिए थे। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है जबकि छह आरोपी नाबालिग हैं।
जिनकी फाइल अलग चल रही है। दोषी ठहराए गए मंजूर अहमद निवासी डींगरपुर, मो. अली, हाशिम निवासी ललवारा थाना मैनाठेर, मो. कमरुल, मो.मुजीफ निवासी मसेबी रसूलपुर थाना मैनाठेर, मो.यूनुस, अम्बरीश निवासी शाहपुर चामरान, कासिम निवासी परियावली थाना असमोली जिला संभल, मो.मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन निवासी बरखेड़ा थाना डिडौली जिला अमरोहा, मो. मुजीब, तहजीब आलम निवासी असदपुर थाना मैनाठेर, जाने आलम निवासी मिलक नवाब मैनाठेर, मो. निवासी असदपुर मैनाठेर को जेल भेज दिया गया था। इस मामले में शुक्रवार 27 मार्च को सजा सुनाई जानी थी लेकिन शुक्रवार को अवकाश होने के कारण अब सजा शनिवार को सुनाई जाएगी।
16 वां आरोपी मो. फिरोज गिरफ्तार
23 मार्च को सुनवाई के दौरान 14 आरोपी ही भेज हुए थे जबकि मैनाठेर के लालपुर निवासी रिजवान और ताहरपुर निवासी मो. फिरोज हाजिर नहीं हुए थे। अगले दिन रिजवान ने कोर्ट में सरेंडर कर दियाथा जबकि मो. फिरोज फरार चल रहा था। एसपी देहात कुंवर आकाशसिंह ने बताया कि मो. फिरोज भी गिरफ्तार कर लिया गया है।