Moradabad: सामूहिक विवाह योजना में घोटाले पर गाज, छह ग्राम सचिव निलंबित, शासन तक पहुंची थी घोटाले की गूंज
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में हुए घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। जांच में 35 शादीशुदा जोड़ों की दोबारा शादी कराने और अपात्रों को पात्र दिखाने की पुष्टि हुई। डीएम को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर मूंढापांडे ब्लॉक के छह ग्राम सचिव निलंबित किए गए हैं। एडीओ समाज कल्याण के निलंबन की संस्तुति शासन से की गई है।
विस्तार
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में घोटाले पर जिम्मेदारों की गर्दन फंसने की नौबत आई तो आनन-फानन जांच के साथ कार्रवाई का दौर शुरू हो गया। अमर उजाला की ओर से लगातार इस शादी घोटाले की खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन ने अब बड़ी कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट मिलते ही डीएम ने मूंढापांडे ब्लॉक के छह ग्राम सचिवों को निलंबित कर दिया है।
जबकि एडीओ समाज कल्याण के निलंबन की संस्तुति शासन से की गई है। वहीं बीडीओ मूंढापांडे का वेतन रोकते हुए उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। घोटाले में कदम-कदम पर हुई मनमानी में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई थी कि 35 शादीशुदा जोड़ों की दोबारा शादी करा दी थी।
इन अपात्रों को पात्र बताते हुए सत्यापन रिपोर्ट भी दी थी। जिले में चार दिसंबर को बुद्धि विहार के मैदान में और पांच दिसंबर को एक अन्य स्थान पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत समारोह आयोजित किए गए थे। इसके अलावा जिले में कुछ अन्य स्थानों पर भी समारोह हुए थे।
सरकारी स्तर हुए इन आयोजनों में घपले-घोटाले और मनमानी के आरोप गर्माए तो मामले की जांच शुरू हुई। डीएम अनुज सिंह ने सीडीओ मृणाली अविनाश जोशी को जांच कराने के आदेश दिए। सीडीओ ने डीडीओ जीबी पाठक के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच की जिम्मेदारी सौंपी।
जिले के 30 अधिकारियों की टीम ने बिलारी और कुंदरकी ब्लाॅक की 808 शादियों का सत्यापन किया। इस दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच पूरी होने से पहले ही सीडीओ के निर्देश पर मूंढापांडे क्षेत्र के दो एडीओ को हटा दिया गया। इसके पीछे जांच प्रभावित न कर पाने की सोच थी। अब डीडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है।
जांच में पाया गया कि इन समारोहों में न सिर्फ 35 शादीशुदा जोड़ों की दोबारा शादी करा दी गई बल्कि एक एडीओ समाज कल्याण समेत सात अधिकारियों व कर्मचारियों ने इन्हें पात्र बताते हुए सत्यापन रिपोर्ट भी पेश कर दी। कागजी लक्ष्य के नाम पर इस तरह की शादियां कराने के सर्वाधिक मामले मूंढापांडे क्षेत्र के हैं।
डीएम अनुज सिंह ने डीडीओ स्तर की जांच रिपोर्ट के आधार पर मूंढापांडे के ग्राम सचिव घनेंद्र सिंह, मोहन सिंह रावत, इंतजार हुसैन, रवि कुमार, सादाब वली और रजत को निलंबित करने के निर्देश दिए है। इसके अलावा एडीओ समाज कल्याण प्रशांत कुमार को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध करने की संस्तुति की गई है।
साथ बीडीओ मूंढापांडे अशोक कुमार का वेतन रोककर विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। डीएम का कहना है कि सचिवों का निलंबन सीडीओ स्तर से होता है। एडीओ समाज कल्याण का निलंबन शासन से होगा। इस मामले में शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
शासन तक पहुंची थी घोटाले की गूंज
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में मनमानी और घोटाले की चर्चा शुरू होने के साथ ही यह मामला अमर उजाला की सुर्खियां बन गया। इससे जुड़ी कई खबरें मंत्रियों और शासन तक भी पहुंचीं। कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह ने आयोजनों पर अंगुली उठाते हुए जिले के प्रभारी मंत्री अनिल कुमार से इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
वहीं, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के निर्देश पर शासन की टीम भी इस मामले की जांच कर रही है। शासन की टीम 12 फरवरी को अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग के आला अफसरों व मंत्री को सौंपेगी।