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UP: मुरादाबाद में हर सातवीं गर्भवती को डिलीवरी के दौरान जान का खतरा, 35 से अधिक उम्र में गर्भधारण खतरे की वजह

शिवम वर्मा, अमर उजाला मुरादाबाद Published by: Vimal Sharma Updated Tue, 07 Apr 2026 01:15 PM IST
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सार

मुरादाबाद जनपद में गर्भवती महिलाओं की सेहत को लेकर स्थिति चिंताजनक है। हर सातवीं महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में है, जिससे डिलीवरी के दौरान जान का खतरा बना रहता है। कुपोषण, खून की कमी और गंभीर बीमारियां इसके मुख्य कारण हैं।

UP: In Moradabad, every seventh pregnant woman faces a life-threatening risk during delivery
गर्भवती - फोटो : adobestock
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विस्तार

मुरादाबाद जनपद में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट चौंकाने वाली है। हर सातवीं गर्भवती महिला को डिलीवरी के दौरान जान का खतरा है। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कहा जाता है। महिलाओं में कुपोषण, खून की कमी, शुगर, ब्लड प्रेशर, किडनी या लीवर की गंभीर बीमारियों के कारण डिलीवरी के दौरान जान का खतरा होता है।

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इसके अलावा 18 से कम या 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण भी इसकी वजह बन सकते हैं। जिले के सभी ब्लॉकों की रिपोर्ट पर नजर डालें तो ताजपुर में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। यहां 22.8 फीसदी गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई गई हैं।
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यानी यहां हर चौथी महिला की डिलीवरी जोखिम भरी है। रिपोर्ट के अनुसार ताजपुर में 3141 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई, जिनमें से 717 महिलाएं हाई रिस्क कैटेगरी में हैं। यह आंकड़ा जिले में सबसे ज्यादा है और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

जिले के अन्य ब्लॉकों में बिलारी (9.1 प्रतिशत), डिलारी (10.5 प्रतिशत) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। वहीं कांठ (13.6 प्रतिशत), कुंदरकी (14.1 प्रतिशत) और भोजपुर (14.1 प्रतिशत) मध्यम स्थिति में है। ठाकुरद्वारा (14.3 प्रतिशत), मूंढापांडे (15.9 प्रतिशत) और शहरी क्षेत्र (16.1 प्रतिशत) में खतरा बढ़ता नजर आ रहा है।

जनवरी 2026 तक पूरे जिले में कुल 57,363 गर्भवती महिलाओं की जांच में 8,347 महिलाएं हाई रिस्क पाई गई हैं, जो औसतन 14.6 फीसदी है। यानी हर सात में से एक महिला जोखिम में है। विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में समय पर जांच और सही इलाज न मिले तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है।

ऐसे में ताजपुर जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभियान चलाने की जरूरत है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पेट में तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, पैरों या चेहरे पर बहुत ज्यादा सूजन और शिशु की हलचल कम होना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं। इसके कारणों में मां की उम्र 18 से कम या 35 से ज्यादा बोना, हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या पुरानी बीमारियां शामिल हैं। इसमें बार-बार चेकअप, विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह और ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। - डॉ. दीपाली वर्मा, अध्यक्ष, मुरादाबाद ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनी सोसायटी

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान के लिए सरकार द्वारा हर माह निजी और सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराए जाते हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को पोषण के लिए जागरूक करती हैं। सभी ब्लॉकों में गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच की जाती है, जिससे परामर्श व दवा देकर सुरक्षित डिलीवरी कराई जा सके। - डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ
 

कहां कितनी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाएं
क्षेत्र    
भोजपुर 779 5538
बिलारी 446 4886
डिलारी 595 5642
कांठ 591 4351
कुंदरकी 870 6189
मूंढापांडे 715 4486
ताजपुर 717 3141
ठाकुरद्वारा 770 5377
शहर 2864 17753
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