UP: शामली के राज सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद मिला इंसाफ, चार दोषियों को फांसी, अदालत की सख्त टिप्पणी
शामली के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद मुजफ्फरनगर की अदालत ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। बाइक और नकदी लूट का विरोध करने पर किसान की हत्या की गई थी। अदालत ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है।
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मुजफ्फरनगर जनपद में शामली के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में 15 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा त्वरित न्यायालय संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि "न्याय में देरी, न्याय से इन्कार के समान होती है।" यह मामला वर्ष 2011 में बाइक और नकदी लूट का विरोध करने पर किसान की गोली मारकर हत्या से जुड़ा था।
बाइक और नकदी लूट का विरोध बना मौत की वजह
अभियोजन के अनुसार भोपा थाना क्षेत्र के भोकरहेड़ी निवासी 48 वर्षीय किसान राज सिंह अपने साथी बिजेंद्र के साथ 20 अगस्त 2011 की रात करीब सवा आठ बजे बाइक से अपनी बहन के घर शामली के कुड़ाना गांव जा रहे थे।
कुड़ाना से करीब एक किलोमीटर पहले आम के बाग के पास बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। दोनों पर लाठी-डंडों से हमला किया गया और उन्हें बाग में ले जाया गया। वहां बिजेंद्र के हाथ-पैर बांध दिए गए, जबकि लूट का विरोध करने पर राज सिंह की बेरहमी से पिटाई की गई और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए।
चारों दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा
मामले में कुड़ाना निवासी राहुल मलिक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस जांच में फुगाना के बहावड़ी गांव निवासी अजीत, सूरज उर्फ काला, शहर क्षेत्र के वहलना निवासी अनिल तथा देवरिया के घुसवा रामपुर निवासी सुनील के नाम सामने आए।
पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान सुनील के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर नौ जुलाई को उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
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राहगीरों को बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कुड़ाना जाने वाले मुख्य मार्ग के पास घात लगाकर खड़े हो जाते थे। वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों पर लाठियों से हमला कर उन्हें गिरा देते थे। इसके बाद उन्हें पास के बाग में ले जाकर बंधक बनाते और लूटपाट की वारदात को अंजाम देते थे। राज सिंह भी इसी गिरोह का शिकार बने थे।