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Pilibhit News: मुख्यमंत्री योगी आज प्रदान करेंगे भूमिधरी के अधिकार पत्र, विस्थापित परिवारों में खुशी
Mon, 29 Jun 2026 05:42 AM IST
Mukesh Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Published by: Mukesh Kumar
Updated Mon, 29 Jun 2026 05:42 AM IST
सार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को पीलीभीत जिले का दौरा करेंगे। उनका कार्यक्रम बरखेड़ा क्षेत्र के गांव पतरासा कुंवरपुर में प्रस्तावित है। यहां वह विस्थापित परिवारों के मुखिया को भूमिधरी के अधिकार पत्र प्रदान करेंगे।
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
वर्ष 1964 से 1971 के बीच तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित होकर पीलीभीत जिले में आए परिवारों को सदर, पूरनपुर और कलीनगर तहसील क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर बसाया गया। उन्हें जीवन यापन के लिए कृषि भूमि आवंटित की गई, लेकिन उस भूमि का मालिकाना अधिकार अब तक नहीं मिल सका। लंबा अरसा बीत गया। आवंटित भूमि पर मालिकाना अधिकार पाने के लिए बंगाली समाज के लोग आस लगाए रहे।
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इस बीच कई विस्थापितों की मौत हो गई। उनके परिवार के लोग भूमि पर खेती रह रहे हैं। मालिकाना अधिकार पाने का सपना अब पूरा होने जा रहा है। सोमवार 29 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बरखेड़ा क्षेत्र के गांव पतरासा कुंवरपुर में होने वाले कार्यक्रम में विस्थापित लोगों को भूमिधरी के अधिकार पत्र प्रदान करेंगे। इसे लेकर विस्थापित परिवारों में खुशी का माहौल है।
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अरसे बाद जमीन का मिल रहा मालिकाना हक
वर्ष 1959 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए बंगाली परिवारों को क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर बसाया गया था। उन्हें जीविका के लिए कृषि भूमि आवंटित की गई थी। करीब 67 वर्षों से आवंटित भूमि पर खेती करने के बावजूद भूमिधरी के अधिकार से वंचित 352 परिवारों के लिए यह दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है।
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बंगाली कॉलोनियों में खुशी का माहौल है। न्यूरिया कॉलोनी में 110, गुप्ता कॉलोनी में 75, राजा कॉलोनी में 60, महोफ कॉलोनी में 36, भरतपुर कॉलोनी में 55 तथा मुख्तियार कॉलोनी में 16 परिवारों सहित कुल 352 परिवार इससे लाभान्वित होंगे। अधिकांश मूल लाभार्थियों का निधन हो चुका है। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों को भूमिधर अधिकार के प्रमाणपत्र सौंपे जाएंगे।
तीन-तीन उपनिवेशन व विस्थापितों अधिकार पत्र देंगे मुख्यमंत्री
पूरनपुर के तहसीलदार आशीष गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री उपनिवेशन व पुनर्वास योजना के तहत बसाए गए तीन-तीन परिवारों को अधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। साथ ही कृषक दुर्घटना बीमा के तीन लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देगे। उपनिवेशन योजना के तहत पूरनपुर तहसील क्षेत्र में करीब एक हजार परिवार रह रहे हैं।
केनाराम सरकार ने बताया कि वर्ष 1964 में उनका परिवार यहां आया था। 1992 में गांव ढक्का चांट में पिता शंकर सरकार को चार एकड़ जमीन पुर्नवास योजना के तहत दी गई थी। अब जमीन पर मालिकाना हक मिलने जा रहा है। इससे परिवार में खुशी का माहौल है।
दीपक राम मंडल ने बताया कि जब मैं एक साल का था, तब उसके पिता परिवार के साथ आए थे। गांव ढक्काचाट में बसाया गया और खेती के लिए चार एकड़ जमीन दी गई। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बुलाया गया है। समस्या दूर होने जा रही है।
सुमेंद्र सरकार ने बताया कि जमीन पर मालिकाना हक लेने को बुजुर्ग संघर्ष करते रहे। मालिकाना हक मिलने की आस छोड़ चुके थे। मुख्यमंत्री अब यह हक देने आ रहे. इससे बड़ी खुशी जीवन की और कोई नहीं हो सकती।
पूरनपुर के तहसीलदार आशीष गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री उपनिवेशन व पुनर्वास योजना के तहत बसाए गए तीन-तीन परिवारों को अधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। साथ ही कृषक दुर्घटना बीमा के तीन लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देगे। उपनिवेशन योजना के तहत पूरनपुर तहसील क्षेत्र में करीब एक हजार परिवार रह रहे हैं।
केनाराम सरकार ने बताया कि वर्ष 1964 में उनका परिवार यहां आया था। 1992 में गांव ढक्का चांट में पिता शंकर सरकार को चार एकड़ जमीन पुर्नवास योजना के तहत दी गई थी। अब जमीन पर मालिकाना हक मिलने जा रहा है। इससे परिवार में खुशी का माहौल है।
दीपक राम मंडल ने बताया कि जब मैं एक साल का था, तब उसके पिता परिवार के साथ आए थे। गांव ढक्काचाट में बसाया गया और खेती के लिए चार एकड़ जमीन दी गई। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बुलाया गया है। समस्या दूर होने जा रही है।
सुमेंद्र सरकार ने बताया कि जमीन पर मालिकाना हक लेने को बुजुर्ग संघर्ष करते रहे। मालिकाना हक मिलने की आस छोड़ चुके थे। मुख्यमंत्री अब यह हक देने आ रहे. इससे बड़ी खुशी जीवन की और कोई नहीं हो सकती।
तारापद विश्वास ने कहा कि मेहनत से जमीन को खेती योग्य बनाया। उसी पर परिवार का जीवन चलता रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर भूमिधर अधिकार मिलना सबसे बड़ी खुशी है। पोते-पोतियों को जमीन के अधिकार को लेकर अनिश्चितता नहीं रहेगी।
चंदन तारा मंडल ने कहा कि दशकों तक मालिकाना अधिकार मिलने का इंतजार करते रहे। अब भूमिधर प्रमाणपत्र मिलने से परिवार को कानूनी सुरक्षा, सम्मान और स्थायी स्वामित्व मिल सकेगा।
चितरंजन मजूमदार ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय इंद्र भूषण मजूमदार को वर्ष 1959 में पांच एकड़ कृषि भूमि आवंटित हुई थी। परिवार कई दशकों से उसी भूमि पर खेती कर रहा है।
चंदन तारा मंडल ने कहा कि दशकों तक मालिकाना अधिकार मिलने का इंतजार करते रहे। अब भूमिधर प्रमाणपत्र मिलने से परिवार को कानूनी सुरक्षा, सम्मान और स्थायी स्वामित्व मिल सकेगा।
चितरंजन मजूमदार ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय इंद्र भूषण मजूमदार को वर्ष 1959 में पांच एकड़ कृषि भूमि आवंटित हुई थी। परिवार कई दशकों से उसी भूमि पर खेती कर रहा है।