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Pilibhit News: आजादी से पहले से ज्ञान की मशाल जलाता ड्रमंड, पीढ़ियों को दे रहा उज्ज्वल भविष्य
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:52 PM IST
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शहर के ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज का भवन। संवाद
- फोटो : मेडिकल काॅलेज की ओपीडी में लगी मरीजों व तीमारदारों की भीड़।
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पीलीभीत। शहर के टनकपुर हाईवे के किनारे स्थित ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि पीलीभीत की शैक्षिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। आजादी से पहले स्थापित यह विद्यालय पिछले एक सदी से अधिक समय से शिक्षा की अलख जगा रहा है और अनगिनत प्रतिभाओं को राष्ट्र सेवा के लिए तैयार कर चुका है।
ब्रिटिश काल में वर्ष 1890 में पीलीभीत के तत्कालीन कलेक्टर आर. ड्रमंड द्वारा जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई थी। उस समय यह विद्यालय जेपी रोड स्थित पुरानी तहसील भवन में संचालित किया गया था। वर्ष 1905 में विद्यालय को हाईस्कूल की मान्यता मिली। इसके बाद शहर के टनकपुर रोड स्थित स्थान पर विद्यालय के विशाल भवन का निर्माण कराकर नए स्थान पर विद्यालय को स्थापित किया गया। इस कॉलेज ने अंग्रेजी शासन के दौर में ही जिले ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना ली थी। शिक्षा के क्षेत्र में इसकी निरंतर प्रगति का परिणाम रहा कि वर्ष 1950 में इंटरमीडिएट की मान्यता प्राप्त हुई और जिले का पहला मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज की सूची में शामिल हुआ। यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र प्रशासन, चिकित्सा, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की सेवा कर रहे हैं।
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कोई उपराज्यपाल तो कोई आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त
इस कॉलेज के पूर्व छात्रों में एडमिरल डीके जोशी जो वर्तमान अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल शामिल हैं। इनके अलावा राजस्थान कैडर में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार और महाराष्ट्र में प्रतिष्ठ चिकित्सकों की सूची में शामिल एमडी डॉ सुभाष मारुति राव पाटणकर का नाम भी ड्रमंड कॉलेज से जुड़ा है।
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34 वें प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दे रहे संतोष कुमार
वर्तमान प्रधानाचार्य संतोष कुमार, जो कॉलेज के 34वें प्रधानाचार्य हैं। बताते हैं कि अब तक 33 प्रधानाचार्य यहां सेवाएं दे चुके हैं। ब्रिटिश काल के दौरान बने इस कॉलेज में करीब 30 कमरे हैं। आज कॉलेज में लगभग 1150 छात्र और 14 सदस्यीय स्टाफ शिक्षण कार्य संभाल रहा है। इसमें 10 सरकारी शिक्षक शामिल हैं। पीएम श्री योजना में चयन के बाद कॉलेज में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। कंप्यूटर लैब के साथ मिनी स्टेडियम के निर्माण को भी मंजूरी मिल चुकी है।
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यूपी टॉपर भी दे चुका कॉलेज, शिक्षक को मिल चुका राज्यपाल सम्मान
शैक्षिक उपलब्धियों की बात करें तो कॉलेज ने प्रदेश तक नाम रोशन किया है। प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने बताया कि कॉलेज वैसे तो जिले की टॉप टान सूची में लंबे समय तक रहा, लेकिन वर्ष 1992 में कॉलेज के 12वीं के छात्र रहे अमित ने यूपी टॉप कर न सिर्फ विद्यालय बल्कि जिले का नाम रोशन किया था। उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। कॉलेज के शिक्षक डॉ आरपी गंगवार को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर वर्ष 2019 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
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कोई उपराज्यपाल तो कोई आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त
इस कॉलेज के पूर्व छात्रों में एडमिरल डीके जोशी जो वर्तमान अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल शामिल हैं। इनके अलावा राजस्थान कैडर में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार और महाराष्ट्र में प्रतिष्ठ चिकित्सकों की सूची में शामिल एमडी डॉ सुभाष मारुति राव पाटणकर का नाम भी ड्रमंड कॉलेज से जुड़ा है।
34 वें प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दे रहे संतोष कुमार
वर्तमान प्रधानाचार्य संतोष कुमार, जो कॉलेज के 34वें प्रधानाचार्य हैं। बताते हैं कि अब तक 33 प्रधानाचार्य यहां सेवाएं दे चुके हैं। ब्रिटिश काल के दौरान बने इस कॉलेज में करीब 30 कमरे हैं। आज कॉलेज में लगभग 1150 छात्र और 14 सदस्यीय स्टाफ शिक्षण कार्य संभाल रहा है। इसमें 10 सरकारी शिक्षक शामिल हैं। पीएम श्री योजना में चयन के बाद कॉलेज में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। कंप्यूटर लैब के साथ मिनी स्टेडियम के निर्माण को भी मंजूरी मिल चुकी है।
यूपी टॉपर भी दे चुका कॉलेज, शिक्षक को मिल चुका राज्यपाल सम्मान
शैक्षिक उपलब्धियों की बात करें तो कॉलेज ने प्रदेश तक नाम रोशन किया है। प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने बताया कि कॉलेज वैसे तो जिले की टॉप टान सूची में लंबे समय तक रहा, लेकिन वर्ष 1992 में कॉलेज के 12वीं के छात्र रहे अमित ने यूपी टॉप कर न सिर्फ विद्यालय बल्कि जिले का नाम रोशन किया था। उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। कॉलेज के शिक्षक डॉ आरपी गंगवार को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर वर्ष 2019 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
