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Budget 2026: पीलीभीत के धार्मिक स्थलों के विकास की जगी उम्मीद, जिले में हैं कई प्राचीन मंदिर

संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 02 Feb 2026 02:23 PM IST
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सार

केंद्रीय बजट में धार्मिक स्थलों को विकसित के लिए प्रावधान किए गए हैं। इससे पीलीभीत जिले के गोमती उद्गम स्थल समेत कई धार्मिक स्थलों के विकास की उम्मीद जगी है।  

Hopes have been raised for the development of religious sites in Pilibhit
माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम स्थल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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केंद्र सरकार के आम बजट में प्राचीन धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने पर दिए गए जोर से पीलीभीत जिले के ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थलों को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। बजट में पर्यटन विकास को प्राथमिकता मिलने पर गोमती नदी के उद्गम स्थल, शहर के यशवंतरी देवी समेत जिले के कई प्रसिद्ध मंदिरों के विकास की राह और आसान हो सकती है।

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लखनऊ की शान कही जाने वाली गोमती नदी का उद्गम स्थल पीलीभीत के माधोटांडा क्षेत्र में स्थित है। इस स्थल को पर्यटन के रूप में विकसित करने का कार्य पहले से ही चल रहा है, इससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। 
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गौरीशंकर मंदिर
शहर स्थित प्रसिद्ध गौरीशंकर मंदिर कई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग में प्राचीन धरोहर के रूप में दर्ज होने के बावजूद अब तक पर्यटन के रूप में समुचित विकास से वंचित रहा है। बजट में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के संरक्षण और विकास की उम्मीद की जा रही है। 

यशवंतरी देवी मंदिर 
इसी तरह माता यशवंतरी देवी मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि मां पूर्णागिरी के दर्शन के बाद यशवंतरी देवी मंदिर में दर्शन किए बिना तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पर्यटन सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

प्राचीन इकोत्तहर नाथ मंदिर
घुंघचाई क्षेत्र में स्थित प्राचीन इकोत्तहर नाथ मंदिर का इतिहास भी महाभारत काल से जुड़ा बताया जाता है। सावन माह में विभिन्न घाटों से गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं और इसके बाद गोला गोकर्णनाथ के लिए प्रस्थान करते हैं। 

केंद्र सरकार की पर्यटन नीति और बजट में संभावित प्रावधानों से अब उम्मीद की जा रही है कि पीलीभीत के ये धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से अपनी पहचान बनाएंगे। यशवंतरी देवी मंदिर के महंत राजेश वाजपेयी का कहना है कि मंदिर को अगर पर्यटन के रूप में विकसित किया जाता है तो यह सरकार का एक सराहना कदम होगा। यहां न स्नानघर न ही विश्रामालय। ऐसे में यह सब व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी। श्रद्धालुओं को लाभ मिल सकेगा। 

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