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Pilibhit News: मानव-मगरमच्छ संघर्ष को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ाई निगरानी
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पीलीभीत। मानसून के दौरान बढ़ रहे मानव-मगरमच्छ संघर्ष को देखते हुए वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने जिले के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों से समन्वय बनाकर संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। साथ ही गश्त बढ़ाने, चेतावनी बोर्ड लगाने, जागरूकता अभियान चलाने और त्वरित सूचना तंत्र विकसित करने जैसे कई अहम कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में नदी-नहरों के फैले जाल के अलावा जलाशयों की संख्या भी अधिक है। वन विभाग के अनुसार, बरसात और बाढ़ के समय मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर गांवों और आबादी के नजदीक पहुंच जाते हैं। दूसरी ओर नदी किनारे खेती का विस्तार, प्राकृतिक जलाशयों का सिकुड़ना और बढ़ती आबादी के कारण उनके आवास प्रभावित हो रहे हैं। तराई क्षेत्र में ग्रामीणों की नदी और तालाबों पर निर्भरता के चलते सुबह और शाम के समय आमना-सामना होने की आशंका अधिक रहती है।
एडवाइजरी में संघर्ष रोकने के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर फोकस किया गया है। इसके तहत वन सीमाओं, नदी तटों, चराई क्षेत्रों और ग्राम तालाबों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाई जाएगी। संघर्ष संभावित हॉट स्पॉट से अतिक्रमण हटाने, कूड़ा-करकट का निस्तारण कराने और जरूरत पड़ने पर एसडीआरएफ के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को गांव-गांव जागरूक कर मगरमच्छ दिखने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने, जलाशयों में अनावश्यक प्रवेश से बचने और तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। विभाग ने प्रत्येक रेंज में नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने और किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मगरमच्छ हमले के पीड़ितों को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा दिलाने, संघर्ष वाले क्षेत्रों का डेटाबेस तैयार करने और नियमित निगरानी करने की व्यवस्था भी की जाएगी। आपात स्थिति में वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1926 के अलावा पीलीभीत रेंज-9473653055, बीसलपुर रेंज-7906027087 और पूरनपुर रेंज-7080642470 पर सूचना दी जा सकती है। डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि इसपर प्रभावी अमल शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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जिले में नदी-नहरों के फैले जाल के अलावा जलाशयों की संख्या भी अधिक है। वन विभाग के अनुसार, बरसात और बाढ़ के समय मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर गांवों और आबादी के नजदीक पहुंच जाते हैं। दूसरी ओर नदी किनारे खेती का विस्तार, प्राकृतिक जलाशयों का सिकुड़ना और बढ़ती आबादी के कारण उनके आवास प्रभावित हो रहे हैं। तराई क्षेत्र में ग्रामीणों की नदी और तालाबों पर निर्भरता के चलते सुबह और शाम के समय आमना-सामना होने की आशंका अधिक रहती है।
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एडवाइजरी में संघर्ष रोकने के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर फोकस किया गया है। इसके तहत वन सीमाओं, नदी तटों, चराई क्षेत्रों और ग्राम तालाबों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाई जाएगी। संघर्ष संभावित हॉट स्पॉट से अतिक्रमण हटाने, कूड़ा-करकट का निस्तारण कराने और जरूरत पड़ने पर एसडीआरएफ के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को गांव-गांव जागरूक कर मगरमच्छ दिखने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने, जलाशयों में अनावश्यक प्रवेश से बचने और तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। विभाग ने प्रत्येक रेंज में नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने और किसी भी सूचना पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मगरमच्छ हमले के पीड़ितों को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा दिलाने, संघर्ष वाले क्षेत्रों का डेटाबेस तैयार करने और नियमित निगरानी करने की व्यवस्था भी की जाएगी। आपात स्थिति में वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1926 के अलावा पीलीभीत रेंज-9473653055, बीसलपुर रेंज-7906027087 और पूरनपुर रेंज-7080642470 पर सूचना दी जा सकती है। डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि इसपर प्रभावी अमल शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद