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Pilibhit: तराई में नेपाली हाथियों के बढ़ते आतंक पर लगेगा अंकुश, वन विभाग करने जा रहा ये काम
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 05 Feb 2026 05:23 PM IST
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सार
पीलीभीत जिले में बीते कुछ महीनों से नेपाली हाथियों का आतंक बढ़ा है। ये हाथी जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र में नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने ठोस पहल की है।
फाइल फोटो
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
पीलीभीत जिले में तराई के जंगलों से सटे इलाकों में नेपाली हाथियों की लगातार बढ़ती सक्रियता और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देख वन विभाग ने ठोस पहल की है। जान-माल और फसलों की सुरक्षा के लिए अब विशेषज्ञों की मदद से वनकर्मियों और ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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जिले के जंगलों और उससे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में नेपाली हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पिछले कई महीनों से हाथी जंगल से बाहर निकलकर खेतों और आबादी वाले इलाकों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग की निगरानी के बावजूद हाथियों को नियंत्रित करने में कठिनाई आ रही है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए एक निर्णायक कार्ययोजना तैयार की है।
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पहले दिन मरौरी ब्लॉक में होगी कार्यशाला
डीएफओ भरत कुमार डीके के नेतृत्व में शुक्रवार से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से आयोजित होगी। प्रशिक्षण की खास बात यह है कि कतर्नियाघाट के प्रसिद्ध हाथी विशेषज्ञ दबीर हसन मुख्य प्रशिक्षक के रूप में शामिल होंगे। वे अपने दशकों के अनुभव के आधार पर हाथियों के व्यवहार, उनके मार्ग और संघर्ष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देंगे। पहले दिन मरौरी ब्लॉक के सभागार में सुबह 11 बजे से कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
दूसरे दिन गोमती उद्गम स्थल स्थित सभागार में विशेषज्ञों और स्थानीय समुदाय के बीच संवादात्मक कार्यशाला होगी। कार्यशाला में पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व, ऊर्जा निगम समेत अन्य विभागों के अफसर भी मौजूद रहेंगे। विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला में हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए खेतों और गांवों से दूर रखने के पारंपरिक व आधुनिक उपायों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है।
