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Pilibhit News: सर्वे तक सीमित कवायद...स्थानीय मार्गों पर रोडवेज बस सेवा ठप, डग्गामार वाहनों के भरोसे यात्री
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माधोटांडा मार्ग पर सवारियों को बैठाकर जाता टेंपो। संवाद
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जिले के माधोटांडा, गजरौला, दियोरिया सहित कई मार्गों पर नहीं शुरू हो सका नियमित बस संचालन, जिम्मेदार अंजान
पीलीभीत। आमजन को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने जिले के उन मार्गों का सर्वे कराया, जहां रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो रहा है। सर्वे में माधोटांडा समेत कई मार्ग को भी शामिल किया गया, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी माधोटांडा समेत कई अन्य मार्गों पर रोडवेज बस सेवा शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन, हजारों यात्रियों को डग्गामार वाहनों के सहारे ही खतरनाक सफर करना पड़ रहा है।
जिले के स्थानीय मार्गों पर नियमित बस सेवा न होने से यात्रियों को परिवहन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय डिपो से संचालित लगभग 120 बसों में से अधिकांश का संचालन दिल्ली मार्ग पर किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण और कस्बाई मार्ग उपेक्षित हैं। रोडवेज बसें न होने का फायदा डग्गामार वाहन चालक उठा रहे हैं, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में डाल रहे हैं। शासन से मिले निर्देशों के बाद जिन मार्गों पर आवाजाही अधिक है, उन्हें चिह्नित कर रोडवेज संचालन का दावा किया गया था, पर अब तक जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। संवाद
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माधोटांडा मार्ग : सालों बाद चली एक बस, दो माह में ही बंद
माधोटांडा–पीलीभीत मार्ग पर वर्षों से रोडवेज सेवा की मांग की जा रही थी। दबाव के बाद करीब छह माह पहले एक रोडवेज बस लगाई गई, लेकिन वह भी महज दो माह बाद बंद कर दी गई। वर्तमान में इस मार्ग पर 30 किलोमीटर का सफर 60 से अधिक डग्गामार वाहनों के सहारे तय करना पड़ता है। शाम छह बजे के बाद इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं रहता। नेपाल सीमा से सटे इलाकों तक फैले करीब 50 गांवों के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही इसी मार्ग पर अब डग्गामार वाहनों के सहारे ही निर्भर है।
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बरखेड़ा–गजरौला मार्ग भी डग्गामार के सहारे
बरखेड़ा–गजरौला मार्ग पर पूर्व में रोडवेज बस सेवा शुरू की गई थी। कुछ समय तक संचालन से लोगों को राहत मिली, लेकिन जल्द ही सेवा रोक दी गई। इसके बाद यात्रियों को फिर डग्गामार वाहनों पर निर्भर होना पड़ा। इसके कारण इस मार्ग पर हादसे भी अधिक होते हैं।
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दियोरिया–बीसलपुर मार्ग पर भी रोडवेज सेवा बंद
जिले के दियोरिया–बीसलपुर मार्ग पर भी रोडवेज बसें लंबे समय से बंद हैं। लोग लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। मजबूरी में यात्रियों को पहले बीसलपुर और फिर मुख्यालय आना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। स्थानीय मार्गों पर रोडवेज सेवा बहाल न होने से क्षेत्रीय लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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पांच नई बसों को उत्तराखंड, ऋषिकेश आदि रूटों पर लगाया
हाल ही में पीलीभीत डिपो को पांच नई बसें मिली थीं। उम्मीद जताई जा रही थी कि इनमें से एक-दो बसों को स्थानीय रूटों पर भी लगाया जा सकता है, लेकिन विभाग की ओर से इसे उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश आदि रूटों के लिए लगाया गया है। बसों का नियमित संचालन भी शुरू कर दिया गया। अफसरों का तर्क है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन बसों का संचालन शुरू किया गया है।
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स्थानीय मार्गों पर बसों के संचालन के लिए सर्वे कार्य चल रहा है। सर्वे के बाद आगे की योजना पर अमल किया जाएगा। स्थानीय मार्गों पर बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। - विपुल पाराशर, एआरएम
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पीलीभीत। आमजन को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने जिले के उन मार्गों का सर्वे कराया, जहां रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो रहा है। सर्वे में माधोटांडा समेत कई मार्ग को भी शामिल किया गया, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी माधोटांडा समेत कई अन्य मार्गों पर रोडवेज बस सेवा शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन, हजारों यात्रियों को डग्गामार वाहनों के सहारे ही खतरनाक सफर करना पड़ रहा है।
जिले के स्थानीय मार्गों पर नियमित बस सेवा न होने से यात्रियों को परिवहन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय डिपो से संचालित लगभग 120 बसों में से अधिकांश का संचालन दिल्ली मार्ग पर किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण और कस्बाई मार्ग उपेक्षित हैं। रोडवेज बसें न होने का फायदा डग्गामार वाहन चालक उठा रहे हैं, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में डाल रहे हैं। शासन से मिले निर्देशों के बाद जिन मार्गों पर आवाजाही अधिक है, उन्हें चिह्नित कर रोडवेज संचालन का दावा किया गया था, पर अब तक जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। संवाद
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माधोटांडा मार्ग : सालों बाद चली एक बस, दो माह में ही बंद
माधोटांडा–पीलीभीत मार्ग पर वर्षों से रोडवेज सेवा की मांग की जा रही थी। दबाव के बाद करीब छह माह पहले एक रोडवेज बस लगाई गई, लेकिन वह भी महज दो माह बाद बंद कर दी गई। वर्तमान में इस मार्ग पर 30 किलोमीटर का सफर 60 से अधिक डग्गामार वाहनों के सहारे तय करना पड़ता है। शाम छह बजे के बाद इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं रहता। नेपाल सीमा से सटे इलाकों तक फैले करीब 50 गांवों के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही इसी मार्ग पर अब डग्गामार वाहनों के सहारे ही निर्भर है।
बरखेड़ा–गजरौला मार्ग भी डग्गामार के सहारे
बरखेड़ा–गजरौला मार्ग पर पूर्व में रोडवेज बस सेवा शुरू की गई थी। कुछ समय तक संचालन से लोगों को राहत मिली, लेकिन जल्द ही सेवा रोक दी गई। इसके बाद यात्रियों को फिर डग्गामार वाहनों पर निर्भर होना पड़ा। इसके कारण इस मार्ग पर हादसे भी अधिक होते हैं।
दियोरिया–बीसलपुर मार्ग पर भी रोडवेज सेवा बंद
जिले के दियोरिया–बीसलपुर मार्ग पर भी रोडवेज बसें लंबे समय से बंद हैं। लोग लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। मजबूरी में यात्रियों को पहले बीसलपुर और फिर मुख्यालय आना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। स्थानीय मार्गों पर रोडवेज सेवा बहाल न होने से क्षेत्रीय लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पांच नई बसों को उत्तराखंड, ऋषिकेश आदि रूटों पर लगाया
हाल ही में पीलीभीत डिपो को पांच नई बसें मिली थीं। उम्मीद जताई जा रही थी कि इनमें से एक-दो बसों को स्थानीय रूटों पर भी लगाया जा सकता है, लेकिन विभाग की ओर से इसे उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश आदि रूटों के लिए लगाया गया है। बसों का नियमित संचालन भी शुरू कर दिया गया। अफसरों का तर्क है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन बसों का संचालन शुरू किया गया है।
स्थानीय मार्गों पर बसों के संचालन के लिए सर्वे कार्य चल रहा है। सर्वे के बाद आगे की योजना पर अमल किया जाएगा। स्थानीय मार्गों पर बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। - विपुल पाराशर, एआरएम

माधोटांडा मार्ग पर सवारियों को बैठाकर जाता टेंपो। संवाद

माधोटांडा मार्ग पर सवारियों को बैठाकर जाता टेंपो। संवाद