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Pilibhit News: बैकयार्ड किचन से आत्मनिर्भर बनेंगी समूह की महिलाएं
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पीलीभीत। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बैकयार्ड किचन योजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत चयनित महिलाओं को कृषि आजीविका सखी बनाया जाएगा, जो अपने गांवों में घरों के आसपास बैकयार्ड किचन विकसित कर अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करेंगी।
योजना के तहत महिलाएं अपने घरों में मौसमी सब्जियों के साथ-साथ फलदार पौधे भी लगाएंगी। इससे परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध होने के साथ घरेलू खर्च में कमी आएगी और अतिरिक्त उत्पादन होने पर आय बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से इस योजना को सफल बनाने के लिए उद्यान विभाग से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उद्यान विभाग चयनित महिलाओं को सब्जियों और फलदार पौधों के बीज उपलब्ध कराएगा। साथ ही बैकयार्ड किचन तैयार करने, पौधों की देखभाल और उन्नत खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कृषि आजीविका सखी अपने गांवों में अन्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी जागरूक करेंगी। इससे अधिक से अधिक परिवारों में पोषण वाटिकाएं विकसित होंगी और महिलाओं की कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलेगा। योजना के लिए पात्र महिलाओं का चयन जल्द शुरू किया जाएगा। चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर बैकयार्ड किचन विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का कृषि आजीविका सखी के रूप में चयन किया जाएगा। उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि प्रत्येक गांव में बैकयार्ड किचन विकसित हो सके और महिलाओं की आय व पोषण दोनों में वृद्धि हो। संवाद
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योजना के तहत महिलाएं अपने घरों में मौसमी सब्जियों के साथ-साथ फलदार पौधे भी लगाएंगी। इससे परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध होने के साथ घरेलू खर्च में कमी आएगी और अतिरिक्त उत्पादन होने पर आय बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से इस योजना को सफल बनाने के लिए उद्यान विभाग से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उद्यान विभाग चयनित महिलाओं को सब्जियों और फलदार पौधों के बीज उपलब्ध कराएगा। साथ ही बैकयार्ड किचन तैयार करने, पौधों की देखभाल और उन्नत खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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कृषि आजीविका सखी अपने गांवों में अन्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी जागरूक करेंगी। इससे अधिक से अधिक परिवारों में पोषण वाटिकाएं विकसित होंगी और महिलाओं की कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलेगा। योजना के लिए पात्र महिलाओं का चयन जल्द शुरू किया जाएगा। चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर बैकयार्ड किचन विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का कृषि आजीविका सखी के रूप में चयन किया जाएगा। उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि प्रत्येक गांव में बैकयार्ड किचन विकसित हो सके और महिलाओं की आय व पोषण दोनों में वृद्धि हो। संवाद