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Raebareli News: सड़क पर दौड़ रहे कबाड़, जोखिम में बच्चों की जान
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:14 AM IST
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रायबरेली में स्कूली वाहनों की जांच करते एआरटीओ।
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रायबरेली। नया सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई। जिले में 400 से अधिक निजी स्कूलों में बच्चों को लाने में अनफिट व कबाड़ वाहनों का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। इन स्कूलों में 1675 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 51 अनुबंधित वाहन शामिल हैं। स्कूलों में 885 छोटी-बड़ी बसें काम कर रही हैं। खास बात यह कि 312 स्कूली वाहन ऐसे हैं, जो फिट नहीं हैं।
149 स्कूली वाहन अपनी उम्र भी पूरी कर चुके हैं। जल्द ही ये कबाड़ घोषित कर दिए जाएंगे। इसके बाद भी इन वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया व ले जाया जा रहा है। आए दिन स्कूली वाहनों से हादसों में बच्चे घायल हो रहे हैं। बीती 31 जनवरी को महराजगंज के हैदरगढ़ मार्ग पर कुबना पुल के पास स्कूली वाहन के हादसे का शिकार होने पर नौ बच्चे घायल हुए थे। इसी तरह कई और हादसों में बच्चे घायल हो चुके हैं।
परिवहन विभाग की ओर से अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया गया, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। स्कूली वाहनों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। मानकों के विपरीत स्कूलों में संचालित ओमनी वैन, मोटर कैब, मैक्सी कैब आदि वाहन आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं।
एक हजार से अधिक निजी वाहनों का उपयोग
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों में प्राइवेट गाड़ियों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। बिना परमिट और फिटनेस के ही वैन व अन्य वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन वाहनों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। इसमें तमाम ऐसे वाहन भी हैं, जिनका पंजीयन समाप्त हो चुका है। इन वाहनों को घोस्ट वाहन कहा जाता है। ऐसे वाहनों को स्कूलों में बच्चों को लाने में शामिल किया गया है।
दो माह में 75 स्कूली वाहनों का चालान
जनवरी से अब तक दो माह में करीब 75 वाहनों का चालान किया गया है। इसमें 15 से अधिक स्कूली वाहनों को बंद भी कराया गया। इससे पूर्व भी कई अभियान चलाकर फिटनेस, सेफ्टी, परमिट आदि जांची गई। बसों में खामियां मिलने के बाद स्कूल संचालकों को चेताया गया है। आटो, ई रिक्शा सहित अन्य वाहनों का भी चालान किया गया, लेकिन मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है।
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149 स्कूली वाहन अपनी उम्र भी पूरी कर चुके हैं। जल्द ही ये कबाड़ घोषित कर दिए जाएंगे। इसके बाद भी इन वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया व ले जाया जा रहा है। आए दिन स्कूली वाहनों से हादसों में बच्चे घायल हो रहे हैं। बीती 31 जनवरी को महराजगंज के हैदरगढ़ मार्ग पर कुबना पुल के पास स्कूली वाहन के हादसे का शिकार होने पर नौ बच्चे घायल हुए थे। इसी तरह कई और हादसों में बच्चे घायल हो चुके हैं।
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परिवहन विभाग की ओर से अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया गया, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। स्कूली वाहनों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। मानकों के विपरीत स्कूलों में संचालित ओमनी वैन, मोटर कैब, मैक्सी कैब आदि वाहन आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं।
एक हजार से अधिक निजी वाहनों का उपयोग
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों में प्राइवेट गाड़ियों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। बिना परमिट और फिटनेस के ही वैन व अन्य वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन वाहनों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। इसमें तमाम ऐसे वाहन भी हैं, जिनका पंजीयन समाप्त हो चुका है। इन वाहनों को घोस्ट वाहन कहा जाता है। ऐसे वाहनों को स्कूलों में बच्चों को लाने में शामिल किया गया है।
दो माह में 75 स्कूली वाहनों का चालान
जनवरी से अब तक दो माह में करीब 75 वाहनों का चालान किया गया है। इसमें 15 से अधिक स्कूली वाहनों को बंद भी कराया गया। इससे पूर्व भी कई अभियान चलाकर फिटनेस, सेफ्टी, परमिट आदि जांची गई। बसों में खामियां मिलने के बाद स्कूल संचालकों को चेताया गया है। आटो, ई रिक्शा सहित अन्य वाहनों का भी चालान किया गया, लेकिन मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है।