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Rampur News: खेल मैदान के अभाव में दम तोड़ रहीं कस्बे की खेल प्रतिभाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Wed, 08 Apr 2026 02:29 AM IST
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मिलक। कस्बे के युवाओं और उभरते खिलाड़ियों के लिए यह बेहद निराशाजनक स्थिति है कि आज भी उन्हें समुचित खेल मैदान की सुविधा नहीं मिल पाई है। खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए जहां बेहतर संसाधनों की आवश्यकता होती है, वहीं यहां खिलाड़ियों को एक साधारण मैदान तक उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति खेल संस्कृति के विकास में बाधा बन रही है और कई प्रतिभाशाली युवा हताश होकर खेलों से दूरी बना रहे हैं।
वर्षों से कस्बे में एक भी खेल मैदान विकसित नहीं किया गया है। कुछ निजी विद्यालयों के छोटे मैदान अव्यवस्थित हो चुके हैं या अन्य निर्माणों में तब्दील कर दिए गए हैं। ऐसे में युवा सड़कों, गलियों या खेतों के किनारों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से खिलाड़ियों के लिए एक पक्का खेल मैदान विकसित कराने की मांग की है।
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वर्जन
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मैं पिछले चार साल से क्रिकेट की प्रैक्टिस कर रहा हूं, लेकिन हमारे पास न पिच है और न ही सुरक्षित मैदान। कभी सड़क पर तो कभी बंजर जमीन पर अभ्यास करना पड़ता है। शहरों में बेहतर सुविधाएं देखकर लगता है कि हम पीछे क्यों रह जाते हैं। -सुजांत आर्य, मिलक
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मैं मार्शल आर्ट में नेशनल स्तरीय अवार्ड प्राप्त कर चुका हूं, लेकिन तैयारी के लिए खेतों या अन्य स्थानों पर अभ्यास करना पड़ता है। कई बार गिरकर चोट भी आई, लेकिन मजबूरी है। अगर ट्रैक वाला मैदान मिल जाए तो हम आगे बढ़ सकते हैं। -सम्राट गंगवार, मिलक
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मेरे पास करीब 50 बच्चे प्रशिक्षण के लिए आते हैं, लेकिन बिना मैदान के उन्हें सिखाना बेहद कठिन है। सही माहौल न मिलने के कारण कई बच्चे खेल छोड़ चुके हैं। जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, प्रतिभाएं दम तोड़ती रहेंगी। -प्रदीप कुमार गौतम, खेल प्रशिक्षक
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जनप्रतिनिधियों और खेल विभाग को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देकर शीघ्र बहुउद्देश्यीय खेल मैदान की स्वीकृति और निर्माण शुरू करना चाहिए। -सुनील यादव, कबड्डी खिलाड़ी, मिलक
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कस्बे में खेल मैदान का अभाव केवल एक भौतिक कमी नहीं, बल्कि कई सपनों और संभावनाओं पर विराम जैसा है। यदि युवाओं को उचित मंच नहीं मिला, तो यह व्यक्तिगत ही नहीं, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसानदेह होगा। -सुशील गंगवार, मिलक
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वर्षों से कस्बे में एक भी खेल मैदान विकसित नहीं किया गया है। कुछ निजी विद्यालयों के छोटे मैदान अव्यवस्थित हो चुके हैं या अन्य निर्माणों में तब्दील कर दिए गए हैं। ऐसे में युवा सड़कों, गलियों या खेतों के किनारों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से खिलाड़ियों के लिए एक पक्का खेल मैदान विकसित कराने की मांग की है।
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वर्जन
मैं पिछले चार साल से क्रिकेट की प्रैक्टिस कर रहा हूं, लेकिन हमारे पास न पिच है और न ही सुरक्षित मैदान। कभी सड़क पर तो कभी बंजर जमीन पर अभ्यास करना पड़ता है। शहरों में बेहतर सुविधाएं देखकर लगता है कि हम पीछे क्यों रह जाते हैं। -सुजांत आर्य, मिलक
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मैं मार्शल आर्ट में नेशनल स्तरीय अवार्ड प्राप्त कर चुका हूं, लेकिन तैयारी के लिए खेतों या अन्य स्थानों पर अभ्यास करना पड़ता है। कई बार गिरकर चोट भी आई, लेकिन मजबूरी है। अगर ट्रैक वाला मैदान मिल जाए तो हम आगे बढ़ सकते हैं। -सम्राट गंगवार, मिलक
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मेरे पास करीब 50 बच्चे प्रशिक्षण के लिए आते हैं, लेकिन बिना मैदान के उन्हें सिखाना बेहद कठिन है। सही माहौल न मिलने के कारण कई बच्चे खेल छोड़ चुके हैं। जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, प्रतिभाएं दम तोड़ती रहेंगी। -प्रदीप कुमार गौतम, खेल प्रशिक्षक
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जनप्रतिनिधियों और खेल विभाग को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देकर शीघ्र बहुउद्देश्यीय खेल मैदान की स्वीकृति और निर्माण शुरू करना चाहिए। -सुनील यादव, कबड्डी खिलाड़ी, मिलक
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कस्बे में खेल मैदान का अभाव केवल एक भौतिक कमी नहीं, बल्कि कई सपनों और संभावनाओं पर विराम जैसा है। यदि युवाओं को उचित मंच नहीं मिला, तो यह व्यक्तिगत ही नहीं, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसानदेह होगा। -सुशील गंगवार, मिलक