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Saharanpur News: डॉ. आंबेडकर को समर्पित होगा एक्सप्रेसवे, पश्चिमी यूपी में दलित सियासत पर बड़ा दांव
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 08 Apr 2026 01:37 AM IST
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सहारनपुर। 14 अप्रैल को प्रस्तावित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण से पश्चिमी यूपी में सियासत की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा नेताओं की मानें तो लोकार्पण के लिए यह दिन इसलिए निर्धारित किया गया कि उस दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी है। दलित राजनीति को साधने के लिए इस एक्सप्रेसवे को डॉ. भीमराव आंबेडकर को समर्पित किया जा सकता है। पश्चिमी यूपी में दलित सियासत पर भाजपा का अब तक का सबसे बड़ा दांव माना जा रहा है।
दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से होकर गुजरता है। सहारनपुर में करीब 84 किमी के दायरे में यह एक्सप्रेसवे है। भाजपा के लिए यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर लगातार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ जैसे जिलों में दलित मतदाता कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करते हैं। ऐसे में एक्सप्रेसवे के लोकार्पण को विकास के साथ सामाजिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। अनुसूचित समाज को साधने के लिए भाजपा का यह बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है।
2027 के चुनाव में भाजपा इस एक्सप्रेसवे से वोट की राह पकड़ पाती है या नहीं, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, लेकिन राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा उठ चुका है। हाल ही में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी एक्सप्रेसवे का नाम डॉ. आंबेडकर के नाम पर रखने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है।
90 हजार की बजाय काटे 11 हजार पेड़
पहले एलिवेटेड रोड की वजह पुराने सड़क मार्ग को ही चौड़ा करने का प्रस्ताव था। इसमें करीब 90 हजार पेड़ों को काटना पड़ रहा था। एनजीटी की आपत्ति के बाद एलिवेटेड रोड पर विचार किया गया, जिसे मूर्त रूप देने के लिए केवल 11 हजार पेड़ ही काटने पड़े। एलिवेटेड रोड 575 पिलरों पर बनाई गई है। यह सहारनपुर के शिवालिक जंगल और देहरादून के राष्ट्रीय राजाजी टाइगर रिजर्व के ऊपर से गुजर रही है। डाट काली मंदिर जाने के वायडक्ट बनाया गया है। एलिवेटेड रोड पर विशेष पीला प्रकाश देने वाली लाइटें लगाई गई हैं ताकि इन पर कीट पतंगे न आएं।
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फैक्ट फाइल :
- 210 किमी लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग तैयार
- लाइटिंग, पेंटिंग और सुरक्षा उपकरणों का फिनिशिंग काम जारी
- चालू होने पर सफर समय घटकर लगभग 2.5 घंटे
-5 रेलवे ओवरब्रिज
- 110 वाहन अंडरपास
- 76 किमी सर्विस रोड
- 29 किमी का एलिवेटेड रोड
-16 प्रवेश और निकास द्वार
- प्रत्येक तीस किमी पर रेस्ट एरिया, इनमें बन रहे जनसुविधा केंद्र
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फेज 1 :
- अक्षरधाम (दिल्ली) से बागपत/खेकड़ा
फेज-2 दूरी 32 किमी
- बागपत से लाखनौर (सहारनपुर)
फेज-3 दूरी 118 किमी
- लाखनौर (सहारनपुर) से गणेशपुर बिहारीगढ़ (सहारनपुर) तक दूरी 42 किमी
(यह रूट पंचकूला-देहरादून हाईवे का ही विस्तार है, जो पहले से चल रहा है। एक्सप्रेस-वे के लिए इसका चौड़ीकरण किया गया है।)
फेज-4
- बिहारीगढ़ में गणेशपुर टोल से देहरादून तक दूरी 18 किमी, इसमें 12 किमी एलिवेटेड रोड है।
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दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से होकर गुजरता है। सहारनपुर में करीब 84 किमी के दायरे में यह एक्सप्रेसवे है। भाजपा के लिए यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर लगातार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ जैसे जिलों में दलित मतदाता कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करते हैं। ऐसे में एक्सप्रेसवे के लोकार्पण को विकास के साथ सामाजिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। अनुसूचित समाज को साधने के लिए भाजपा का यह बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है।
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2027 के चुनाव में भाजपा इस एक्सप्रेसवे से वोट की राह पकड़ पाती है या नहीं, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, लेकिन राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा उठ चुका है। हाल ही में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी एक्सप्रेसवे का नाम डॉ. आंबेडकर के नाम पर रखने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है।
90 हजार की बजाय काटे 11 हजार पेड़
पहले एलिवेटेड रोड की वजह पुराने सड़क मार्ग को ही चौड़ा करने का प्रस्ताव था। इसमें करीब 90 हजार पेड़ों को काटना पड़ रहा था। एनजीटी की आपत्ति के बाद एलिवेटेड रोड पर विचार किया गया, जिसे मूर्त रूप देने के लिए केवल 11 हजार पेड़ ही काटने पड़े। एलिवेटेड रोड 575 पिलरों पर बनाई गई है। यह सहारनपुर के शिवालिक जंगल और देहरादून के राष्ट्रीय राजाजी टाइगर रिजर्व के ऊपर से गुजर रही है। डाट काली मंदिर जाने के वायडक्ट बनाया गया है। एलिवेटेड रोड पर विशेष पीला प्रकाश देने वाली लाइटें लगाई गई हैं ताकि इन पर कीट पतंगे न आएं।
फैक्ट फाइल :
- 210 किमी लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग तैयार
- लाइटिंग, पेंटिंग और सुरक्षा उपकरणों का फिनिशिंग काम जारी
- चालू होने पर सफर समय घटकर लगभग 2.5 घंटे
-5 रेलवे ओवरब्रिज
- 110 वाहन अंडरपास
- 76 किमी सर्विस रोड
- 29 किमी का एलिवेटेड रोड
-16 प्रवेश और निकास द्वार
- प्रत्येक तीस किमी पर रेस्ट एरिया, इनमें बन रहे जनसुविधा केंद्र
फेज 1 :
- अक्षरधाम (दिल्ली) से बागपत/खेकड़ा
फेज-2 दूरी 32 किमी
- बागपत से लाखनौर (सहारनपुर)
फेज-3 दूरी 118 किमी
- लाखनौर (सहारनपुर) से गणेशपुर बिहारीगढ़ (सहारनपुर) तक दूरी 42 किमी
(यह रूट पंचकूला-देहरादून हाईवे का ही विस्तार है, जो पहले से चल रहा है। एक्सप्रेस-वे के लिए इसका चौड़ीकरण किया गया है।)
फेज-4
- बिहारीगढ़ में गणेशपुर टोल से देहरादून तक दूरी 18 किमी, इसमें 12 किमी एलिवेटेड रोड है।