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Saharanpur News: जिपं में नई व्यवस्था पर चढ़ा सियासी पारा, सत्ता-विपक्ष के अलग-अलग सुर
Sun, 12 Jul 2026 01:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 12 Jul 2026 01:39 AM IST
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सहारनपुर। जिला पंचायत में नई व्यवस्था को लेकर जिला पंचायत सदस्यों की राय बंटी हुई है। विपक्षी सदस्य इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए समय पर चुनाव कराने और सदस्यों को भी समान अधिकार देने की मांग कर रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थित सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ऐसे में सरकार के फैसले को लेकर जिला पंचायत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
यह बोले जिला पंचायत सदस्य
- वार्ड-39 से कांग्रेस से समर्थित जिला पंचायत सदस्य रामोदेवी का कहना है कि सरकार को निर्धारित समय में चुनाव कराने चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक नियुक्त कर अपनी दोहरी नीति का परिचय दिया है। जिला पंचायत सदस्य को भी उनके क्षेत्र का प्रशासक नियुक्त करना चाहिए था। यह फैसला गलत है।
- वार्ड-44 से सपा के जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र मौर्य का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक बनाया गया है, लेकिन सदस्यों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया है, जो जनहित में नहीं है। सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जाता तो रुके विकास कार्यों को पूरा कराया जा सकता था।
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- वार्ड-41 की सदस्या ममता चौधरी का कहना है कि यदि विकास के लिए जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाना जरूरी है तो सदस्यों की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। जनता सीधे तौर पर सदस्यों के सामने ही अपनी बात रखती है। सदस्यों का कार्यकाल भी बढ़ना चाहिए।
- वार्ड-32 के सदस्य माजिद अली का कहना है कि लोकतंत्र में समय पर चुनाव होने चाहिए। यदि समय पर चुनाव नहीं होंगे तो कुछ न कुछ खामियां जरूर हैं। यदि जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल बढ़ता भी है तो विपक्ष के सदस्य की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसलिए कार्यकाल बढ़े या प्रशासक बनाए जाएं विपक्ष के प्रतिनिधि को कोई लाभ नहीं होगा।
- सपा से जुड़े वार्ड-24 के जिला पंचायत सदस्य चौधरी जीशान एडवोकेट का कहना है कि जिला पंचायत सदस्यों के पास न तो कोई अलग खाता होता है और न ही कोई विकास निधि होती है। उनकी जिम्मेदारी केवल क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत को भेजने की होती है। क्षेत्र के अधिकांश विकास कार्यों के प्रस्ताव पहले ही संबंधित विभाग को भेजे जा चुके हैं।
वार्ड-21 की भाजपा जिला पंचायत सदस्य सविता सैनी ने कहा कि इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका नहीं है। जिला पंचायत सदस्यों के पास न तो कोई अलग बजट होता है और न ही कोई स्वतंत्र निधि। वार्ड से संबंधित कई विकास प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं। ऐसे में शासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के बावजूद विकास कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा आने की संभावना नहीं है।
यह बोले अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी का कहना है कि सरकार ने जनहित को देखते हुए फैसला लिया है, जो भी जिम्मेदारी दी गई है उसे पूरे कर्तव्य के साथ निभाया जाएगा।
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यह बोले जिला पंचायत सदस्य
- वार्ड-39 से कांग्रेस से समर्थित जिला पंचायत सदस्य रामोदेवी का कहना है कि सरकार को निर्धारित समय में चुनाव कराने चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक नियुक्त कर अपनी दोहरी नीति का परिचय दिया है। जिला पंचायत सदस्य को भी उनके क्षेत्र का प्रशासक नियुक्त करना चाहिए था। यह फैसला गलत है।
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- वार्ड-44 से सपा के जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र मौर्य का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक बनाया गया है, लेकिन सदस्यों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया है, जो जनहित में नहीं है। सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जाता तो रुके विकास कार्यों को पूरा कराया जा सकता था।
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- वार्ड-41 की सदस्या ममता चौधरी का कहना है कि यदि विकास के लिए जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाना जरूरी है तो सदस्यों की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। जनता सीधे तौर पर सदस्यों के सामने ही अपनी बात रखती है। सदस्यों का कार्यकाल भी बढ़ना चाहिए।
- वार्ड-32 के सदस्य माजिद अली का कहना है कि लोकतंत्र में समय पर चुनाव होने चाहिए। यदि समय पर चुनाव नहीं होंगे तो कुछ न कुछ खामियां जरूर हैं। यदि जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल बढ़ता भी है तो विपक्ष के सदस्य की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसलिए कार्यकाल बढ़े या प्रशासक बनाए जाएं विपक्ष के प्रतिनिधि को कोई लाभ नहीं होगा।
- सपा से जुड़े वार्ड-24 के जिला पंचायत सदस्य चौधरी जीशान एडवोकेट का कहना है कि जिला पंचायत सदस्यों के पास न तो कोई अलग खाता होता है और न ही कोई विकास निधि होती है। उनकी जिम्मेदारी केवल क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत को भेजने की होती है। क्षेत्र के अधिकांश विकास कार्यों के प्रस्ताव पहले ही संबंधित विभाग को भेजे जा चुके हैं।
वार्ड-21 की भाजपा जिला पंचायत सदस्य सविता सैनी ने कहा कि इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका नहीं है। जिला पंचायत सदस्यों के पास न तो कोई अलग बजट होता है और न ही कोई स्वतंत्र निधि। वार्ड से संबंधित कई विकास प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं। ऐसे में शासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के बावजूद विकास कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा आने की संभावना नहीं है।
यह बोले अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी का कहना है कि सरकार ने जनहित को देखते हुए फैसला लिया है, जो भी जिम्मेदारी दी गई है उसे पूरे कर्तव्य के साथ निभाया जाएगा।