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पहचान छिपाना नहीं, कानून का राज ही मॉब लिंचिंग का समाधान : मदनी
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मौलाना महमूद मदनी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें मुसलमानों को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए पारंपरिक वेशभूषा बदलने की सलाह दी थी।
मौलाना महमूद मदनी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि समस्या किसी समुदाय की पहचान या पहनावे में नहीं बल्कि नफरत की मानसिकता और कानून हाथ में लेने वाली भीड़ में है। किसी जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा पीड़ित समुदाय को अपनी पहचान छिपाने की सलाह देना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाए पीड़ितों से अपनी पहचान बदलने की अपेक्षा करना समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
मौलाना मदनी ने कहा कि दादरी, अलवर, हापुड़, झारखंड, भरतपुर और चरखी दादरी जैसी मॉब लिंचिंग की घटनाओं में पीड़ितों का पहनावा हमलों का कारण नहीं था। बोस्निया का उदाहरण देते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि केवल बाहरी पहचान बदल लेने से किसी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। असली सवाल यह है कि भीड़ को किसी नागरिक की पहचान पूछने, उसका पीछा करने और उसकी हत्या करने का साहस क्यों मिलता है।
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कहा कि यदि चर्चा का केंद्र अपराधियों के बजाय पीड़ित का पहनावा बना दिया जाएगा, तो हिंसा की जिम्मेदारी भी अनजाने में पीड़ित पर ही डाल दी जाएगी। मौलाना मदनी ने कहा कि देश में शांति और कानून-व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब मॉब लिंचिंग के मामलों में कानून का सख्ती से पालन हो। दोषियों को निष्पक्ष कार्रवाई के तहत दंड मिले और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही मौलाना महमूद ने समाज के सभी जिम्मेदार लोगों से नफरत के माहौल के बजाए कानून के शासन को मजबूत करने की अपील की।
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें मुसलमानों को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए पारंपरिक वेशभूषा बदलने की सलाह दी थी।
मौलाना महमूद मदनी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि समस्या किसी समुदाय की पहचान या पहनावे में नहीं बल्कि नफरत की मानसिकता और कानून हाथ में लेने वाली भीड़ में है। किसी जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा पीड़ित समुदाय को अपनी पहचान छिपाने की सलाह देना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाए पीड़ितों से अपनी पहचान बदलने की अपेक्षा करना समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
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मौलाना मदनी ने कहा कि दादरी, अलवर, हापुड़, झारखंड, भरतपुर और चरखी दादरी जैसी मॉब लिंचिंग की घटनाओं में पीड़ितों का पहनावा हमलों का कारण नहीं था। बोस्निया का उदाहरण देते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि केवल बाहरी पहचान बदल लेने से किसी समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। असली सवाल यह है कि भीड़ को किसी नागरिक की पहचान पूछने, उसका पीछा करने और उसकी हत्या करने का साहस क्यों मिलता है।
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कहा कि यदि चर्चा का केंद्र अपराधियों के बजाय पीड़ित का पहनावा बना दिया जाएगा, तो हिंसा की जिम्मेदारी भी अनजाने में पीड़ित पर ही डाल दी जाएगी। मौलाना मदनी ने कहा कि देश में शांति और कानून-व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब मॉब लिंचिंग के मामलों में कानून का सख्ती से पालन हो। दोषियों को निष्पक्ष कार्रवाई के तहत दंड मिले और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही मौलाना महमूद ने समाज के सभी जिम्मेदार लोगों से नफरत के माहौल के बजाए कानून के शासन को मजबूत करने की अपील की।