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Sambhal News: गंगा का जलस्तर घटा, बाढ़ प्रभावित गांवों को राहत
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जुनावई। गंगा नदी का जलस्तर घटने से क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को जलस्तर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद शनिवार को इसमें गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाढ़ का पानी अब भी कई किसानों के खेतों में भरा है, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है।
पिछले कई दिनों से गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बांध के भीतर बसे बझांगी, तोतापुर और मेंगरा समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था। बझांगी गांव की मुख्य गलियों तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया था। मेंगरा गांव के मुख्य नाले में बाढ़ का पानी आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी।
तोतापुर गांव के पश्चिमी हिस्से के खेत भी जलमग्न हो गए थे। बाढ़ के कारण बझांगी गांव में रामचरन के गन्ने, शिशुपाल, रोहदास और नवाब सिंह के धान, रामनिवास के बाजरा व उड़द तथा दुर्गेश के मक्का की फसल पानी में डूब गई। वहीं, तोतापुर गांव में राजवीर, शिशुपाल के गन्ने, ताराचंद, जगपाल, राजवीर और राजेंद्र के बाजरे के खेतों में भी बाढ़ का पानी भर गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन खेतों में भरे पानी के कारण फसलों के सड़ने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में दवा का छिड़काव कराने और स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने की मांग की है।
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शनिवार को गांव और खेतों में पानी घटा है। फिलहाल अभी किसी प्रकार का खतरा नहीं है। फिर भी जरूरत पड़ी तो दवाओं के छिड़काव और स्वास्थ्य विभाग की टीम को संबंधित गांव में भेजा जाएगा।
अवधेश कुमार, एसडीएम गुन्नौर
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पिछले कई दिनों से गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बांध के भीतर बसे बझांगी, तोतापुर और मेंगरा समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था। बझांगी गांव की मुख्य गलियों तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया था। मेंगरा गांव के मुख्य नाले में बाढ़ का पानी आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी।
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तोतापुर गांव के पश्चिमी हिस्से के खेत भी जलमग्न हो गए थे। बाढ़ के कारण बझांगी गांव में रामचरन के गन्ने, शिशुपाल, रोहदास और नवाब सिंह के धान, रामनिवास के बाजरा व उड़द तथा दुर्गेश के मक्का की फसल पानी में डूब गई। वहीं, तोतापुर गांव में राजवीर, शिशुपाल के गन्ने, ताराचंद, जगपाल, राजवीर और राजेंद्र के बाजरे के खेतों में भी बाढ़ का पानी भर गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन खेतों में भरे पानी के कारण फसलों के सड़ने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में दवा का छिड़काव कराने और स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने की मांग की है।
शनिवार को गांव और खेतों में पानी घटा है। फिलहाल अभी किसी प्रकार का खतरा नहीं है। फिर भी जरूरत पड़ी तो दवाओं के छिड़काव और स्वास्थ्य विभाग की टीम को संबंधित गांव में भेजा जाएगा।
अवधेश कुमार, एसडीएम गुन्नौर