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Sambhal News: पट्टों की बहती गंगा में हाथ धोने वालों में सरकारी कर्मचारी भी
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संभल। गुन्नौर तहसील के गैर आबाद गांव सुखैला में साल 2013 में गंगा किनारे की 850 बीघा से ज्यादा सरकारी जमीन को नियम विरुद्ध पट्टों से खुर्दबुर्द करने में जहां तत्कालीन अफसरों की मनमानी थी, वहीं इसमें कई कर्मचारियों ने खुद के या अपनों के नाम में भी पट्टे हासिल कर लिए थे। इसकी भनक लगने के बाद प्रशासन मामले को लेकर और गंभीर हो गया है। साथ ही जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच पट्टाधारकों में शामिल ग्राम असदपुर के काफी लोगों को नोटिस तामील कराए गए हैं।
डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि जिन लोगों को पट्टे आवंटित किए गए थे, उनसे नोटिस के माध्यम से जवाब मांगा गया है। देखा जाएगा कि किस आधार पर पट्टा दिया गया। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही पट्टे निरस्त किए जाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि 145 पट्टाधारकों को यह नोटिस दिए जाने हैं। जो पट्टाधारक ग्राम असदपुर के निवासी हैं, वहां नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार से प्रक्रिया में और तेजी आएगी। डीएम ने बताया कि अपनी कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई कराएंगे।
डीएम ने कहा कि जिले में गंगा क्षेत्र के अन्य गांवों के पट्टों की भी जांच कराई जाएगी। इसके लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी।
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दूसरे गांवों के लोगों को भी असदपुर ग्राम पंचायत की भू-प्रबंध समिति ने कराए पट्टे
अब तक की छानबीन में पता चला है कि ये पट्टे ग्राम पंचायत असदपुर के लोगों को ही नहीं, दूसरे गांवों के लोगों को भी दिए गए थे। 145 नामों में दूसरे गांवों के रहने वाले होने की जानकारी भी मिली है। जानकार बताते हैं कि यह सब उस समय की भू-प्रबंध समिति के सदस्यों की मिलीभगत से ही संभव हैं।
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तहसील क्षेत्र में 850 बीघा (71.5500 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को अवैध पट्टों से खुर्दबुर्द करने के पीछे खनन का खेल था। जमीन खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से गंगा किनारे न सिर्फ भ्रष्टाचार का बड़ा महल खड़ा किया गया बल्कि 18 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन दूसरों के नाम कर दी। साल 2013 में हुई इस मनमानी का राजफाश होने के बाद बर्खास्त एसडीएम, सहायक चकबंदी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पूर्व प्रधान समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान समेत 13 आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है। इनमें शामिल चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि सभी अवैध पट्टों को निरस्त किया जाएगा।
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एडीएम न्यायिक से कराई जांच, तब खुला पूरा खेल
चार जून को डीएम अंकित खंडेलवाल को अवैध पट्टों की शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने एडीएम न्यायिक सौरभ पांडेय के नेतृत्व में टीम को जांच के निर्देश दिए। इस जांच के दौरान सामने आया कि पट्टे मानकों के विपरीत जाकर किए गए। गंगा की जिस जमीन पर पट्टे नहीं किए जा सकते थे वहां भी पट्टे दे दिए। मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां कब्जा किसी का नहीं मिला। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो राजस्व और चकबंदी विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ग्राम पंचायत की भू-प्रबंध समिति के सदस्यों की मिलीभगत से मनमानी किए जाने की बात सामने आई।
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तत्कालीन एसडीएम समेत इनको भेजा गया है जेल
खेल का खुलासा होने के बाद लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर गुन्नौर कोतवाली में बृहस्पतिवार को 19 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। नामजदों में शामिल बर्खास्त हो चुके गुन्नौर के तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, ग्राम पंचायत असदपुर के पूर्व प्रधान विक्रांत, चकबंदी लेखपाल भीमराव, सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी महेंद्र, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर, अधिवक्ता जय भारद्वाज को शुक्रवार को जेल भेजा जा चुका है।
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नामजद 13 की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक इस मामले में अभी 13 नामजदों की गिरफ्तारी बाकी है। इनकी तलाश की जा रही है। इनमें गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार एवं वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान भी शामिल हैं। चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ मौजूदा और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी और ग्राम पंचायत के सदस्य भी हैं।
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डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि जिन लोगों को पट्टे आवंटित किए गए थे, उनसे नोटिस के माध्यम से जवाब मांगा गया है। देखा जाएगा कि किस आधार पर पट्टा दिया गया। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही पट्टे निरस्त किए जाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि 145 पट्टाधारकों को यह नोटिस दिए जाने हैं। जो पट्टाधारक ग्राम असदपुर के निवासी हैं, वहां नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार से प्रक्रिया में और तेजी आएगी। डीएम ने बताया कि अपनी कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई कराएंगे।
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डीएम ने कहा कि जिले में गंगा क्षेत्र के अन्य गांवों के पट्टों की भी जांच कराई जाएगी। इसके लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी।
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दूसरे गांवों के लोगों को भी असदपुर ग्राम पंचायत की भू-प्रबंध समिति ने कराए पट्टे
अब तक की छानबीन में पता चला है कि ये पट्टे ग्राम पंचायत असदपुर के लोगों को ही नहीं, दूसरे गांवों के लोगों को भी दिए गए थे। 145 नामों में दूसरे गांवों के रहने वाले होने की जानकारी भी मिली है। जानकार बताते हैं कि यह सब उस समय की भू-प्रबंध समिति के सदस्यों की मिलीभगत से ही संभव हैं।
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तहसील क्षेत्र में 850 बीघा (71.5500 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को अवैध पट्टों से खुर्दबुर्द करने के पीछे खनन का खेल था। जमीन खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से गंगा किनारे न सिर्फ भ्रष्टाचार का बड़ा महल खड़ा किया गया बल्कि 18 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन दूसरों के नाम कर दी। साल 2013 में हुई इस मनमानी का राजफाश होने के बाद बर्खास्त एसडीएम, सहायक चकबंदी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पूर्व प्रधान समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान समेत 13 आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है। इनमें शामिल चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि सभी अवैध पट्टों को निरस्त किया जाएगा।
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एडीएम न्यायिक से कराई जांच, तब खुला पूरा खेल
चार जून को डीएम अंकित खंडेलवाल को अवैध पट्टों की शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने एडीएम न्यायिक सौरभ पांडेय के नेतृत्व में टीम को जांच के निर्देश दिए। इस जांच के दौरान सामने आया कि पट्टे मानकों के विपरीत जाकर किए गए। गंगा की जिस जमीन पर पट्टे नहीं किए जा सकते थे वहां भी पट्टे दे दिए। मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां कब्जा किसी का नहीं मिला। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो राजस्व और चकबंदी विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ग्राम पंचायत की भू-प्रबंध समिति के सदस्यों की मिलीभगत से मनमानी किए जाने की बात सामने आई।
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तत्कालीन एसडीएम समेत इनको भेजा गया है जेल
खेल का खुलासा होने के बाद लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर गुन्नौर कोतवाली में बृहस्पतिवार को 19 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। नामजदों में शामिल बर्खास्त हो चुके गुन्नौर के तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, ग्राम पंचायत असदपुर के पूर्व प्रधान विक्रांत, चकबंदी लेखपाल भीमराव, सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी महेंद्र, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर, अधिवक्ता जय भारद्वाज को शुक्रवार को जेल भेजा जा चुका है।
नामजद 13 की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक इस मामले में अभी 13 नामजदों की गिरफ्तारी बाकी है। इनकी तलाश की जा रही है। इनमें गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार एवं वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान भी शामिल हैं। चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ मौजूदा और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी और ग्राम पंचायत के सदस्य भी हैं।
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