{"_id":"69bdb2574cd4157d3a018f92","slug":"narration-of-the-story-of-parikshit-and-shukdev-on-the-second-day-of-shrimad-bhagwat-katha-sambhal-news-c-204-1-chn1001-127808-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित और शुकदेव की कथा का वर्णन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित और शुकदेव की कथा का वर्णन
विज्ञापन
विज्ञापन
चंदौसी। कस्बा नरौली के मोहल्ला मंगलवाला के बाबा जाहरवीर मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुकदेव कथा का प्रसंग सुनाया गया। इस अवसर पर कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने बताया कि हमें किसी की भी निंदा नहीं करनी चाहिए और सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।
कथा के दूसरे दिन कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने बताया कि एक बार राजा परीक्षित वन में भ्रमण के दौरान प्यास लगने पर समीक ऋषि के आश्रम पहुंचे और उनसे जल मांगा, लेकिन ऋषि उस समय समाधि में लीन थे, इसलिए कोई उत्तर नहीं दे सके। इसे अपमान समझकर राजा ने क्रोधित होकर एक मृत सर्प उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। इस घटना की जानकारी ऋषि के पुत्र को मिली तो उन्होंने क्रोध में आकर राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। मृत्यु निश्चित जानकर राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से मोक्ष का मार्ग पूछा। तब शुकदेव जी ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त हुए। इस दौरान कार्यक्रम में राजू सैनी, खेमपाल सैनी, नरेंद्र सैनी, प्रेम शंकर सैनी, गजेंद्र सैनी, महेंद्र सैनी, अमन सैनी, आनंद सैनी, दिनेश कुमार, टिंकू आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
कथा के दूसरे दिन कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने बताया कि एक बार राजा परीक्षित वन में भ्रमण के दौरान प्यास लगने पर समीक ऋषि के आश्रम पहुंचे और उनसे जल मांगा, लेकिन ऋषि उस समय समाधि में लीन थे, इसलिए कोई उत्तर नहीं दे सके। इसे अपमान समझकर राजा ने क्रोधित होकर एक मृत सर्प उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। इस घटना की जानकारी ऋषि के पुत्र को मिली तो उन्होंने क्रोध में आकर राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। मृत्यु निश्चित जानकर राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से मोक्ष का मार्ग पूछा। तब शुकदेव जी ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त हुए। इस दौरान कार्यक्रम में राजू सैनी, खेमपाल सैनी, नरेंद्र सैनी, प्रेम शंकर सैनी, गजेंद्र सैनी, महेंद्र सैनी, अमन सैनी, आनंद सैनी, दिनेश कुमार, टिंकू आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन