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Sambhal News: वैकल्पिक मार्ग बना नहीं, शुरू करा दिया पुलिया काम, राहगीरों की आफत
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संभल। क्षेत्र के गांव बैटला और सिसौटा के बीच मध्य गंगा नहर के रजवाहे पर पुलिया निर्माण के लिए सड़क खोद दी गई है, लेकिन आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाया गया। इससे ग्रामीणों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे रास्ते पर फिसलकर लोग गिर रहे हैं, जबकि वाहन चालक भी कीचड़ और मिट्टी में फंसकर परेशान हो रहे हैं। इससे लोगों में ठेकेदार के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप कराने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए जाने की मांग की है, ताकि लोगों को आवागमन में दिक्कत न उठानी पड़े।
गौरतलब है कि मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जनपदों के अलावा बुलंदशहर और बदायूं के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2007-08 में 1060.76 करोड़ रुपये की लागत से मध्य गंगा नहर परियोजना शुरू की गई थी। हालांकि, किसानों को अब तक इस परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सुविधा के बजाय परेशानियों का ही सामना करना पड़ रहा है।
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इन दिनों संभल जिले में मध्य गंगा नहर की सफाई के साथ-साथ अधूरे निर्माण कार्य भी कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बैटला और सिसौटा के बीच रजवाहे पर पुलिया निर्माण शुरू कराया गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने बिना वैकल्पिक मार्ग बनाए ही सड़क खुदवा दी और मिट्टी का ढेर लगाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। मानसून के दौरान हो रही बारिश से रास्ता और अधिक खराब हो गया है। ऐसे में पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया और अन्य वाहन मिट्टी में फंसकर गिर रहे हैं।
सिसौटा के प्रधान (वर्तमान प्रशासक) हरीश लोधी ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है और कार्य मानकों के विपरीत हो रहा है। उनका कहना है कि पुलिया के फाउंडेशन में कराई गई पीसीसी में बजरी और रोड़ी के स्थान पर ईंटों का प्रयोग किया गया है।
स्थानीय निवासी नीरज, अरविंद, उदय और प्रकाश ने भी आरोप लगाया कि ठेकेदार मनमानी कर रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की निगरानी नहीं हो रही। उनका कहना है कि यदि इसी तरह घटिया निर्माण हुआ तो भविष्य में यह लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेगा।
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यह बोले लोग
छोटे भाई का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट दिलवाना है, यही रास्ता मुख्य है, ऐसे में इसी से संभल जा रहे थे लेकिन यहां से नहीं निकल पा रहे हैं। रास्ता बदलकर जाना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्ग पक्का बनवाना चाहिए था, ताकि आवागमन बाधित न होता। अधिकारियों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
ब्रजेंद्र सिंह पाल, राहगीर
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गाड़ी लेकर सिसौटा जाना था लेकिन निकालने की हिम्मत नहीं हो पा रही है। क्योंकि गाड़ी के मिट्टी में धंस जाने का डर लग रहा है। दूसरे रास्ते से होकर जाना पड़ेगा। काम कराने से पहले वैकल्पिक मार्ग बनवाना चाहिए था।
अक्षर कुमार, राहगीर
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संभल शहर आने जाने के लिए यही रास्ता बढि़या है, लेकिन बिना वैकल्पिक मार्ग बनाए ही रास्ते पर पुलिया का निर्माण शुरू करा दिया गया। इससे निकलने में दिक्कत हो रही है। अधिकारियों को निगरानी करके काम पर नजर रखनी चाहिए, ताकि मनमानी न हो और लोगों को समस्या न झेलनी पड़े।
हरीश लोधी, प्रधान (अब प्रशासक), सिसौटा
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वैकल्पिक मार्ग में खड़ंजा लगवाना अनिवार्य है। यदि नहीं लगवाया है तो खड़ंजा बनवाएंगे। ताकि आवागमन में कोई समस्या न हो। निर्माण कार्यों पर भी नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी को निर्देशित किया गया है। ताकि घटिया सामग्री न लगे सके और मानकों का पालन हो।
-मनोज राव, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-12 अलीगढ़
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स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप कराने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए जाने की मांग की है, ताकि लोगों को आवागमन में दिक्कत न उठानी पड़े।
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गौरतलब है कि मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जनपदों के अलावा बुलंदशहर और बदायूं के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2007-08 में 1060.76 करोड़ रुपये की लागत से मध्य गंगा नहर परियोजना शुरू की गई थी। हालांकि, किसानों को अब तक इस परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सुविधा के बजाय परेशानियों का ही सामना करना पड़ रहा है।
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इन दिनों संभल जिले में मध्य गंगा नहर की सफाई के साथ-साथ अधूरे निर्माण कार्य भी कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बैटला और सिसौटा के बीच रजवाहे पर पुलिया निर्माण शुरू कराया गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने बिना वैकल्पिक मार्ग बनाए ही सड़क खुदवा दी और मिट्टी का ढेर लगाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। मानसून के दौरान हो रही बारिश से रास्ता और अधिक खराब हो गया है। ऐसे में पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया और अन्य वाहन मिट्टी में फंसकर गिर रहे हैं।
सिसौटा के प्रधान (वर्तमान प्रशासक) हरीश लोधी ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है और कार्य मानकों के विपरीत हो रहा है। उनका कहना है कि पुलिया के फाउंडेशन में कराई गई पीसीसी में बजरी और रोड़ी के स्थान पर ईंटों का प्रयोग किया गया है।
स्थानीय निवासी नीरज, अरविंद, उदय और प्रकाश ने भी आरोप लगाया कि ठेकेदार मनमानी कर रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की निगरानी नहीं हो रही। उनका कहना है कि यदि इसी तरह घटिया निर्माण हुआ तो भविष्य में यह लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेगा।
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यह बोले लोग
छोटे भाई का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट दिलवाना है, यही रास्ता मुख्य है, ऐसे में इसी से संभल जा रहे थे लेकिन यहां से नहीं निकल पा रहे हैं। रास्ता बदलकर जाना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्ग पक्का बनवाना चाहिए था, ताकि आवागमन बाधित न होता। अधिकारियों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
ब्रजेंद्र सिंह पाल, राहगीर
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गाड़ी लेकर सिसौटा जाना था लेकिन निकालने की हिम्मत नहीं हो पा रही है। क्योंकि गाड़ी के मिट्टी में धंस जाने का डर लग रहा है। दूसरे रास्ते से होकर जाना पड़ेगा। काम कराने से पहले वैकल्पिक मार्ग बनवाना चाहिए था।
अक्षर कुमार, राहगीर
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संभल शहर आने जाने के लिए यही रास्ता बढि़या है, लेकिन बिना वैकल्पिक मार्ग बनाए ही रास्ते पर पुलिया का निर्माण शुरू करा दिया गया। इससे निकलने में दिक्कत हो रही है। अधिकारियों को निगरानी करके काम पर नजर रखनी चाहिए, ताकि मनमानी न हो और लोगों को समस्या न झेलनी पड़े।
हरीश लोधी, प्रधान (अब प्रशासक), सिसौटा
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वैकल्पिक मार्ग में खड़ंजा लगवाना अनिवार्य है। यदि नहीं लगवाया है तो खड़ंजा बनवाएंगे। ताकि आवागमन में कोई समस्या न हो। निर्माण कार्यों पर भी नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी को निर्देशित किया गया है। ताकि घटिया सामग्री न लगे सके और मानकों का पालन हो।
-मनोज राव, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-12 अलीगढ़