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Sambhal News: सईदुल रहमान था 101 करोड़ की जमीन कब्जाने का मास्टर माइंड
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संभल। 38 बीघा जमीन पर कब्जे का खेल वर्ष 2008 से शुरू हुआ था। इस खेल का संभल का रहने वाला मास्टरमाइंड सईदुल रहमान था। उसने 12 जुलाई 1967 की फर्जी पट्टा रसीद को आधार बनाया और उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क को भी अपने स्वार्थ में शामिल कर लिया था। पालिका ने दावे किए कि पट्टा कभी नहीं किया गया लेकिन उपसंचालक चकबंदी ने पालिका के खिलाफ निर्णय देते हुए 15 फरवरी 2008 को सईदुल रहमान के पक्ष में नामांतरण आदेश पारित कर दिया था।
पालिका की ओर से इस निर्णय पर असंतोष जताया गया और पालिका के तत्कालीन ईओ वीके झा 18 अप्रैल 2008 को हाईकोर्ट पहुंचे और याचिका दायर कर दी।
याचिका संख्या बी-341 / 2008 की पैरवी नहीं हुई और मामला हाईकोर्ट में लंबित पड़ा रहा। इस दौरान सईदुल रहमान का भी निधन हो गया, लेकिन पैरवी करने के लिए सईदुल रहमान की पत्नी शाहजहां बेगम और बेटे इबादुर्रहमान खान, एहसानुर्रहमान खां आगे आ गए। लेकिन अड़चन याचिका बनी रही।
वर्ष 2011 से संभल पालिका में ईओ राजकुमार गुप्ता की तैनाती हुई तो उनके द्वारा भी कोई पैरवी नहीं की गई। वर्ष 2012 में पालिका के चेयरमैन कौसर अहमद बन गए थे। इबादुर्रहमान खान कौसर अहमद के करीबी थे और प्रशासन के बड़े अधिकारियों में भी पकड़ थी।
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वहीं, चेयरमैन कौसर अहमद सपा के दिग्गज नेता आजम खां के करीबी माने जाते थे। ईओ राजकुमार गुप्ता ने वर्ष 2013 में याचिका हाईकोर्ट से वापस ले ली। जबकि याचिका 2008 से पैरवी का इंतजार कर रही थी।
याचिका वापस लेते ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने का रास्ता साफ हो गया था। यहां से जमीन का बंदरबांट किया गया या बिक्री की गई। वर्तमान में ज्यादातर जमीन तो खाली पड़ी है। कुछ जमीन पर व्यवसायिक भवन बना लिए गए हैं। इन भवन स्वामियों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी हो गए हैं। खाली जमीन पर ग्राम समाज का बोर्ड लगा दिया गया है।
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प्रशासन की जांच में आरोपी रहे ईओ लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई
तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता की पकड़ तबादला होने के बाद भी बनी रही। पूर्व सभासद मुकेश शुक्ला की शिकायत पर जांच हुई थी। यह जांच डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू के नेतृत्व में शुरू हुई थी। इसमें एआरटीओ, एक्सईएन विद्युत, और ईओ पालिका भी शामिल रहे थे। जांच में सामने आया कि पुराने वाहन खरीदकर पालिका के 84 लाख रुपये का गबन किया गया है। यह गबन वर्ष 2012 से 2017 तक पांच वाहन खरीद में हुआ था। जब मामला पकड़ में आया तो 2022 में तत्कालीन ईओ रामपाल सिंह ने तत्कालीन चेयरमैन कौसर अहमद के खिलाफ ही दर्ज कराई। जबकि प्रशासन की जांच में चेयरमैन के साथ ईओ और चार कर्मचारियों की भी भूमिका मिली थी। इसमें ठेकेदार भी आरोपी थे। इसके बाद भी मामला तत्कालीन चेयरमैन के खिलाफ ही दर्ज कराया गया था। जबकि नियमानुसार ईओ और कर्मचारी भी आरोपी बनाए जाने थे। पुलिस ने भी लापरवाही से जांच पड़ताल की और चेयरमैन के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल कर दी। मामला अभी तक लंबित चल रहा है।
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कुछ आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे, राहत पाने का प्रयास, पुलिस की तलाश तेज
जमीन कब्जा करने के मामले में जो आरोपी बने हैं इसमें कई आरोपी हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। वह हाईकोर्ट के माध्यम से राहत पाना चाहते हैं लेकिन प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई भी तेजी से चल रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी है। एसपी ने टीम को धरपकड़ के लिए लगा दिया है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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पालिका की ओर से इस निर्णय पर असंतोष जताया गया और पालिका के तत्कालीन ईओ वीके झा 18 अप्रैल 2008 को हाईकोर्ट पहुंचे और याचिका दायर कर दी।
याचिका संख्या बी-341 / 2008 की पैरवी नहीं हुई और मामला हाईकोर्ट में लंबित पड़ा रहा। इस दौरान सईदुल रहमान का भी निधन हो गया, लेकिन पैरवी करने के लिए सईदुल रहमान की पत्नी शाहजहां बेगम और बेटे इबादुर्रहमान खान, एहसानुर्रहमान खां आगे आ गए। लेकिन अड़चन याचिका बनी रही।
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वर्ष 2011 से संभल पालिका में ईओ राजकुमार गुप्ता की तैनाती हुई तो उनके द्वारा भी कोई पैरवी नहीं की गई। वर्ष 2012 में पालिका के चेयरमैन कौसर अहमद बन गए थे। इबादुर्रहमान खान कौसर अहमद के करीबी थे और प्रशासन के बड़े अधिकारियों में भी पकड़ थी।
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वहीं, चेयरमैन कौसर अहमद सपा के दिग्गज नेता आजम खां के करीबी माने जाते थे। ईओ राजकुमार गुप्ता ने वर्ष 2013 में याचिका हाईकोर्ट से वापस ले ली। जबकि याचिका 2008 से पैरवी का इंतजार कर रही थी।
याचिका वापस लेते ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने का रास्ता साफ हो गया था। यहां से जमीन का बंदरबांट किया गया या बिक्री की गई। वर्तमान में ज्यादातर जमीन तो खाली पड़ी है। कुछ जमीन पर व्यवसायिक भवन बना लिए गए हैं। इन भवन स्वामियों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी हो गए हैं। खाली जमीन पर ग्राम समाज का बोर्ड लगा दिया गया है।
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प्रशासन की जांच में आरोपी रहे ईओ लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई
तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता की पकड़ तबादला होने के बाद भी बनी रही। पूर्व सभासद मुकेश शुक्ला की शिकायत पर जांच हुई थी। यह जांच डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू के नेतृत्व में शुरू हुई थी। इसमें एआरटीओ, एक्सईएन विद्युत, और ईओ पालिका भी शामिल रहे थे। जांच में सामने आया कि पुराने वाहन खरीदकर पालिका के 84 लाख रुपये का गबन किया गया है। यह गबन वर्ष 2012 से 2017 तक पांच वाहन खरीद में हुआ था। जब मामला पकड़ में आया तो 2022 में तत्कालीन ईओ रामपाल सिंह ने तत्कालीन चेयरमैन कौसर अहमद के खिलाफ ही दर्ज कराई। जबकि प्रशासन की जांच में चेयरमैन के साथ ईओ और चार कर्मचारियों की भी भूमिका मिली थी। इसमें ठेकेदार भी आरोपी थे। इसके बाद भी मामला तत्कालीन चेयरमैन के खिलाफ ही दर्ज कराया गया था। जबकि नियमानुसार ईओ और कर्मचारी भी आरोपी बनाए जाने थे। पुलिस ने भी लापरवाही से जांच पड़ताल की और चेयरमैन के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल कर दी। मामला अभी तक लंबित चल रहा है।
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कुछ आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे, राहत पाने का प्रयास, पुलिस की तलाश तेज
जमीन कब्जा करने के मामले में जो आरोपी बने हैं इसमें कई आरोपी हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। वह हाईकोर्ट के माध्यम से राहत पाना चाहते हैं लेकिन प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई भी तेजी से चल रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी है। एसपी ने टीम को धरपकड़ के लिए लगा दिया है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।