संभल में चला बुलडोजर: मल्ली सराय में मुन्नी माता मंदिर के पास की जमीन खाली कराई, लोगों ने जताया विरोध
संभल के मोहल्ला मल्ली सराय में मुन्नी माता मंदिर के पास प्रशासन ने सरकारी जमीन को चिन्हित कर बुलडोजर से नींव खुदवाई। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने जमीन को अपनी बताकर विरोध किया।
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संभल के मोहल्ला मल्ली सराय में मुन्नी माता मंदिर के निकट प्रशासन ने सरकारी भूमि को चिह्नित कराया। इस पर बुलडोजर चलवाकर नींव भी खुदवाई। हालांकि, इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया तो जमीन को अपना बताया। प्रशासन ने इन लोगों से अभिलेख मांगे हैं। संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मल्ली सराय में सोमवार की दोपहर एक बजे राजस्व टीम पहुंची।
एसडीएम निधि पटेल और क्षेत्रीय लेखपाल मुकेश यादव साथ में थे। जमीन को खाली कराने के लिए नींव की बुलडोजर से खुदाई शुरू कराई गई तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसी दौरान कई लोग आए और जमीन को अपना बताया।
उन्होंने इस संबंध में कोर्ट में मामला विचाराधीन होने की बात कही। एसडीएम ने बताया कि आबादी में दर्ज सरकारी भूमि को चिन्हित कर उस पर कब्जा लेने की कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों ने अपना होने का दावा करते हुए आधे-अधूरे कागज दिखाएं, पूरे कागज दिखाने के लिए उन्हें मंगलवार तक का समय दिया गया है।
सरकारी जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण किया
चंदौसी मार्ग पर स्थित गांव सैफखां सराय में सरकारी जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण पाया गया है। इस मस्जिद और दरगाह की जिम्मेदारी संभल शहर की जामा मस्जिद के इमाम आफताब हुसैन वारसी के पास है। परिसर में बने मकान में जामा मस्जिद के इमाम और उनके भाई का परिवार रहता है। इमाम से जब इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
जबकि ग्रामीण का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है। जहां पहले से ही दरगाह और मस्जिद बनी है। वहीं, दूसरी ओर तहसीलदार का कहना है कि उनकी कोर्ट में मामला विचाराधीन है। अब बेदखली का आदेश किया गया है। साथ ही दोनों कब्जाधारकाें पर सात करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
संभल तहसीलदार के न्यायालय से सोमवार को सरकारी जमीन घोषित की गई है। इसमें बताया गया है कि गाटा संख्या 452 की करीब दो बीघा जमीन पर अवैध निर्माण किया हुआ है। जिस पर दरगाह, मस्जिद और मकान बना है। कुछ जमीन नजदीक में खाली पड़ी है। मालूम हो 2016 और 2017 में सरकारी जमीन होने का दावा करते हुए शिकायत की गई थी।
बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। लेकिन आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर एक शिकायत तहसीलदार न्यायालय में भी दर्ज कराई गई थी। उसमें ही सुनवाई के दौरान अब कब्जा मुक्त किए जाने का आदेश किया गया है।
