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Sant Kabir Nagar News: बंदरों के आतंक से सहमे ग्रामीण
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खेत-खलिहान से लेकर रसोई तक मचाया उत्पात
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, बच्चों और किसानों की बढ़ी चिंता
लोहरैया। क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जिगिना, बभनवली, बारीडीहा सहित आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण इन दिनों बंदरों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। हालत यह है कि लोग घर के बाहर कपड़े तक नहीं सुखा पा रहे हैं और न ही खाने-पीने की सामग्री खुले में रख पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर सब्जियों और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सब्जियों के फल खाकर नष्ट कर देते हैं तथा पौधों को भी क्षति पहुंचाते हैं। आम के बागों में कच्चे आम तोड़कर जमीन पर गिरा देते हैं, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांवों में लगे अमरूद के पेड़ों पर भी फल दिखाई नहीं दे रहे हैं। क्योंकि बंदर उन्हें समय से पहले ही नष्ट कर दे रहे हैं।
बंदरों के हमलावर व्यवहार से ग्रामीणों में भय का माहौल है। राह चलते लोगों पर कई बार बंदर हमला कर चुके हैं। विद्यालय जाने वाले छोटे बच्चे अकेले स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। क्योंकि रास्तों में बंदरों के झुंड उनका रास्ता रोक लेते हैं, उन्हें डराते हैं। अब स्थिति यह है कि लोग दिनभर घरों के दरवाजे और छतों के रास्ते बंद रखने को मजबूर हैं। मौका मिलते ही बंदर घरों में घुसकर रसोई तक पहुंच जाते हैं और खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाते हैं।
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ग्रामीण लालचंद ने बताया कि बंदरों के कारण घर के बाहर कोई भी सामान सुरक्षित नहीं रह गया है। कपड़े, अनाज और फल-सब्जियां सब उनके निशाने पर रहते हैं। रवि कश्यप ने कहा कि बंदरों ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धनंजय का कहना है कि छोटे बच्चों और महिलाओं में बंदरों को लेकर भय का माहौल है। कई बच्चे अकेले स्कूल जाने से डरते हैं।
ज्ञानचंद ने बताया कि ग्रामीण कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मोहनलाल ने कहा कि गांव वालों ने चंदा जुटाकर बंदर पकड़ने वालों को भी बुलाया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। प्रशासन को शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि बढ़ते बंदर आतंक से राहत दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाकर बंदरों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाया जाए। ताकि लोगों को भय और नुकसान से मुक्ति मिल सके।
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मामला संज्ञान में नहीं था, पता कर बंदरों को पकडवाने के लिए कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोगाें को राहत मिल सके।
-महेंद्र यादव, वन क्षेत्राधिकारी
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, बच्चों और किसानों की बढ़ी चिंता
लोहरैया। क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जिगिना, बभनवली, बारीडीहा सहित आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण इन दिनों बंदरों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। हालत यह है कि लोग घर के बाहर कपड़े तक नहीं सुखा पा रहे हैं और न ही खाने-पीने की सामग्री खुले में रख पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर सब्जियों और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सब्जियों के फल खाकर नष्ट कर देते हैं तथा पौधों को भी क्षति पहुंचाते हैं। आम के बागों में कच्चे आम तोड़कर जमीन पर गिरा देते हैं, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांवों में लगे अमरूद के पेड़ों पर भी फल दिखाई नहीं दे रहे हैं। क्योंकि बंदर उन्हें समय से पहले ही नष्ट कर दे रहे हैं।
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बंदरों के हमलावर व्यवहार से ग्रामीणों में भय का माहौल है। राह चलते लोगों पर कई बार बंदर हमला कर चुके हैं। विद्यालय जाने वाले छोटे बच्चे अकेले स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। क्योंकि रास्तों में बंदरों के झुंड उनका रास्ता रोक लेते हैं, उन्हें डराते हैं। अब स्थिति यह है कि लोग दिनभर घरों के दरवाजे और छतों के रास्ते बंद रखने को मजबूर हैं। मौका मिलते ही बंदर घरों में घुसकर रसोई तक पहुंच जाते हैं और खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचाते हैं।
ग्रामीण लालचंद ने बताया कि बंदरों के कारण घर के बाहर कोई भी सामान सुरक्षित नहीं रह गया है। कपड़े, अनाज और फल-सब्जियां सब उनके निशाने पर रहते हैं। रवि कश्यप ने कहा कि बंदरों ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धनंजय का कहना है कि छोटे बच्चों और महिलाओं में बंदरों को लेकर भय का माहौल है। कई बच्चे अकेले स्कूल जाने से डरते हैं।
ज्ञानचंद ने बताया कि ग्रामीण कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मोहनलाल ने कहा कि गांव वालों ने चंदा जुटाकर बंदर पकड़ने वालों को भी बुलाया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। प्रशासन को शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि बढ़ते बंदर आतंक से राहत दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाकर बंदरों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाया जाए। ताकि लोगों को भय और नुकसान से मुक्ति मिल सके।
मामला संज्ञान में नहीं था, पता कर बंदरों को पकडवाने के लिए कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोगाें को राहत मिल सके।
-महेंद्र यादव, वन क्षेत्राधिकारी