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Shahjahanpur News: गर्मी में ठप पड़े उपकेंद्र, फॉल्ट और अनियमित कटौती के कारण पटरी से उतरी बिजली आपूर्ति
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सचिन बाथम, व्यापारी नेता
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शाहजहांपुर। उमस भरी गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने से शहर से लेकर देहात तक उपकेंद्रों पर बोझ बढ़ गया है। हल्की हवा चलने या बारिश होने पर घंटों बिजली गायब हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में ओवरलोडिंग के चलते फॉल्ट, अनियमित रोस्टरिंग और स्टाफ की कमी से लोगाें को बिजली मिलना दूभर हो रहा है।
शाहजहांपुर में 38 उपकेंद्रों से करीब साढ़े चार लाख उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति दी जाती है। सर्दी में ठीक चलने वाला नेटवर्क गर्मी के आते ही पटरी से उतरने लगा है। शहरी क्षेत्र में हल्की हवा चलने से घंटों के बिजली गायब हो जाती है। नगर में फॉल्ट होने के मामले में अब्दुल्लागंज उपकेंद्र सबसे ऊपर है।
उपकेंद्र का केरूगंज फीडर 24 घंटों में पांच से छह घंटे प्रतिदिन बंद रहता है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में भीषण गर्मी के साथ ही खेतों की सिंचाई के लिए नलकूप चलाने पर लोड छलांग लगा देता है। इसके चलते तार टूटने, ट्रांसफॉर्मर और फ्यूज जलने से बिजली गुल हो जाती है। फीडर की लंबी लाइनों पर गश्त करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से उपभोक्ताओं को कई घंटे बिजली का इंतजार करना पड़ता है।
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जेई संवर्ग के अनुसार, निगोही, कलान, मिर्जापुर, परौर, खुटार, बंडा, पुवायां समेत कई इलाकों के फीडर ओवरलोड हैं। बिजली आने पर भी ओवरलोडिंग होने पर अनियमित कटौती कर दी जाती है, जिससे फॉल्ट से बचा जा सके।
एसई अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में शेड्यूल के अनुसार बिजली दी जाती है। कहीं पर फॉल्ट आने पर उसे जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाता है।
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यह है शेड्यूल
-नगर निगम क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने का नियम है।
-ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं।
-तहसील स्तर पर साढ़े 21 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं।
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उपकरण मिलना भी मुश्किल
ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिलने की वजह निगम की लापरवाही भी है। ग्रामीण इलाकों में आने वाले फॉल्ट को दुरुस्त करने के लिए जेई संवर्ग को उपकरण नहीं मिल पाते हैं। जिसके चलते कई दिनों तक लाइन दुरुस्त नहीं हो पाती है। जिसके चलते लोगों को जूझना पड़ता है।
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छंटनी से घट गए संविदाकर्मी
जिले में उपकेंद्रों के समकक्ष अवर अभियंताओं की तैनाती है, लेकिन लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की काफी कमी है। पूर्व में लगभग 900 से ज्यादा संविदा कर्मी कार्यरत थे, लेकिन छंटनी और 55 साल की उम्र की बाध्यता के चलते कर्मियों को निगम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वर्तमान में 618 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। विद्युत संविदा मजदूर संगठन के अध्यक्ष अशोक पाल ने बताया कि एक फीडर पर तीन कुशल और तीन अकुशल कर्मी का गैंग होना चाहिए, जो वर्तमान में नहीं रह गया है। अब किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
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रोज फुंक रहे हैं 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर
विद्युत निगम ने गर्मी प्रारंभ होने से पहले ही ट्रांसफॉर्मरों को दुरुस्त कर रख लिया था। गर्मी के आने के साथ ही 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर रोज फुंक रहे हैं। इसमें ग्रामीण इलाकों के ट्रांसफॉर्मर सबसे ज्यादा हैं। खराब ट्रांसफॉर्मरों के आने पर उनकी जगह पर उतनी ही क्षमता के दूसरे दिए जाते हैं।
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लोगों की बातचीत
विद्युत निगम ने अधिभार बढ़ा दिया। ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग की वजह से लगातार कटौती हो रही है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। बिजली की दरें लगातार बढ़ रहीं है। इसके बाद भी निर्बाध आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
- सचिन बाथम, व्यापारी नेता
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गर्मी के सीजन से पहले विद्युत आपूर्ति को लेकर शासन की ओर से बजट जारी किया जाता है। इसके बाद भी गर्मी में विद्युत व्यवस्था लड़खड़ा जाती है। निगम की ओर से इंतजाम नहीं किए जाते हैं। जिसका खमियाजा लोगों को भुगताना पड़ता है।
- कुलदीप सिंह दुआ, व्यापारी नेता
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बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं है। इससे आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बिजली जाने के बाद अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। आम लोगों को बिजली की कटौती की वजह से काफी परेशानी होती है।
- अवध किशोर शुक्ला
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बिल अदा करने के लिए जब इतनी सख्ती बरती जाती है, तो बिजली की आपूर्ति समय से करना चाहिए। शाम को खाना बनाने का समय होता है तो अक्सर बिजली चली जाती है। इससे महिलाओं को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
- ममता, महमंद हद्दफ।
शाहजहांपुर में 38 उपकेंद्रों से करीब साढ़े चार लाख उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति दी जाती है। सर्दी में ठीक चलने वाला नेटवर्क गर्मी के आते ही पटरी से उतरने लगा है। शहरी क्षेत्र में हल्की हवा चलने से घंटों के बिजली गायब हो जाती है। नगर में फॉल्ट होने के मामले में अब्दुल्लागंज उपकेंद्र सबसे ऊपर है।
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उपकेंद्र का केरूगंज फीडर 24 घंटों में पांच से छह घंटे प्रतिदिन बंद रहता है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में भीषण गर्मी के साथ ही खेतों की सिंचाई के लिए नलकूप चलाने पर लोड छलांग लगा देता है। इसके चलते तार टूटने, ट्रांसफॉर्मर और फ्यूज जलने से बिजली गुल हो जाती है। फीडर की लंबी लाइनों पर गश्त करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से उपभोक्ताओं को कई घंटे बिजली का इंतजार करना पड़ता है।
जेई संवर्ग के अनुसार, निगोही, कलान, मिर्जापुर, परौर, खुटार, बंडा, पुवायां समेत कई इलाकों के फीडर ओवरलोड हैं। बिजली आने पर भी ओवरलोडिंग होने पर अनियमित कटौती कर दी जाती है, जिससे फॉल्ट से बचा जा सके।
एसई अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में शेड्यूल के अनुसार बिजली दी जाती है। कहीं पर फॉल्ट आने पर उसे जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाता है।
यह है शेड्यूल
-नगर निगम क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने का नियम है।
-ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं।
-तहसील स्तर पर साढ़े 21 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं।
उपकरण मिलना भी मुश्किल
ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिलने की वजह निगम की लापरवाही भी है। ग्रामीण इलाकों में आने वाले फॉल्ट को दुरुस्त करने के लिए जेई संवर्ग को उपकरण नहीं मिल पाते हैं। जिसके चलते कई दिनों तक लाइन दुरुस्त नहीं हो पाती है। जिसके चलते लोगों को जूझना पड़ता है।
छंटनी से घट गए संविदाकर्मी
जिले में उपकेंद्रों के समकक्ष अवर अभियंताओं की तैनाती है, लेकिन लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की काफी कमी है। पूर्व में लगभग 900 से ज्यादा संविदा कर्मी कार्यरत थे, लेकिन छंटनी और 55 साल की उम्र की बाध्यता के चलते कर्मियों को निगम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वर्तमान में 618 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। विद्युत संविदा मजदूर संगठन के अध्यक्ष अशोक पाल ने बताया कि एक फीडर पर तीन कुशल और तीन अकुशल कर्मी का गैंग होना चाहिए, जो वर्तमान में नहीं रह गया है। अब किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
रोज फुंक रहे हैं 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर
विद्युत निगम ने गर्मी प्रारंभ होने से पहले ही ट्रांसफॉर्मरों को दुरुस्त कर रख लिया था। गर्मी के आने के साथ ही 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर रोज फुंक रहे हैं। इसमें ग्रामीण इलाकों के ट्रांसफॉर्मर सबसे ज्यादा हैं। खराब ट्रांसफॉर्मरों के आने पर उनकी जगह पर उतनी ही क्षमता के दूसरे दिए जाते हैं।
लोगों की बातचीत
विद्युत निगम ने अधिभार बढ़ा दिया। ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग की वजह से लगातार कटौती हो रही है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। बिजली की दरें लगातार बढ़ रहीं है। इसके बाद भी निर्बाध आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
- सचिन बाथम, व्यापारी नेता
गर्मी के सीजन से पहले विद्युत आपूर्ति को लेकर शासन की ओर से बजट जारी किया जाता है। इसके बाद भी गर्मी में विद्युत व्यवस्था लड़खड़ा जाती है। निगम की ओर से इंतजाम नहीं किए जाते हैं। जिसका खमियाजा लोगों को भुगताना पड़ता है।
- कुलदीप सिंह दुआ, व्यापारी नेता
बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं है। इससे आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बिजली जाने के बाद अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। आम लोगों को बिजली की कटौती की वजह से काफी परेशानी होती है।
- अवध किशोर शुक्ला
बिल अदा करने के लिए जब इतनी सख्ती बरती जाती है, तो बिजली की आपूर्ति समय से करना चाहिए। शाम को खाना बनाने का समय होता है तो अक्सर बिजली चली जाती है। इससे महिलाओं को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
- ममता, महमंद हद्दफ।

सचिन बाथम, व्यापारी नेता

सचिन बाथम, व्यापारी नेता

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