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Shahjahanpur News: लापरवाही पर ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान पर कार्रवाई की संस्तुति
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खुटार। गांवसभा कैमहरिया के मौजा मैदाखेड़ा की गोशाला के पास पशु कंकाल मिलने के मामले में बीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान की लापरवाही मानी है। कार्रवाई के लिए डीडीओ से संस्तुति की है।
गांव मैदाखेड़ा की गोशाला के पास झाड़ियाें में 16 फरवरी को दो पशुओं के शव और कई कंकाल पड़े मिले थे। हिंदूवादी संगठनों की शिकायत पर बीडीओ ने मौके पर पहुंचकर जांच कर बताया था कि जिस जगह कंकाल मिले, वहां गांव के लोग पालतू पशुओं की मौत होने पर शव डाल जाते हैं। तब गोशाला के पशुओं की मौत से इन्कार किया गया था। अमर उजाला ने 17 फरवरी के अंक में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर का संज्ञान लेते हुए डीडीओ ने बीडीओ को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा।
बीडीओ के अनुसार कंकाल और शव मिलने पर गांव के लोगों ने आरोप लगाए थे कि ग्राम विकास अधिकारी राजेश कुमार की लापरवाही के कारण गोशाला के पशुओं की मौत हो रही है। सचिव गोशाला का नियमित निरीक्षण नहीं करते हैं और पर्याप्त भूसा और हरे चारे का इंतजाम भी नहीं है।
बीडीओ ने 16 फरवरी को जांच के लिए ग्राम विकास अधिकारी को बुलाया तो वह दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे। रिकाॅर्ड देखने पर पता चला कि सचिव ने 11 अगस्त, 13 अगस्त, तीन सितंबर, 18 सितंबर, 18 दिसंबर, पांच जनवरी, 21 जनवरी और सात फरवरी को गोशाला का निरीक्षण किया है। इससे साफ है कि सचिव नियमित गोशाला नहीं आते हैं।
गोशाला में पर्याप्त भूसा नहीं मिला और हरा चारा नहीं पाया गया। हरे चारे के स्थान पर साइलेज खरीदकर खिलाया जाना था, लेकिन खरीद नहीं की गई। कई बार कहने के बाद भी गोशाला में सुधार नहीं किया गया। बीडीओ ने जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान की लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
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मैदाखेड़ा प्रकरण की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें ग्राम प्रधान और सचिव की लापरवाही सामने आई है। कार्रवाई के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।
-आशीष सिंह, खंड विकास अधिकारी, खुटार
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गांव मैदाखेड़ा की गोशाला के पास झाड़ियाें में 16 फरवरी को दो पशुओं के शव और कई कंकाल पड़े मिले थे। हिंदूवादी संगठनों की शिकायत पर बीडीओ ने मौके पर पहुंचकर जांच कर बताया था कि जिस जगह कंकाल मिले, वहां गांव के लोग पालतू पशुओं की मौत होने पर शव डाल जाते हैं। तब गोशाला के पशुओं की मौत से इन्कार किया गया था। अमर उजाला ने 17 फरवरी के अंक में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर का संज्ञान लेते हुए डीडीओ ने बीडीओ को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा।
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बीडीओ के अनुसार कंकाल और शव मिलने पर गांव के लोगों ने आरोप लगाए थे कि ग्राम विकास अधिकारी राजेश कुमार की लापरवाही के कारण गोशाला के पशुओं की मौत हो रही है। सचिव गोशाला का नियमित निरीक्षण नहीं करते हैं और पर्याप्त भूसा और हरे चारे का इंतजाम भी नहीं है।
बीडीओ ने 16 फरवरी को जांच के लिए ग्राम विकास अधिकारी को बुलाया तो वह दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे। रिकाॅर्ड देखने पर पता चला कि सचिव ने 11 अगस्त, 13 अगस्त, तीन सितंबर, 18 सितंबर, 18 दिसंबर, पांच जनवरी, 21 जनवरी और सात फरवरी को गोशाला का निरीक्षण किया है। इससे साफ है कि सचिव नियमित गोशाला नहीं आते हैं।
गोशाला में पर्याप्त भूसा नहीं मिला और हरा चारा नहीं पाया गया। हरे चारे के स्थान पर साइलेज खरीदकर खिलाया जाना था, लेकिन खरीद नहीं की गई। कई बार कहने के बाद भी गोशाला में सुधार नहीं किया गया। बीडीओ ने जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान की लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
मैदाखेड़ा प्रकरण की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें ग्राम प्रधान और सचिव की लापरवाही सामने आई है। कार्रवाई के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।
-आशीष सिंह, खंड विकास अधिकारी, खुटार
