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Shravasti News: सिक्किम के अनुयायियों ने किया पूजन-अर्चन
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:20 AM IST
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आनंद कुटी में प्रार्थना करते सिक्किम के अनुयायी।- संवाद
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कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को सिक्किम से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से आनंद कुटी पर पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि श्रावस्ती भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसे बौद्ध धर्म के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक माना जाता है। भगवान बुद्ध ने यहां अपने कई उपदेश दिए थे, उन्होंने कई चमत्कार भी किए। प्राचीन श्रावस्ती का उल्लेख सभी प्रमुख भारतीय धर्मों के साहित्य में मौजूद है।
बताया कि श्रावस्ती का उल्लेख उन ऐतिहासिक अभिलेखों में भी मिलता है, जिन्हें चीनी तीर्थ यात्रियों द्वारा भारत में छोड़ा गया था। बौद्ध परंपरा के अनुसार, इस शहर को श्रावस्ती इसलिए कहा जाता था, क्योंकि यहां श्रावस्ती नामक ऋषि रहा करते थे। ऐसा कहा जाता था कि श्रावस्ती शहर अचिरवती नदी के तट पर स्थित था, जो वर्तमान में राप्ती नदी के नाम से प्रसिद्ध है।
इस नदी के कारण यहां का कृषि क्षेत्र काफी समृद्ध था, जिसकी वजह से शहर को काफी सुंदर रूप मिला। बौद्ध धर्म के चार निकायों में से लगभग 871 सूत्तों का प्रचार श्रावस्ती में हुआ था। जेतवन के मठ में लगभग 844 सूत्तों का प्रचार किया गया, पुब्बारामा के मठ में 23 सूत्तों का प्रचार किया गया और शेष चार सूत्तों का उपदेश श्रावस्ती के उपनगरों में दिया गया।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि श्रावस्ती भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसे बौद्ध धर्म के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक माना जाता है। भगवान बुद्ध ने यहां अपने कई उपदेश दिए थे, उन्होंने कई चमत्कार भी किए। प्राचीन श्रावस्ती का उल्लेख सभी प्रमुख भारतीय धर्मों के साहित्य में मौजूद है।
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बताया कि श्रावस्ती का उल्लेख उन ऐतिहासिक अभिलेखों में भी मिलता है, जिन्हें चीनी तीर्थ यात्रियों द्वारा भारत में छोड़ा गया था। बौद्ध परंपरा के अनुसार, इस शहर को श्रावस्ती इसलिए कहा जाता था, क्योंकि यहां श्रावस्ती नामक ऋषि रहा करते थे। ऐसा कहा जाता था कि श्रावस्ती शहर अचिरवती नदी के तट पर स्थित था, जो वर्तमान में राप्ती नदी के नाम से प्रसिद्ध है।
इस नदी के कारण यहां का कृषि क्षेत्र काफी समृद्ध था, जिसकी वजह से शहर को काफी सुंदर रूप मिला। बौद्ध धर्म के चार निकायों में से लगभग 871 सूत्तों का प्रचार श्रावस्ती में हुआ था। जेतवन के मठ में लगभग 844 सूत्तों का प्रचार किया गया, पुब्बारामा के मठ में 23 सूत्तों का प्रचार किया गया और शेष चार सूत्तों का उपदेश श्रावस्ती के उपनगरों में दिया गया।
