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Shravasti News: होटलों में अब लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा खाना
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:05 AM IST
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होटल में इंडक्शन का प्रयोग करता बावर्ची।-
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इकौना। काॅमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत का असर छोटे होटल व ढाबों के बाद अब बड़े होटलों तक पहुंच गया है। हाल यह है कि श्रावस्ती स्थित एक प्रमुख होटल में बीते 15 दिनों से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा है। होटल डॉयरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सेना ने जिला प्रशासन से पत्राचार कर कॉमर्शियल सिलिंडर की मांग की है।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती साल भर पर्यटकों से गुलजार रहती है। बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती में दर्शन-पूजन के लिए श्रीलंका, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बरमा आदि देशों के सैकड़ों पर्यटक प्रतिदिन आते हैं। पर्यटक श्रावस्ती स्थित होटलों में ठहरते हैं और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
ईरान-इस्राइल युद्ध के बाद शुरू हुई कॉमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत अब होटल कारोबार के लिए मुसीबत बन गई है। टाईल्स व संगमरमर पत्थरों से चमचमाते व पर्यटकों को लुभाने वाले इन होटलों में अब लकड़ी के चूल्हे जल रहे हैं। होटल के जनरल मैनेजर वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अप्रैल माह तक श्रावस्ती में बौद्ध तीर्थ करने वाले स्थानीय और विदेशी श्रद्धालुओं की आवक बनी रहती है। इस दौरान प्रतिदिन लगभग 200 पर्यटक व 50 होटल स्टाफ सहित 250 लोगों का खाना व नाश्ता बनता है। जिसके लिए प्रतिदिन दो कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। सिलिंडर के अभाव में 15 दिनों से होटल में पर्यटकों व स्टॉफ के लिए मजबूरन लकड़ी का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। जिसमें अब तक 15 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल हो चुकी है।
प्रदूषण के साथ लग रहा ज्यादा समय
होटल के डॉरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सोना ने बताया कि लकड़ी का चूल्हा जलने से एक ओर जहां प्रदूषण हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर खाना पकाने व नाश्ता तैयार करने में समय भी अधिक लग रहा है। इंडेक्शन की मदद भी ली जा रही है लेकिन बड़े स्तर पर इंडेक्शन पर खाना पकाना संभवन नहीं हो पा रहा है। सिलिंडर की आपूर्ति के लिए जिला प्रशासन को पत्राचार किया गया है लेकिन अभी राहत नहीं मिली है।
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ईरान-इस्राइल युद्ध के बाद शुरू हुई कॉमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत अब होटल कारोबार के लिए मुसीबत बन गई है। टाईल्स व संगमरमर पत्थरों से चमचमाते व पर्यटकों को लुभाने वाले इन होटलों में अब लकड़ी के चूल्हे जल रहे हैं। होटल के जनरल मैनेजर वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अप्रैल माह तक श्रावस्ती में बौद्ध तीर्थ करने वाले स्थानीय और विदेशी श्रद्धालुओं की आवक बनी रहती है। इस दौरान प्रतिदिन लगभग 200 पर्यटक व 50 होटल स्टाफ सहित 250 लोगों का खाना व नाश्ता बनता है। जिसके लिए प्रतिदिन दो कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। सिलिंडर के अभाव में 15 दिनों से होटल में पर्यटकों व स्टॉफ के लिए मजबूरन लकड़ी का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। जिसमें अब तक 15 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल हो चुकी है।
प्रदूषण के साथ लग रहा ज्यादा समय
होटल के डॉरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सोना ने बताया कि लकड़ी का चूल्हा जलने से एक ओर जहां प्रदूषण हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर खाना पकाने व नाश्ता तैयार करने में समय भी अधिक लग रहा है। इंडेक्शन की मदद भी ली जा रही है लेकिन बड़े स्तर पर इंडेक्शन पर खाना पकाना संभवन नहीं हो पा रहा है। सिलिंडर की आपूर्ति के लिए जिला प्रशासन को पत्राचार किया गया है लेकिन अभी राहत नहीं मिली है।

होटल में इंडक्शन का प्रयोग करता बावर्ची।-

होटल में इंडक्शन का प्रयोग करता बावर्ची।-