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Siddharthnagar News: हर दूसरा स्कूल वाहन सिस्टम को दिखा रहा ठेंगा

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 19 Jan 2026 11:25 PM IST
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Siddharthnagar News : Every second school bus system is being shown
शहर के अशोक मार्ग पर औटो के बाहर पैर करके बैठा हुआ छात्र। संवाद
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सिद्धार्थनगर। शहर से लेकर देहात तक बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन बच्चों को लेकर आते-जाते हैं। इससे हादसे का खतरा हर समय बना रहता है।
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इसमें ई-रिक्शा और टेंपोे भी शामिल हैं, जो क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल छोड़ते हैं और फिर उन्हें घर पहुंचाते हैं। तीन दिन पहले ढेबरुआ थाना क्षेत्र के मदरहिया के पास एक स्कूल बस पलट गई थी। इसमें सवार 21 बच्चे जख्मी हो गए थे। इसके बावजूद जिम्मेदार बिना पंजीकृत चले रहे स्कूल वाहनों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं।
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शहर से लेकर देहात तक सैकड़ों निजी विद्यालय संचालित हैं। इन्हीं स्कूलों से जुड़े स्कूल वाहन नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बने कानून केवल कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। बसों के अलावा ई-रिक्शा, टेंपो, मैजिक, वैन और यहां तक कि बिना पंजीकरण वाले निजी वाहन भी बच्चों को लेकर स्कूल आते-जाते हैं। शहर में सरकारी के अलावा 15 से अधिक निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
दोपहर में छुट्टी होने के बाद तीन स्पाट अशोक मार्ग, बांसी स्टैंड रोड और साड़ी तिराहा से होकर गुजरने वाले स्कूल वाहनों की पड़ताल की गई। इसमें बड़ी बसों में तो कुछ गनीमत दिखी। इनके खिड़की पर शीशा के अलावा लोहे के रॉड लगे मिले, जिससे बच्चे सिर और हाथ बाहर न कर सकें, लेकिन बस में सीट से अधिक बच्चे जरूर नजर आएं।
सबसे बुरा हाल ई-रिक्शा और टेंपो और मैजिक का रहा। ई-रिक्शा में बमुश्किल छह बच्चों को बैठाया जा सकता है, लेकिन 8 से 12 बच्चे बैठे हुए नजर आए। इसके साथ ही बच्चों के हाथ में बैग लटका हुआ दिखा। वहीं अशोक मार्ग से गुजर रही टेंपो में पैर बाहर किए हुए किसी तरह से बच्चे बैठे मिले।
जब चालक से बात करने की कोशिश की गई तो वह यह करते हुए टाल गया कि रुपये अधिक मिले इसलिए दो बच्चों और बैठा लिया। इसी प्रकार ई-रिक्शा से बांसी तिराहा पर मुड़ रहे रमेश ने कहा कि वह तीन विद्यालयों के बच्चों को ले जाने का काम करता है। यह तो मुख्यालय का हाल है।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भयावह है, क्योंकि, वहां पर अधिक बच्चे होने और अप्रशिक्षित हाथों में स्टीयरिंग होने के कारण हादसे होते हैं। तहसील मुख्यालय से लेकर छोटे-छोटे चौराहों और गांवों तक स्कूल खुले हैं, लेकिन इनके लिए चलने वाले वाहनों का पंजीकरण बेहद कम है। आंकड़ों के अनुसार जनपद में केवल 704 स्कूल वाहन ही पंजीकृत हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक मानी जा रही है। अधिकांश स्कूल प्रबंधन बच्चों को लाने-ले जाने के लिए ई-रिक्शा और टेंपो का सहारा ले रहे हैं, जो स्कूल वाहन की श्रेणी में आते ही नहीं। इन वाहनों में न तो सुरक्षा मानक पूरे हैं और न ही तय क्षमता का पालन।
हादसे में हिला दिया: ढेबरुआ थाना क्षेत्र के मदरहिया गांव के पास शनिवार को घने कोहरे में साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में एक स्कूल बस और वैन के पलटने की घटना ने सिस्टम की पोल खोल दी। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन सवाल यह है कि अगर नियमों का पालन होता तो ऐसी स्थिति ही क्यों बनती? इससे पहले भी जिले में छोटे स्कूली वाहनों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई स्थायी नहीं हो सकी।
पलट गया था वाहन, तीन बच्चे हो गए थे घायल: पिछले साल नवंबर में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के मन्नीजोत-भनवापुर मार्ग पर बच्चों को लेकर जा रही टेंपो अनियंत्रित होकर पलट गया था। इस हादसे में तीन बच्चे घायल हो गए थे। टेंपो पूरी तरह से खराब हालात में था। इसके साथ ही उसका पंजीकरण भी नहीं था।
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