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Siddharthnagar News: जांच-पड़ताल तक सिमटा उपचार...मरीजों को अब भी इलाज का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 19 Jan 2026 11:22 PM IST
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खुनियांव क्षेत्र के ग्राम पंचायत लक्ष्मनपुर उर्फ बल्ली जोत के बड़हरा खास गांव में बीमार बच्ची।
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शाहपुर। खुनियांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत लक्ष्मनपुर उर्फ बल्लीजोत के बड़हरा खास गांव में लकवा जैसे लक्षण वाली रहस्यमय बीमारी से पीड़ित मरीजों को अब भी दवा-इलाज की दरकार है। घर बैठे मरीज स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की राह देख रहे हैं, लेकिन विभागीय जिम्मेदार जांच-पड़ताल का कोरम कर अपना पल्ला झाड़ चुके हैं।
रहस्यमय बीमारी से कई मरीज मिलने के बाद अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में तो आया, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब तक विभाग को भी यह पता नहीं चल पाया कि आखिरी उन्हें क्या बीमारी हो रही है। मरीज अब भी दवा और इलाज के इंतजार में घर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब दवा इलाज ही नहीं करना था, तो ठंड में जांच-पड़ताल के नाम पर सिद्धार्थनगर तक दौड़ाने का क्या मतलब था।
एक जनवरी को अमर उजाला में इससे जुड़ी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसे संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य महकमा ने टीम गठित कर गांव में कैंप लगाया।
टीम ने मरीजों की जांच कर जरूरी सलाह दी और उन्हें सीएचसी खुनियांव आने के निर्देश दिए। कुछ ग्रामीण जांच के लिए खुनियांव से सिद्धार्थनगर भी गए, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस परिणाम नहीं नजर आ रहा है।
डॉक्टरों के निर्देश पर खुनियांव जाने के बाद एम्बुलेंस से सिद्धार्थनगर भेजा गया। जांच-पड़ताल के बाद कोई दवा नहीं दी गई। फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिला। हालात खराब होते देख उन्होंने प्राइवेट में इलाज कराना मजबूरी समझी। -राम कृपाल
घर पर तड़प रहा मरीज, अस्पताल तक जाने में असमर्थ: बड़हरा खास गांव में कैंप में जांच के दौरान एक टीबी का मरीज भी मिला था। जांच टीम ने बलगम का सैंपल लेकर मरीज को सीएचसी बुलाया।
पानी की गुणवत्ता की जांच: बड़हरा खास गांव में चुनिंदा घरों का ही पानी का सैंपल लिया गया। ग्रामीण बुद्धिराम, कोमल, देवताराम आदि ने कहा कि उनके घर के नल का पानी जांच में शामिल नहीं किया गया। करीब 15 दिन पहले कुछ लोग आए थे और कुछ घरों से सैंपल लेकर गए थे।
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रहस्यमय बीमारी से कई मरीज मिलने के बाद अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में तो आया, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब तक विभाग को भी यह पता नहीं चल पाया कि आखिरी उन्हें क्या बीमारी हो रही है। मरीज अब भी दवा और इलाज के इंतजार में घर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब दवा इलाज ही नहीं करना था, तो ठंड में जांच-पड़ताल के नाम पर सिद्धार्थनगर तक दौड़ाने का क्या मतलब था।
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एक जनवरी को अमर उजाला में इससे जुड़ी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसे संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य महकमा ने टीम गठित कर गांव में कैंप लगाया।
टीम ने मरीजों की जांच कर जरूरी सलाह दी और उन्हें सीएचसी खुनियांव आने के निर्देश दिए। कुछ ग्रामीण जांच के लिए खुनियांव से सिद्धार्थनगर भी गए, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस परिणाम नहीं नजर आ रहा है।
डॉक्टरों के निर्देश पर खुनियांव जाने के बाद एम्बुलेंस से सिद्धार्थनगर भेजा गया। जांच-पड़ताल के बाद कोई दवा नहीं दी गई। फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिला। हालात खराब होते देख उन्होंने प्राइवेट में इलाज कराना मजबूरी समझी। -राम कृपाल
घर पर तड़प रहा मरीज, अस्पताल तक जाने में असमर्थ: बड़हरा खास गांव में कैंप में जांच के दौरान एक टीबी का मरीज भी मिला था। जांच टीम ने बलगम का सैंपल लेकर मरीज को सीएचसी बुलाया।
पानी की गुणवत्ता की जांच: बड़हरा खास गांव में चुनिंदा घरों का ही पानी का सैंपल लिया गया। ग्रामीण बुद्धिराम, कोमल, देवताराम आदि ने कहा कि उनके घर के नल का पानी जांच में शामिल नहीं किया गया। करीब 15 दिन पहले कुछ लोग आए थे और कुछ घरों से सैंपल लेकर गए थे।
