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Siddharthnagar News: रहती दुनिया तक होता रहेगा जिक्र-ए-हुसैन
Mon, 10 Aug 2026 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:18 AM IST
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डुमरियागंज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर सिथित इमाम बारगाह हुसैनिया वफफ शाह आलमगीर सानी मे का आयोजन क
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भारतभारी। डुमरियागंज तहसील के हल्लौर स्थित इमामबारगाह हुसैनिया वक्फ शाह आलमगीर सानी में सालाना अशरे की दूसरी मजलिस में अकीदतमंद उमड़ पडे़। अंजुमन गुलदस्ता मातम के तत्वावधान में शनिवार की रात आयोजित अशरे की दूसरी मजलिस को लखनऊ से आए मौलाना कलबे अहमद नकवी ने संबोधित किया। इसमें भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मजलिस को मौलाना कलबे अहमद नकवी ने कहा कि वाक्यात-ए-कर्बला सिर्फ इतिहास नहीं है। यह हर क्रांति की बुनियाद है और आज भी पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का चिराग रोशन है, जो जुल्म के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है। मौलाना ने कहा कि मुहर्रम पर निकाले जाने वाले अलम, ताबूत, जुलजनाह और ताजिया के जुलूस इमाम हुसैन की जीत का एलान करते हैं।
इमाम हुसैन को मानने वाला कभी भी जालिम, अत्याचारी और अन्याय के सामने नतमस्तक नहीं हो सकता है। इमाम हुसैन की शहादत और वाक्यात-ए-कर्बला अन्याय और जालिम से लड़ने का हौसला देती है।
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मजलिस के आखिर में मौलाना ने कर्बला की तपती जमीन पर तीन दिन के भूखे प्यासे हजरत इमाम हुसैन की हुई शहादत का मंजर बयान किया तो हर किसी की आंखें आंसुओं से तरबतर हो गई। पूरा मजमा हाय हुसैन की सदा से गूंजता रहा। मजलिस से पहले मर्सिया शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने पढ़ी।
इस दौरान काजिम रजा,शबाब, वजाहत हुसैन, जाकिर जमाल हैदर, मेहंदी हैदर, मौलाना निहाल, मनववर, नफासत आदि मौजूद रहे।
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मजलिस को मौलाना कलबे अहमद नकवी ने कहा कि वाक्यात-ए-कर्बला सिर्फ इतिहास नहीं है। यह हर क्रांति की बुनियाद है और आज भी पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का चिराग रोशन है, जो जुल्म के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है। मौलाना ने कहा कि मुहर्रम पर निकाले जाने वाले अलम, ताबूत, जुलजनाह और ताजिया के जुलूस इमाम हुसैन की जीत का एलान करते हैं।
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इमाम हुसैन को मानने वाला कभी भी जालिम, अत्याचारी और अन्याय के सामने नतमस्तक नहीं हो सकता है। इमाम हुसैन की शहादत और वाक्यात-ए-कर्बला अन्याय और जालिम से लड़ने का हौसला देती है।
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मजलिस के आखिर में मौलाना ने कर्बला की तपती जमीन पर तीन दिन के भूखे प्यासे हजरत इमाम हुसैन की हुई शहादत का मंजर बयान किया तो हर किसी की आंखें आंसुओं से तरबतर हो गई। पूरा मजमा हाय हुसैन की सदा से गूंजता रहा। मजलिस से पहले मर्सिया शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने पढ़ी।
इस दौरान काजिम रजा,शबाब, वजाहत हुसैन, जाकिर जमाल हैदर, मेहंदी हैदर, मौलाना निहाल, मनववर, नफासत आदि मौजूद रहे।