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Sitapur News: प्राकृतिक खेती कर आत्मनिर्भर बनीं सरोज
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 20 Apr 2026 12:04 AM IST
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सीतापुर। कसमंडा ब्लॉक के सोनारी गांव की कृषि सखी सरोज कुमारी प्राकृतिक खेती की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। पिछले चार वर्षों से वे प्राकृतिक खेती अपनाकर अपने परिवार की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। साथ ही, वे अन्य किसानों के लिए भी मार्गदर्शक बन रही हैं।
सरोज कुमारी ने कसमंडा ब्लॉक के क्लस्टर सीता रसोई से जुड़कर अपने घर के बाहर पोषण वाटिका विकसित की है। उन्होंने इसमें 21 प्रकार के देसी बीजों का संरक्षण करते हुए विभिन्न पौष्टिक सब्जियों की खेती की है। इनमें सतपुतिया तोरई, देसी लौकी, कद्दू, भिंडी, सेम और देसी करेला जैसी कई मौसमी सब्जियां शामिल हैं। उनकी यह पहल न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देती है, बल्कि परिवार को शुद्ध और पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराती है। केवीके कटिया की गृह वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने बताया कि सरोज कुमारी ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाया है। उन्होंने अपने खेत में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का पूर्ण रूप से त्याग किया है।
स्वयं जैविक खाद का करतीं निर्माण
सरोज कुमारी स्वयं जीवामृत, बीजामृत और दशपर्णी अर्क जैसे जैविक घोल तैयार करती हैं। वे इन घोलों का उपयोग अपनी फसलों में करती हैं। जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने किचन वेस्ट और अन्य जैविक अपशिष्टों से कंपोस्ट खाद बनाकर एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही, उन्होंने बोरी बगीचा की अवधारणा को अपनाते हुए सीमित स्थान में भी ताजी और जैविक सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ाया कदम
सरोज कुमारी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल भी प्रस्तुत करती है। आज वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में अन्य महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। केवीके कटिया के अध्यक्ष डॉ. दया एस श्रीवास्तव ने बताया कि सरोज कुमारी ने यह सिद्ध कर दिया है।
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सरोज कुमारी ने कसमंडा ब्लॉक के क्लस्टर सीता रसोई से जुड़कर अपने घर के बाहर पोषण वाटिका विकसित की है। उन्होंने इसमें 21 प्रकार के देसी बीजों का संरक्षण करते हुए विभिन्न पौष्टिक सब्जियों की खेती की है। इनमें सतपुतिया तोरई, देसी लौकी, कद्दू, भिंडी, सेम और देसी करेला जैसी कई मौसमी सब्जियां शामिल हैं। उनकी यह पहल न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देती है, बल्कि परिवार को शुद्ध और पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराती है। केवीके कटिया की गृह वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने बताया कि सरोज कुमारी ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाया है। उन्होंने अपने खेत में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का पूर्ण रूप से त्याग किया है।
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स्वयं जैविक खाद का करतीं निर्माण
सरोज कुमारी स्वयं जीवामृत, बीजामृत और दशपर्णी अर्क जैसे जैविक घोल तैयार करती हैं। वे इन घोलों का उपयोग अपनी फसलों में करती हैं। जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने किचन वेस्ट और अन्य जैविक अपशिष्टों से कंपोस्ट खाद बनाकर एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही, उन्होंने बोरी बगीचा की अवधारणा को अपनाते हुए सीमित स्थान में भी ताजी और जैविक सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ाया कदम
सरोज कुमारी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल भी प्रस्तुत करती है। आज वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में अन्य महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। केवीके कटिया के अध्यक्ष डॉ. दया एस श्रीवास्तव ने बताया कि सरोज कुमारी ने यह सिद्ध कर दिया है।

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