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Sonebhadra News: एससी-एसटी एक्ट में तत्कालीन प्रधान सहित छह दोषियों को सजा
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राॅबर्ट्सगंज और चोपन थाना क्षेत्र के सात साल पुराने दो मामलों में एससी-एसटी एक्ट के तहत तत्कालीन प्रधान सहित छह आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी गोविंद मोहन की अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। राॅबर्ट्सगंज कोतवाली से जुड़े मामले में चार आरोपियों को चार-चार वर्ष की कैद, 10-10 हजार अर्थदंड और चोपन थाना क्षेत्र से जुड़े मामलों में दो आरोपियों को दो-दो वर्ष की कैद तथा आठ-आठ हजार अर्थदंड से दंडित किया।
सजा सुनाते समय न्यायालय ने कहा कि जनजाति की सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून है। इसे व्यापक दृष्टिकोण में लागू करना चाहिए। पहले प्रकरण में ओबरा गांव निवासी इंद्रदेव धोबी ने एक अगस्त 2019 को चोपन थाने में पहुंचकर तहरीर सौंपी थी। बताया था कि वह सुबह आठ बजे पत्नी सोना के साथ कमरे पर थे। तभी पास के रहने वाले सगे भाई महेंद्र और सुरेंद्र केशरी आए। आते ही पत्नी से विवाद करने लगे। बचाव करने पहुंचे तो उन पर चाकू से हमला बोल दिया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने दंपती को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गालियां दी और उसे लाठी-डंडे से मारा-पीटा। जान से मारने की धमकी भी दी। इसके लिए दोनों दोषियों को दो-दो वर्ष की सजा के साथ आठ-आठ हजार अर्थदंड लगाया गया। इसकी अदायगी न करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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उधर, दूसरे प्रकरण में राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के परही निवासी महादेव ने 24 जनवरी 2019 को कोतवाली पहुंचकर तहरीर सौंपी थी। बताया था कि वह जाति का कोल है। वहीं आरोपी श्याम जी सिंह परही के प्रधान हैं। वह उसकी जमीन से होकर रोड बनवाने के लिए दबाव दे रहे हैं। इसी बात को लेकर उसे खेत पर जाते वक्त रोक लिया गया और प्रधान श्याम जी सिंह, बबलू सिंह, रामकेश यादव और प्रधान के दामाद रोहित ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसकी और बीच-बचाव करने आए उसके बेटे की पिटाई कर दी।
न्यायालय ने पाया कि अभियोजन (वादी) पक्ष आरोपों को साबित करने में सफल रहा है। इसके लिए सभी को चार-चार साल की कैद के साथ ही 10-10 हजार अर्थदंड लगाया। इसकी अदायगी न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतनी पड़ेगी।
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सजा सुनाते समय न्यायालय ने कहा कि जनजाति की सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून है। इसे व्यापक दृष्टिकोण में लागू करना चाहिए। पहले प्रकरण में ओबरा गांव निवासी इंद्रदेव धोबी ने एक अगस्त 2019 को चोपन थाने में पहुंचकर तहरीर सौंपी थी। बताया था कि वह सुबह आठ बजे पत्नी सोना के साथ कमरे पर थे। तभी पास के रहने वाले सगे भाई महेंद्र और सुरेंद्र केशरी आए। आते ही पत्नी से विवाद करने लगे। बचाव करने पहुंचे तो उन पर चाकू से हमला बोल दिया गया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने दंपती को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गालियां दी और उसे लाठी-डंडे से मारा-पीटा। जान से मारने की धमकी भी दी। इसके लिए दोनों दोषियों को दो-दो वर्ष की सजा के साथ आठ-आठ हजार अर्थदंड लगाया गया। इसकी अदायगी न करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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उधर, दूसरे प्रकरण में राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के परही निवासी महादेव ने 24 जनवरी 2019 को कोतवाली पहुंचकर तहरीर सौंपी थी। बताया था कि वह जाति का कोल है। वहीं आरोपी श्याम जी सिंह परही के प्रधान हैं। वह उसकी जमीन से होकर रोड बनवाने के लिए दबाव दे रहे हैं। इसी बात को लेकर उसे खेत पर जाते वक्त रोक लिया गया और प्रधान श्याम जी सिंह, बबलू सिंह, रामकेश यादव और प्रधान के दामाद रोहित ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसकी और बीच-बचाव करने आए उसके बेटे की पिटाई कर दी।
न्यायालय ने पाया कि अभियोजन (वादी) पक्ष आरोपों को साबित करने में सफल रहा है। इसके लिए सभी को चार-चार साल की कैद के साथ ही 10-10 हजार अर्थदंड लगाया। इसकी अदायगी न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतनी पड़ेगी।