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Sonebhadra News: मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 40 फीसदी डॉक्टर मरीजों को लगानी पड़ रही बीएचयू की दौड़
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मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचे मरीज। -संवाद
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सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त विशेषज्ञ-रेंजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती के बाद ही सोनभद्र के लोगों की वाराणसी के विभिन्न अस्पतालों के साथ ही बीएचयू के लिए लगने वाली दौड़ से मुक्ति मिल पाएगी। जरूरत के मुकाबले महज 40 फीसदी ही डॉक्टर मौजूद हो पाए हैं। जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी ने भी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। कॉलेज में तैनात नियमित डॉक्टर, जेआर, इंटर्न के जरिए इमरजेंसी सेवाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इमरजेंसी मेडिकल अफसरों की संख्या काफी कम होने से आपात चिकित्सा व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में भी दिक्कत की स्थिति बन रही है। ऑनकोलॉजिस्ट (कैंसर रोग विशेषज्ञ), न्यूरोलॉजिस्ट (तंत्रिका रोग विशेषज्ञ), कॉर्डियालॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) अभी तक न मिलने से भी संबंधित मरीजों को वाराणसी में बीएचयू जाना मजबूरी बनी हुई है।
बताते चलें कि मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने से जिले में कई गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा मिली है। आर्थो, जनरल सर्जरी, मेडिसिन, दंत रोग, मानसिक रोग, नाक-कान गला रोग, स्त्री रोग, चर्मरोग आदि विभागों में अच्छे डॉक्टर की तैनाती से मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पहले जहां जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिकतम 600 से 800 रहती थी। अब वह ढाई हजार तक पहुंच गई है लेकिन अभी भी जितने डॉक्टर होने चाहिए, उतने उपलब्ध नहीं हो पाए। इस कारण कई बार गंभीर मरीजों को या तो रेफर कर दिया जाता है या फिर उन्हें खुद से वाराणसी या बीएचयू जाना पड़ता है।
एकेडमिक, रेडियोलाजिस्ट, माइक्रो बायलाजी, पैथालाजी , फोरेंसिक साइंस सहित अन्य विभागों के लिए जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत तो महसूस की ही जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से अभी भी यहां सिटी स्कैन का कार्य ठेका कंपनी के जिम्मे बना हुआ है। आर्थो, जनरल सर्जरी, मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर तो उपलब्ध हैं लेकिन प्रोफेसर की तैनाती नहीं हो पाई है। पिछले दिनों बांड भरने वाले 96 में से 50 जेआर के काम छोड़कर चले जाने से भी मेडिकल कॉलेज की सेवा पर असर पड़ा है।
- इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी चाहिए डॉक्टर, कमिश्नर के सामने रखी गई बात
मेडिकल कॉलेज में सिफ्टवार ड्यूटी लगाकर इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जा रही है लेकिन जेआर और ईएमआर की कमी के चलते इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर दोनों के संचालन में दिक्कत का भी सामना करना पड रहा है। बताते हैं कि सोमवार को कलेक्ट्रेट में मंडलायुक्त को स्थिति से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य महकमे के जरिये ईएमओ उपलब्ध कराने के लिए पहल करने का अनुरोध तो किया ही गया। डॉक्टरों की कम संख्या के चलते आ रही दिक्कत से निजात दिलाने के लिए डीजीएमई (चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय) को भी अनुरोध पत्र भेजा गया है।
10 सीएचसी में आठ पर विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। एक सीएचसी पर कम से कम पांच विशेषज्ञ होने चाहिए लेकिन यह सुविधा महज यहां दो सीएचसी पर ही उपलब्ध हो पाई है। घोरावल की स्थिति सबसे बेहतर है। शेष जगह इसका अभाव बेहतर चिकित्सा में रोड़ा बना हुआ है। सीएचसी से जुड़े मरीजों को मेडिकल कॉलेज आने पर राहत मिल रही है लेकिन यहां भी डॉक्टरों की कमी को चलते तमाम लोगों को वाराणसी का रुख करना पड़ रहा है।
कहीं सुविधाओं की कमी तो कहीं पिछड़े क्षेत्र के कारण नहीं आ रहे डॉक्टर :
सिर्फ मेडिकल कॉलेज ही नहीं, स्वास्थ्य महकमे में भी डॉक्टरों की जॉइनिंग बड़ा मसला बना हुआ है। हाल ही में सरकार से 14 डॉक्टर सोनभद्र को दिए गए थे। तीन ने जॉइन ही नहीं किया। 11 ने कार्यभार ग्रहण किया भी तो उसमें से सात दूसरे जिलों की तरह यहां सुविधा न होने का हवाला देते हुए चले गए। इसी तरह मेडिकल कॉलेज से बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टरों के काम छोड़ने के पीछे पीजी की पढ़ाई का मसला सामने आया है। स्वास्थ्य महकमे के ही 20 से अधिक डॉक्टर पीजी के नाम पर गायब हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति संविदा पर तैनात किए जाने वाले डॉक्टरों की है। बताते हैं कि यहां तैनाती पाने वाले अधिकांश नियमित डॉक्टर तो सेवाएं दे रहे हैं लेकिन एनएचएम से तैनाती पाने वाले डॉक्टर कम वेतन और ग्रामीण अंचलों में शिक्षा आदि की सही सुविधा न होने का हवाला देकर गायब हो जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने का लगातार प्रयास जारी है। जो भी डॉक्टर-संसाधन उपलब्ध हैं, उनके जरिये इमरजेंसी सेवाओं का 24 घंटे संचालन किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी जल्द दूर हो सके, खासकर जेआर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके, इसके लिए डीजीएमई को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है। स्वास्थ्य महकमे से भी इमरजेंसी मेडिकल आफिसर मिल सकें, इसके लिए प्रयास जारी हैं। - प्रो. आनंद कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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प्रत्येक सीएचसी पर कम से पांच विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हो सकें, इसके लिए प्रयास जारी हैं। तीन दिन पहले भी निदेशालय को अनुरोध पत्र भेजा गया है। जो संसाधन-डॉक्टर उपलब्ध हैं, उनसे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की हर संभव कोशिश की जा रही है। - डॉ. पंकज कुमार राय, सीएमओ।
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बताते चलें कि मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने से जिले में कई गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा मिली है। आर्थो, जनरल सर्जरी, मेडिसिन, दंत रोग, मानसिक रोग, नाक-कान गला रोग, स्त्री रोग, चर्मरोग आदि विभागों में अच्छे डॉक्टर की तैनाती से मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पहले जहां जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिकतम 600 से 800 रहती थी। अब वह ढाई हजार तक पहुंच गई है लेकिन अभी भी जितने डॉक्टर होने चाहिए, उतने उपलब्ध नहीं हो पाए। इस कारण कई बार गंभीर मरीजों को या तो रेफर कर दिया जाता है या फिर उन्हें खुद से वाराणसी या बीएचयू जाना पड़ता है।
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एकेडमिक, रेडियोलाजिस्ट, माइक्रो बायलाजी, पैथालाजी , फोरेंसिक साइंस सहित अन्य विभागों के लिए जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत तो महसूस की ही जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से अभी भी यहां सिटी स्कैन का कार्य ठेका कंपनी के जिम्मे बना हुआ है। आर्थो, जनरल सर्जरी, मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर तो उपलब्ध हैं लेकिन प्रोफेसर की तैनाती नहीं हो पाई है। पिछले दिनों बांड भरने वाले 96 में से 50 जेआर के काम छोड़कर चले जाने से भी मेडिकल कॉलेज की सेवा पर असर पड़ा है।
- इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी चाहिए डॉक्टर, कमिश्नर के सामने रखी गई बात
मेडिकल कॉलेज में सिफ्टवार ड्यूटी लगाकर इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जा रही है लेकिन जेआर और ईएमआर की कमी के चलते इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर दोनों के संचालन में दिक्कत का भी सामना करना पड रहा है। बताते हैं कि सोमवार को कलेक्ट्रेट में मंडलायुक्त को स्थिति से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य महकमे के जरिये ईएमओ उपलब्ध कराने के लिए पहल करने का अनुरोध तो किया ही गया। डॉक्टरों की कम संख्या के चलते आ रही दिक्कत से निजात दिलाने के लिए डीजीएमई (चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय) को भी अनुरोध पत्र भेजा गया है।
10 सीएचसी में आठ पर विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। एक सीएचसी पर कम से कम पांच विशेषज्ञ होने चाहिए लेकिन यह सुविधा महज यहां दो सीएचसी पर ही उपलब्ध हो पाई है। घोरावल की स्थिति सबसे बेहतर है। शेष जगह इसका अभाव बेहतर चिकित्सा में रोड़ा बना हुआ है। सीएचसी से जुड़े मरीजों को मेडिकल कॉलेज आने पर राहत मिल रही है लेकिन यहां भी डॉक्टरों की कमी को चलते तमाम लोगों को वाराणसी का रुख करना पड़ रहा है।
कहीं सुविधाओं की कमी तो कहीं पिछड़े क्षेत्र के कारण नहीं आ रहे डॉक्टर :
सिर्फ मेडिकल कॉलेज ही नहीं, स्वास्थ्य महकमे में भी डॉक्टरों की जॉइनिंग बड़ा मसला बना हुआ है। हाल ही में सरकार से 14 डॉक्टर सोनभद्र को दिए गए थे। तीन ने जॉइन ही नहीं किया। 11 ने कार्यभार ग्रहण किया भी तो उसमें से सात दूसरे जिलों की तरह यहां सुविधा न होने का हवाला देते हुए चले गए। इसी तरह मेडिकल कॉलेज से बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टरों के काम छोड़ने के पीछे पीजी की पढ़ाई का मसला सामने आया है। स्वास्थ्य महकमे के ही 20 से अधिक डॉक्टर पीजी के नाम पर गायब हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति संविदा पर तैनात किए जाने वाले डॉक्टरों की है। बताते हैं कि यहां तैनाती पाने वाले अधिकांश नियमित डॉक्टर तो सेवाएं दे रहे हैं लेकिन एनएचएम से तैनाती पाने वाले डॉक्टर कम वेतन और ग्रामीण अंचलों में शिक्षा आदि की सही सुविधा न होने का हवाला देकर गायब हो जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने का लगातार प्रयास जारी है। जो भी डॉक्टर-संसाधन उपलब्ध हैं, उनके जरिये इमरजेंसी सेवाओं का 24 घंटे संचालन किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी जल्द दूर हो सके, खासकर जेआर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके, इसके लिए डीजीएमई को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है। स्वास्थ्य महकमे से भी इमरजेंसी मेडिकल आफिसर मिल सकें, इसके लिए प्रयास जारी हैं। - प्रो. आनंद कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
प्रत्येक सीएचसी पर कम से पांच विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हो सकें, इसके लिए प्रयास जारी हैं। तीन दिन पहले भी निदेशालय को अनुरोध पत्र भेजा गया है। जो संसाधन-डॉक्टर उपलब्ध हैं, उनसे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की हर संभव कोशिश की जा रही है। - डॉ. पंकज कुमार राय, सीएमओ।