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UP: दो बार सील अस्पताल में प्रसव के बाद आशा की मौत, शव को ओटी टेबल पर छोड़कर डॉक्टर भागा; नवजात सुरक्षित

अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 30 May 2026 03:02 PM IST
सार

Sonbhadra News: कोन थाना क्षेत्र स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर में प्रसव के बाद आशा नामक महिला की मौत हो गई। आरोप है कि घटना के बाद डॉक्टर शव को ऑपरेशन थिएटर में छोड़कर फरार हो गया। नवजात सुरक्षित है। अस्पताल पहले भी दो बार सील हो चुका है। मामले में लापरवाही पाए जाने पर 108 एंबुलेंस के ईएमटी और चालक की सेवा समाप्ति के लिए पत्र भेजा गया है।

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ASHA worker dies after childbirth hospital sealed twice doctor flees leaving body OT table newborn safe
घटना के बाद रोते- बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला

UP News: कोन कस्बे में चल रहे ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर में शुक्रवार की रात प्रसव के बाद आशा कार्यकर्ता सीमा देवी (38) की मौत हो गई। ऑपरेशन टेबल पर शव को छोड़कर डॉक्टर भाग गया। परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। 





अस्पताल को पहले भी बिना पंजीकरण और लापरवाही के आरोपों पर सील किया गया था। इसके बावजूद अस्पताल चल रहा था। हंगामे के दौरान पहुंचे एसडीएम, सीओ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल का पंजीयन न होने का दावा करते हुए उसे फिर सील कर दिया। 

संचालक नसीम अहमद के विरुद्ध कोन थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। डीएम चर्चित गौड़ ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में लापरवाही पर एंबुलेंस 108 के चालक धनंजय व ईएमटी संदीप की सेवा समाप्ति को पत्र भेजा गया है।

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माैके पर माैजूद भीड़। - फोटो : संवाद

बागेसोती क्षेत्र के सिंगा गांव निवासी देव नारायण की पत्नी सीमा देवी गांव में आशा कार्यकर्ता थीं। उन्हें प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार की रात करीब एक बजे एंबुलेंस से कोन स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर करीब 3.30 बजे ऑपरेशन के लिए ले गए। सीमा ने बच्चे को जन्म दिया। 

इसी दौरान प्रसूता की तबीयत बिगड़ी और कुछ देर में उनकी मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टर शव को ऑपरेशन बेड पर ही छोड़कर भाग गया। परिजनों ने बताया कि सीमा देवी के पहले चार प्रसव सामान्य तरीके से हो चुके थे। आरोप लगाया कि पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं और विशेषज्ञ व्यवस्था न होने के बावजूद आर्थिक लाभ के उद्देश्य से ऑपरेशन किया गया।

शनिवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंचकर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। वह मौके पर सक्षम अधिकारियों को बुलाने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। कोन पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। ओबरा एसडीएम विवेक सिंह, सीओ अमित कुमार, निजी अस्पतालों के नोडल डॉ. जीएस यादव व डॉ.कीर्ति आजाद भी मौके पर पहुंचे। जांच में अस्पताल बिना पंजीकरण का पाया गया। उसे तत्काल सील करते हुए संचालक नसीम अहमद के खिलाफ कोन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

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ज्ञापन साैंपते परिजन और अन्य लोग। - फोटो : संवाद

15 महीने में दो बार सील हुआ अस्पताल
फरवरी 2025 में कस्बे में संचालित अस्पताल में कार्य करने वाले झारखंड निवासी आजाद अंसारी (20) ने महिला स्टाफ के साथ प्रेम प्रसंग को लेकर केमिकल का सेवन कर लिया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हंगामे के बाद बिना पंजीकरण संचालित अस्पताल को सील किया गया था। लेकिन कुछ महीने बाद ही सील तोड़कर अस्पताल चालू कर दिया गया। दोबारा शिकायत मिलने पर इस साल 20 मार्च को फिर से अस्पताल को सील किया गया था। अब फिर से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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अस्पताल को लाॅक करती टीम। - फोटो : संवाद

पीएचसी से रेफर के बाद सरकारी एंबुलेंस चालक ने पहुंचा दिया अस्पताल, एक और प्रसूता भर्ती मिली
आशा कार्यकर्ता सीमा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें परिजन पहले कचनरवा पीएचसी ले गए थे। वहां उसकी हालत गंभीर देख रेफर कर दिया। परिजनों के मुताबिक सरकारी एंबुलेंस 108 सेवा से वह महिला को लेकर निकले, लेकिन एंबुलेंस चालक व ईएमटी उसे झांसा देकर कोन के बिना पंजीयन वाले अस्पताल ले गए, जहां उपचार में लापरवाही से मौत हो गई। मामले में एक एएनएम का भी नाम सामने आया है। 

परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने आते ही गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए 50 हजार रुपये की मांगे। प्रसूता की मौत के बाद जब लोग हंगामा करते हुए पहुंचे तो वहां बागेसोती के लौकवाखाड़ी की कुसुम देवी (35) पत्नी विदेशी घसिया भर्ती मिली। तीन दिन पहले उसका यहीं प्रसव हुआ था। उसकी भी तबीयत खराब थी। 

पुलिस ने उसे एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कराया। मौके पर मौजूद परिजनों ने एक एएनएम के जरिये मरीजों को यहां भेजे जाने की बात बताई। जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खराब हालत के कारण इसी तरह सरकारी एंबुलेंस, आशा-एएनएम की मिलीभगत से प्रसव व उपचार के लिए ऐसे अस्पतालों में पहुंचाया जाता है। बदले में उन्हें कमीशन मिलता है।

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अस्पताल के बाहर माैजूद भीड़। - फोटो : संवाद

अस्पताल के अंदर की स्थिति देख लोग हैरान
जिस अस्पताल में मरीजों का उपचार चल रहा था, वहां के अंदर की स्थिति देख लोग सन्न रह गए। ऑपरेशन थियेटर में व्यवस्थाएं जुगाड़ के भरोसे थी। इसी कमरे में लोहे की रैक के अंदर तमाम दूसरे सामान रखे गए थे, जिन पर धूल जमी थी। मेडिकल वेस्ट भी पास में पड़ा था।

अवैध तरीके से संचालित अस्पताल को पहले भी सील किया गया था। बावजूद सील तोड़कर उसका संचालन शुरू कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल को सील कराते हुए संचालक नसीम अहमद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। गर्भवती को अस्पताल में पहुंचाने वाले एंबुलेंस सेवा-108 के चालक धनंजय व ईएमटी संदीप की सेवा समाप्त करने के निर्देश एजेंसी को दिए गए हैं। अन्य बिंदुओं की जांच की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. पीके राय, सीएमओ।

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