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Sultanpur News: धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकसित हो रहा सुल्तानपुर
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विजेथुआ महावीरन धाम का मकरी कुंड।
- फोटो : विजेथुआ महावीरन धाम का मकरी कुंड।
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सुल्तानपुर। अयोध्या से सटे जिले में आज भी रामायणकालीन कई ऐसे स्थल हैं, जो मौजूदा समय में पर्यटन के रूप में विकसित हुए हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इन स्थलों पर अलग-अलग पर्व व तिथियों पर मेले का आयोजन होता रहता है। इसमें विजेथुआ महावीरन धाम, धोपाप, सीताकुंड घाट, लोहरामऊ देवी धाम, बाबा बरियारशाह स्मारक स्थल व ऐतिहासिक पारिजात वृक्ष है, जहां पर रोज पर्यटक आते रहते हैं। जिले के अलावा आसपास के लोग भी यहां आते हैं।
भगवान कुश की नगरी में सीताकुंड जैसा पवित्र घाट है। यह आदि गंगा गोमती का वही पावन तट है, जहां मान्यता है कि माता सीता ने यहां अपने केश धुले थे। तभी से इसका नाम सीताकुंड घाट हो गया। यहां पर जिले की दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक विसर्जन होता है। इसके अलावा डाला छठ, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, मकर संक्रांति व अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यहां पर वर्ष भर रोज श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।
यहीं पर त्रिदेव मंदिर, हनुमान मंदिर व भगवान भोलेनाथ की भी मंदिर है। इससे यहां पर हर दिन श्रद्धालु पूजन-अर्चन को आते हैं। कपटी कालिनेमि का वध भी हनुमान जी ने विजेथुआ में किया था। मौजूदा समय में यह विजेथुआ महावीरन धाम के रूप में विकसित हो चुका है। जिले के अलावा प्रदेश भर से लोग यहां हनुमानजी का दर्शन करने श्रद्धालु आते हैं। हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होता है। दीपावली व जेठ के हर मंगलवार पर यहां श्रद्धालुओं का तांता रहता है। इसके अलावा साल भर हर मंगलवार व शनिवार को सुबह से ही मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने लगती है। श्रद्धालु बजरंगबली को लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं। इससे यहां पर कारोबार करने वालों को रोजगार का अवसर मिल गया है। भदैंया के जमुवावा गांव में बने बाबा बरियार शाह स्मारक स्थल पर क्षत्रियों का जमावड़ा होता है।
पर्यटन के रूप में विकसित इस स्थल पर रोज आसपास के जिले के क्षत्रिय वंश के लोग पूजन-अर्चन करने आते हैं। इसी प्रकार लंभुआ के धोपाप घाट की मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद यहीं ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। यहां राम मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और गंगा दशहरा पर विशेष स्नान-मेला लगता है। शहर के सिविल लाइन में देव वृक्ष पारिजात का दर्शन करने दूर-दराज से लोग आते हैं। इसके अलावा लोहरामऊ देवी धाम, लंभुआ की मरी माता धाम,पीपी कमैचा के शाहपुर जंगल का शिव मंदिर आदि ऐसे स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था के केंद्र बने हुए हैं।
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भगवान कुश की नगरी में सीताकुंड जैसा पवित्र घाट है। यह आदि गंगा गोमती का वही पावन तट है, जहां मान्यता है कि माता सीता ने यहां अपने केश धुले थे। तभी से इसका नाम सीताकुंड घाट हो गया। यहां पर जिले की दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक विसर्जन होता है। इसके अलावा डाला छठ, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, मकर संक्रांति व अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यहां पर वर्ष भर रोज श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।
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यहीं पर त्रिदेव मंदिर, हनुमान मंदिर व भगवान भोलेनाथ की भी मंदिर है। इससे यहां पर हर दिन श्रद्धालु पूजन-अर्चन को आते हैं। कपटी कालिनेमि का वध भी हनुमान जी ने विजेथुआ में किया था। मौजूदा समय में यह विजेथुआ महावीरन धाम के रूप में विकसित हो चुका है। जिले के अलावा प्रदेश भर से लोग यहां हनुमानजी का दर्शन करने श्रद्धालु आते हैं। हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होता है। दीपावली व जेठ के हर मंगलवार पर यहां श्रद्धालुओं का तांता रहता है। इसके अलावा साल भर हर मंगलवार व शनिवार को सुबह से ही मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने लगती है। श्रद्धालु बजरंगबली को लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं। इससे यहां पर कारोबार करने वालों को रोजगार का अवसर मिल गया है। भदैंया के जमुवावा गांव में बने बाबा बरियार शाह स्मारक स्थल पर क्षत्रियों का जमावड़ा होता है।
पर्यटन के रूप में विकसित इस स्थल पर रोज आसपास के जिले के क्षत्रिय वंश के लोग पूजन-अर्चन करने आते हैं। इसी प्रकार लंभुआ के धोपाप घाट की मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद यहीं ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। यहां राम मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और गंगा दशहरा पर विशेष स्नान-मेला लगता है। शहर के सिविल लाइन में देव वृक्ष पारिजात का दर्शन करने दूर-दराज से लोग आते हैं। इसके अलावा लोहरामऊ देवी धाम, लंभुआ की मरी माता धाम,पीपी कमैचा के शाहपुर जंगल का शिव मंदिर आदि ऐसे स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था के केंद्र बने हुए हैं।
