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Unnao News: हाईवे किनारे खड़ी बस में डंपर ने मारी टक्कर, तीन यात्रियों की मौत
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फोटो-10-रामनरेश रावत (फाइल फोटो)
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सोनिक (उन्नाव)। लोडर से टकराकर शुक्रवार की रात हाईवे किनारे खड़ी काशी डिपो की बस में डंपर ने टक्कर मार दी। इससे बस में हुए नुकसान देख रहे तीन यात्रियों की कुचलकर मौत हो गई जबकि परिचालक की हालत गंभीर है। हादसे के बाद डंपर छोड़कर भाग गया। परिवहन विभाग ने मृतकों के परिजन को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। 7.50 लाख रुपये मुआवजा बाद में दिया जाएगा।
अयोध्या से कानपुर जा रही काशी डिपो की बस शुक्रवार की रात दही चौकी के पास अचानक सामने आए लोडर में टकरा गई। इससे बस का शीशा टूट गया और अन्य हल्की खराबी आई। जौनपुर जिले के थाना किराकर के मवई गांव निवासी बस चालक लालबहादुर ने दही थाना स्थित रोडवेज वर्कशॉप मोड़ के पास लोडर को रुकवा लिया। बस हाईवे पर बायें तरफ खड़ी कर दी। आजमगढ़ जिले के महुआ मुरादपुर निवासी परिचालक इंद्रपाल (48) के अलावा बस यात्री मूल रूप से बस्ती जिले के मदनपुर थाना कप्तानगंज और हाल पता 119/84 सब्जी मंडी बंबारोड गुमटी नंबर पांच निवासी बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र (47), अयोध्या जिले के तुलसीतारा थाना पूरा कलंदर निवासी रामनरेश रावत (35) और कानपुर के पटकापुर निवासी शरद गुप्ता (26) पुत्र जितेंद्र सहित अन्य यात्री उतरकर बस में हुआ नुकसान देखने लगे।
यात्रियों को कानपुर भेजने के लिए दूसरी बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान लखनऊ की तरफ से आ रहा तेज रफ्तार डंपर बस में पीछे से दाहिनी तरफ टकरा गया। टक्कर लगने से बस करीब दस मीटर आगे बढ़ गई और तीन यात्री और परिचालक बस से कुचल गए। पुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र, रामनरेश रावत और शरद गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। परिचालक को प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर हैलट रेफर कर दिया।
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दही थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि वाहन हटवा दिए गए हैं। डंपर कब्जे में है, चालक भाग गया है। बद्रीप्रसाद के बेटे गौतम की तहरीर पर डंपर और रोडवेज बस चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
टाइल्स कारीगर थे बद्रीप्रसाद
हाईवे पर हादसे का शिकार बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र टाइल्स कारीगर थे। भतीजे शोभित कनौजिया ने बताया कि फूफा अक्सर बीमार रहते थे। उनकी दवा भी चल रही थी। वह 20 दिन पहले गांव गए थे। खेती का काम देखकर लौट रहे थे। उन्हीं की कमाई से परिवार चलता था। पति की मौत से पत्नी पुष्पा, बेटा गौतम और बेटी भूमि बेहाल हैं।
फोटो-15- जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पति की मौत पर गुमसुम बैठी पत्नी नीलम कुमारी और बच्चे। संवाद
नीलम ने पहले पिता और अब पति को खोया
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनिक। हादसे का शिकार रामनरेश रावत खिलौनों का ठेला लगाकर परिवार पालते थे। पत्नी नीलम ने बताया कि कानपुर के आदर्श विहार में रहने वाले पिता की मौत शुक्रवार को हो गई थी। वह पति और बच्चों अभिनव और अनिका के साथ वहीं जा रही थी। बताया कि रोडवेज बस पहले सामने से आ रहे लोडर से टकराई थी। लोडर वाला तो भाग गया था लेकिन बस में दिक्कत आने से चालक ने रास्ते में खड़ी कर हम लोगों को दूसरी बस में शिफ्ट कराने लगा था तभी यह हादसा हो गया। बताया कि पति तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। बेटे की मौत से मां श्यामा और अन्य परिजन बेहाल हैं। पहले पिता अब पति की मौत से नीलम की आंखों के आंसू मानो सूख से गए हों। इमरजेंसी वार्ड के बाहर वह बदहवास बैठी थी। बच्चे भी उसी के बगल में बैठे रो रहे थे।
फोटो-16- पोस्टमार्टम हाउस में इकलौते बेटे की मौत पर बिलखती मां गीता व बहन को संभालते परिजन। संवाद
मां बोली-अब कौन रखेगा परिवार का ध्यान
पिता की 14 साल पहले बीमारी से हुई थी मौत, बेहाल मां और बहन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनिक। हादसे का शिकार शरद गुप्ता बनारस में साड़ी की दुकान पर काम करते थे। वहीं से कानपुर स्थित घर आने के लिए रोडवेज बस में लखनऊ से बैठे थे। बेटे की मौत पर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची मां गीता और बहन शिल्पी शव देखकर बिलख पड़ी। मां ने पहले पुलिस से बेटे का पोस्टमार्टम न कराने की बात कही। कहा कि इससे पहले मेरे बेटे को कभी एक खरोंच तक नहीं आई। बेहाल मां को देख मौजूद लोगों के भी आंसू छलक आए। बताया कि पति की 14 साल पहले बीमारी से मौत के बाद बेटे ने ही घर को संभाला था। वह मां और बहन का पूरा ख्याल रखता था। कभी दुख में नहीं देख पाता था लेकिन ईश्वर ने उसे भी हम लोगों से छीन लिया। अब कौन कहेगा कि मां आपको पैसे की दिक्कत नहीं होगी। बहन के लिए रक्षाबंधन पर साड़ी और अन्य गिफ्ट लाने के लिए कौन बोलेगा। यह कहते-कहते गीता बेहोश हो गई। लोगों ने पानी के छींटे डाले। होश में आने के बाद वह फिर बेटे को ही याद करती रहीं।
नो पार्किंग और जाम लगाने के बस के 12 चालान
परिवहन विभाग की जांच में डंपर और बस की फिटनेस और अन्य कागजात पूरे मिले हैं लेकिन बस के नो पार्किंग एरिया में गाड़ी रोकने, जाम की वजह बनने और लापरवाही से वाहन चलाने में इस साल 12 चालान हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर महीने दो या इससे अधिक चालान होने से साफ है कि बस चालक यातायात नियमों के पालन में लापरवाही करने का आदी है।
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अयोध्या से कानपुर जा रही काशी डिपो की बस शुक्रवार की रात दही चौकी के पास अचानक सामने आए लोडर में टकरा गई। इससे बस का शीशा टूट गया और अन्य हल्की खराबी आई। जौनपुर जिले के थाना किराकर के मवई गांव निवासी बस चालक लालबहादुर ने दही थाना स्थित रोडवेज वर्कशॉप मोड़ के पास लोडर को रुकवा लिया। बस हाईवे पर बायें तरफ खड़ी कर दी। आजमगढ़ जिले के महुआ मुरादपुर निवासी परिचालक इंद्रपाल (48) के अलावा बस यात्री मूल रूप से बस्ती जिले के मदनपुर थाना कप्तानगंज और हाल पता 119/84 सब्जी मंडी बंबारोड गुमटी नंबर पांच निवासी बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र (47), अयोध्या जिले के तुलसीतारा थाना पूरा कलंदर निवासी रामनरेश रावत (35) और कानपुर के पटकापुर निवासी शरद गुप्ता (26) पुत्र जितेंद्र सहित अन्य यात्री उतरकर बस में हुआ नुकसान देखने लगे।
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यात्रियों को कानपुर भेजने के लिए दूसरी बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान लखनऊ की तरफ से आ रहा तेज रफ्तार डंपर बस में पीछे से दाहिनी तरफ टकरा गया। टक्कर लगने से बस करीब दस मीटर आगे बढ़ गई और तीन यात्री और परिचालक बस से कुचल गए। पुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र, रामनरेश रावत और शरद गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। परिचालक को प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर हैलट रेफर कर दिया।
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दही थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि वाहन हटवा दिए गए हैं। डंपर कब्जे में है, चालक भाग गया है। बद्रीप्रसाद के बेटे गौतम की तहरीर पर डंपर और रोडवेज बस चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
टाइल्स कारीगर थे बद्रीप्रसाद
हाईवे पर हादसे का शिकार बद्रीप्रसाद उर्फ राजेंद्र टाइल्स कारीगर थे। भतीजे शोभित कनौजिया ने बताया कि फूफा अक्सर बीमार रहते थे। उनकी दवा भी चल रही थी। वह 20 दिन पहले गांव गए थे। खेती का काम देखकर लौट रहे थे। उन्हीं की कमाई से परिवार चलता था। पति की मौत से पत्नी पुष्पा, बेटा गौतम और बेटी भूमि बेहाल हैं।
फोटो-15- जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पति की मौत पर गुमसुम बैठी पत्नी नीलम कुमारी और बच्चे। संवाद
नीलम ने पहले पिता और अब पति को खोया
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनिक। हादसे का शिकार रामनरेश रावत खिलौनों का ठेला लगाकर परिवार पालते थे। पत्नी नीलम ने बताया कि कानपुर के आदर्श विहार में रहने वाले पिता की मौत शुक्रवार को हो गई थी। वह पति और बच्चों अभिनव और अनिका के साथ वहीं जा रही थी। बताया कि रोडवेज बस पहले सामने से आ रहे लोडर से टकराई थी। लोडर वाला तो भाग गया था लेकिन बस में दिक्कत आने से चालक ने रास्ते में खड़ी कर हम लोगों को दूसरी बस में शिफ्ट कराने लगा था तभी यह हादसा हो गया। बताया कि पति तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। बेटे की मौत से मां श्यामा और अन्य परिजन बेहाल हैं। पहले पिता अब पति की मौत से नीलम की आंखों के आंसू मानो सूख से गए हों। इमरजेंसी वार्ड के बाहर वह बदहवास बैठी थी। बच्चे भी उसी के बगल में बैठे रो रहे थे।
फोटो-16- पोस्टमार्टम हाउस में इकलौते बेटे की मौत पर बिलखती मां गीता व बहन को संभालते परिजन। संवाद
मां बोली-अब कौन रखेगा परिवार का ध्यान
पिता की 14 साल पहले बीमारी से हुई थी मौत, बेहाल मां और बहन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनिक। हादसे का शिकार शरद गुप्ता बनारस में साड़ी की दुकान पर काम करते थे। वहीं से कानपुर स्थित घर आने के लिए रोडवेज बस में लखनऊ से बैठे थे। बेटे की मौत पर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची मां गीता और बहन शिल्पी शव देखकर बिलख पड़ी। मां ने पहले पुलिस से बेटे का पोस्टमार्टम न कराने की बात कही। कहा कि इससे पहले मेरे बेटे को कभी एक खरोंच तक नहीं आई। बेहाल मां को देख मौजूद लोगों के भी आंसू छलक आए। बताया कि पति की 14 साल पहले बीमारी से मौत के बाद बेटे ने ही घर को संभाला था। वह मां और बहन का पूरा ख्याल रखता था। कभी दुख में नहीं देख पाता था लेकिन ईश्वर ने उसे भी हम लोगों से छीन लिया। अब कौन कहेगा कि मां आपको पैसे की दिक्कत नहीं होगी। बहन के लिए रक्षाबंधन पर साड़ी और अन्य गिफ्ट लाने के लिए कौन बोलेगा। यह कहते-कहते गीता बेहोश हो गई। लोगों ने पानी के छींटे डाले। होश में आने के बाद वह फिर बेटे को ही याद करती रहीं।
नो पार्किंग और जाम लगाने के बस के 12 चालान
परिवहन विभाग की जांच में डंपर और बस की फिटनेस और अन्य कागजात पूरे मिले हैं लेकिन बस के नो पार्किंग एरिया में गाड़ी रोकने, जाम की वजह बनने और लापरवाही से वाहन चलाने में इस साल 12 चालान हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर महीने दो या इससे अधिक चालान होने से साफ है कि बस चालक यातायात नियमों के पालन में लापरवाही करने का आदी है।

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