UP: बसपा-कांग्रेस गठबंधन कोशिशों पर बचाव की मुद्रा में आई कांग्रेस, पार्टी नेता दे रहे हैं सफाई; ये है रणनीति
Congress-BSP alliance: बुधवार को सांसद पीएल पुनिया सहित कांग्रेस के कुछ नेता बसपा सु्प्रीमो मायावती से मिलने के लिए गए थे। अब इस बारे में कांग्रेस सफाई पेश कर रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भले ही विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ने की बात कहकर गठबंधन की अटकलों पर विराम लगा चुकी हैं, लेकिन कांग्रेस ने आस नहीं छोड़ी है। कांग्रेस एससी-एसटी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और सांसद तनुज पुनिया ने मंगलवार को मायावती से मिलने का प्रयास कर दोनों दलों के बीच दूरियों को बढ़ा दिया। बसपा कैंप इस मुलाकात की कोशिश के सियासी नफा-नुकसान का आकलन करने में जुटा है तो दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी इसे लेकर लगातार सफाई दे रहे हैं।
बसपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक कांग्रेस का यह कदम सुनियोजित था ताकि मायावती पर गठबंधन करने का दबाव बनाया जा सके। बसपा सुप्रीमो रविवार को दिल्ली से राजधानी वापस आ गई थीं, जिसके बाद वह लगातार पार्टी नेताओं से मिल रही थीं। मंगलवार को भले ही उनके आवास से कांग्रेस नेताओं को वापस कर दिया गया लेकिन बुधवार को उन्होंने बसपा की लालगंज सीट से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी इंदु चौधरी से मुलाकात की।
वहीं दूसरी ओर पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का यह कदम बसपा को इंडिया गठबंधन में शामिल करने के लिए उठाया गया था ताकि विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर भाजपा का मुकाबला किया जा सके। हालांकि यह पहल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा की जाती तो इसके दूसरे परिणाम भी हो सकते थे। बता दें कि मायावती के दिल्ली प्रवास के दौरान भी उनकी प्रियंका गांधी से मुलाकात की अफवाह फैली थी। इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 में भी कांग्रेस ने बसपा को अपने साथ लाने की कवायद की थी, लेकिन मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया था।
24 मई को होगी राज्य स्तरीय बैठक
बसपा सुप्रीमो मायावती आगामी 24 मई को राज्य स्तरीय बैठक करेंगी, जिसमें यूपी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है। बैठक में कांग्रेस के इस कदम के बारे में मायावती प्रतिक्रिया दे सकती हैं। साथ ही संगठन के कार्यों और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में भी दिशा-निर्देश देंगी।
लालाराम को कानपुर की जिम्मेदारी
वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड के प्रभारी लालाराम अहिरवार को पार्टी ने कानपुर मंडल की जिम्मेदारी सौंपी है। उनसे बुंदेलखंड के कुछ जिलों का प्रभार वापस ले लिया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जल्द ही संगठन में कुछ अहम बदलाव भी किए जाएंगे।