Akshaya Tritiya: 10 साल बाद नौ विशिष्ट योग और पांच शुभ मुहूर्त में अक्षय फल, बिना लग्न के कर सकते हैं विवाह
इस बार अक्षय तृतीया पर 10 साल बाद नौ विशिष्ट योग और पांच शुभ मुहूर्त में अक्षय फल मिलेगा। वहीं इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी।
विस्तार
अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को है। इस दिन 10 साल बाद एक बार फिर विशिष्ट योग बन रहे हैं। सूर्य मेष और चंद्रमा कर्क राशि में होंगे। इससे तिथि का प्रभाव 100 गुना बढ़ जाएगा। इसमें दान, पुण्य और तीर्थ दर्शन का विशेष अक्षय फल मिलेगा। साथ ही कोई भी शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होगी। वर्षभर में तीन विशेष मुहूर्तों में एक अक्षय तृतीया भी है। इस तिथि को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। नौ मई 2016 को अक्षय तृतीया सोमवार के दिन पड़ी थी। इस बार भी सोमवार को ही पड़ रही है। 10 साल पहले जो योग बने थे, वही योग इस बार भी बन रहे हैं। इसमें सौभाग्य, आयुष्मान, घर और स्थिर योग बन रहे हैं। इसके अलावा त्रिपुष्कर, राजयोग, मालव्य, शुभ और नव योग भी रहेगा। रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा। चंद्रमा और सूर्य अपने उच्च राशि में होंगे।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया तिथि 19 अप्रैल को दिन में 1:01 के बाद लग रही है और 20 को दिन में 10:39 तक रहेगी, लेकिन उदय तिथि का मान लेकर 20 को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
सूर्य और चंद्रमा के प्रभाव से अक्षय योग
सूर्य और चंद्रमा दोनों के उच्च प्रभाव में होने से इन दिन अक्षय योग बनेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्य का फल कभी नष्ट नहीं होता। जबकि चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) की विशेष प्रभाव से गजकेसरी योग भी बनेगा। इसे धन, मान-सम्मान और सफलता के लिए बहुत शक्तिशाली माना जाता है।