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Varanasi News: बनारस से बाइक चोरी कर बिहार में हो रही है शराब तस्करी
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वाराणसी में हर सप्ताह चोरी हो रहे है दोपहिया वाहन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बिहार में शराब बंदी के बाद भी तस्करी जारी है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों से दोपहिया चोरी करने के बाद बाइक का इस्तेमाल शराब तस्करी में किया जा रहा है। कमिश्नरेट में बाइक चाेरी की दर्ज प्राथमिकी के बाद बिहार से बाइक की बरामदगी की जा रही है। कमिश्नरेट पुलिस सबसे अधिक बाइक की बरामदगी बिहार के विभिन्न जिलों से कर रही है। काशी में शिक्षण संस्थाओं, मंदिरों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों से अकसर बाइक चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हफ्ते में दो से तीन दोपहिया चोरी होते हैं। सीसी कैमरे फुटेज दिखाने के बाद पुलिस मजबूरन प्राथमिकी दर्ज करती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महीने में औसतन 8 से 10 दोपहिया वाहन चोरी होते हैं। जबकि इनकी संख्या ऑफ रिकाॅर्ड अधिक होती है। 2025 में चोरी के 150 प्राथमिकी दर्ज की गई है, इसमें वाहन चोरी की अकेले 50 से अधिक है।
केस-एक
एक जनवरी को चंदौली के पीडीडीयू नगर निवासी रवि जायसवाल की बाइक जगतगंज क्षेत्र से चोरी हो गई। रवि ने चेतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना उप निरीक्षक संदीप चौरसिया को मिली। इस बीच फरवरी में रवि के मोबाइल पर बिहार कैमूर पुलिस का कॉल आया कि तुम्हारी गाड़ी शराब तस्करी में पकड़ी गई है। थाने में पहुंचकर बयान दर्ज कराओ। रवि ने कहा कि बाइक चोरी की प्राथमिकी चेतगंज थाने में दर्ज है। फोन के बाद चेतगंज पुलिस बाइक बरामदगी के प्रयास में जुटी हुई है।
केस-2
चकिया के रहने वाले अमित कुमार की गाड़ी बीएचयू परिसर से 20 फरवरी चोरी हो गई। 20 दिन बाद अमित कुमार को बिहार के सासाराम पुलिस से फोन आया कि गाड़ी पकड़ी गई है, शराब तस्करी के दो आरोपी भी गिरफ्तार हैं। अमित बाइक चोरी की एफआईआर और कागजात लेकर गए और तब जाकर पुलिस और कोर्ट से राहत मिली।
चोरी के बाद बिहार में खपती है बाइक
बाइक चोरी के बाद आरोपी उसे तुरंत बॉर्डर पार देते हैं। चंदौली और सोनभद्र की तरफ से बिहार में गाड़िया भेजी जाती हैं। चोरी करने वाले अलग और उसे पहुंचाने वाले दूसरे हाेते हैं। बिहार में गाड़ी पहुंचने पर उसकी बरामदगी की उम्मीद कम ही रहती है। शराब तस्करी में पकड़ी गई तो बरामदगी की उम्मीद बढ़ जाती है। वहीं, बिहार के कुछ जगहों पर दोपहिया वाहनों के पार्ट्स काट-काटकर अलग कर बिक्री कर दी जाती है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों की पुलिस शत प्रतिशत दोपहिया वाहनों की बरामदगी बिहार से ही करती है।
बीएचयू परिसर से सबसे अधिक बाइक चोरी
लंका थाना क्षेत्र के बीएचयू अस्पताल परिसर और विश्वनाथ टेंपल के बाहर से बाइक चोरी की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। दूरदराज से उपचार कराने आए मरीजों के तीमारदारों के दोपहिया वाहन अस्पताल परिसर के स्टैंड के बाहर से चोरी हो जाते हैं। लंका थाने में दो से तीन दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की जाती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बिहार में शराब बंदी के बाद भी तस्करी जारी है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों से दोपहिया चोरी करने के बाद बाइक का इस्तेमाल शराब तस्करी में किया जा रहा है। कमिश्नरेट में बाइक चाेरी की दर्ज प्राथमिकी के बाद बिहार से बाइक की बरामदगी की जा रही है। कमिश्नरेट पुलिस सबसे अधिक बाइक की बरामदगी बिहार के विभिन्न जिलों से कर रही है। काशी में शिक्षण संस्थाओं, मंदिरों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों से अकसर बाइक चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हफ्ते में दो से तीन दोपहिया चोरी होते हैं। सीसी कैमरे फुटेज दिखाने के बाद पुलिस मजबूरन प्राथमिकी दर्ज करती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महीने में औसतन 8 से 10 दोपहिया वाहन चोरी होते हैं। जबकि इनकी संख्या ऑफ रिकाॅर्ड अधिक होती है। 2025 में चोरी के 150 प्राथमिकी दर्ज की गई है, इसमें वाहन चोरी की अकेले 50 से अधिक है।
केस-एक
एक जनवरी को चंदौली के पीडीडीयू नगर निवासी रवि जायसवाल की बाइक जगतगंज क्षेत्र से चोरी हो गई। रवि ने चेतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना उप निरीक्षक संदीप चौरसिया को मिली। इस बीच फरवरी में रवि के मोबाइल पर बिहार कैमूर पुलिस का कॉल आया कि तुम्हारी गाड़ी शराब तस्करी में पकड़ी गई है। थाने में पहुंचकर बयान दर्ज कराओ। रवि ने कहा कि बाइक चोरी की प्राथमिकी चेतगंज थाने में दर्ज है। फोन के बाद चेतगंज पुलिस बाइक बरामदगी के प्रयास में जुटी हुई है।
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केस-2
चकिया के रहने वाले अमित कुमार की गाड़ी बीएचयू परिसर से 20 फरवरी चोरी हो गई। 20 दिन बाद अमित कुमार को बिहार के सासाराम पुलिस से फोन आया कि गाड़ी पकड़ी गई है, शराब तस्करी के दो आरोपी भी गिरफ्तार हैं। अमित बाइक चोरी की एफआईआर और कागजात लेकर गए और तब जाकर पुलिस और कोर्ट से राहत मिली।
चोरी के बाद बिहार में खपती है बाइक
बाइक चोरी के बाद आरोपी उसे तुरंत बॉर्डर पार देते हैं। चंदौली और सोनभद्र की तरफ से बिहार में गाड़िया भेजी जाती हैं। चोरी करने वाले अलग और उसे पहुंचाने वाले दूसरे हाेते हैं। बिहार में गाड़ी पहुंचने पर उसकी बरामदगी की उम्मीद कम ही रहती है। शराब तस्करी में पकड़ी गई तो बरामदगी की उम्मीद बढ़ जाती है। वहीं, बिहार के कुछ जगहों पर दोपहिया वाहनों के पार्ट्स काट-काटकर अलग कर बिक्री कर दी जाती है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों की पुलिस शत प्रतिशत दोपहिया वाहनों की बरामदगी बिहार से ही करती है।
बीएचयू परिसर से सबसे अधिक बाइक चोरी
लंका थाना क्षेत्र के बीएचयू अस्पताल परिसर और विश्वनाथ टेंपल के बाहर से बाइक चोरी की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। दूरदराज से उपचार कराने आए मरीजों के तीमारदारों के दोपहिया वाहन अस्पताल परिसर के स्टैंड के बाहर से चोरी हो जाते हैं। लंका थाने में दो से तीन दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की जाती है।