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Varanasi News: तीन महीने में मिले 200 संदिग्ध, 70 दिन में किसी के भी पते तक नहीं पहुंच सकी पुलिस

रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 12 Mar 2026 11:22 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी जिले की पुलिस के लिए घाटों पर भ्रमण करने वाले साधु, गलियों में कबाड़ी के भेष में घूम रहे लोगों की पहचान करना चुनौती बन गया है। ये लोग कहां से आए, क्या कर रहे पुलिस के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। 

challenge for police Identification of people guise of beggar sadhus and junk in Varanasi
ganga ghat varanasi - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

वाराणसी शहर में भिखारी, साधु और कबाड़ी के भेष में घूम रहे लोगों की पहचान और सत्यापन पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। शहर के घाटों, मंदिरों, बाजारों और रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में ऐसे लोग सक्रिय हैं, लेकिन उनका कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। तीन महीने पहले बांग्लादेशी और रोहिंग्या के खिलाफ पुलिस ने जांच अभियान चलाया। जांच में कोई रोहिंग्या नहीं मिला, लेकिन जोन में 200 संदिग्ध प्रवासी पाए गए। कपसेठी में आठ ऐसे संदिग्ध मिले जिनके बताए पते पर पुलिस 70 दिन बाद भी नहीं पहुंच पाई। वहीं, घाट किनारे बंगाल, बिहार और दक्षिण भारत के भिखारी हैं, जो आते-जाते रहते हैं।

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एक साल के अंदर शहर में चोरी और आपराधिक मामलों की जांच में कबाड़ियों की भूमिका सामने आने के बाद भी सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की प्रक्रिया अधूरी है। शहर के लंका, भेलूपुर और सिगरा में हुई चोरी की जांच में कबाड़ी वालों की भूमिका सामने आई थी। कबाड़ बटोरने के दौरान घर की रेकी की गई थी और बाद में चोरी की घटनाएं अंजाम दी गईं। 
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वहीं, घाट किनारे बड़ी संख्या में मंदिर या घाट के आसपास साधु के वेष में घूमने वालों की कोई पहचान नहीं है। लंका थाने में दर्ज एक मामले में पुलिस विवेचना में सामने आया कि धमकी देने वाला आरोपी साधु के भेष में दशाश्वमेध घाट से केदारघाट तक का चक्कर लगाता था। दो महीने पहले चांदपुर में एक कमरे से 12 चोरी किए गए मोबाइल बरामद हुए थे। 
मकान मालिक को पता ही नहीं था कि उसने चोर को कमरा दे रखा है, और न ही उसके पते का सत्यापन किया गया था। पते के अभाव में पुलिस भी चोर तक नहीं पहुंच पाई।

रामनगर और करखियांव की फैक्टरी में काम कर रहे कई मजदूर जिनकी कोई पहचान नहीं

रामनगर औद्योगिक क्षेत्र और करखियांव एग्रो पार्क की इकाइयों में कई मजदूर नॉर्थ ईस्ट, पश्चिम यूपी, नेपाल सहित अन्य प्रदेशों से हैं। इनका 100 फीसदी सत्यापन भी नहीं हुआ है। कई ऐसे हैं जो अपने परिवार के साथ रहते हैं। यही हाल शहर में चल रही बहुमंजिला इमारतों के निर्माण में लगे मजदूरों का भी है। ठेकेदार इन्हें बुलाते हैं और काम में लगा देते हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कबाड़ी दुकानें और कबाड़ खरीदने वाले फेरीवाले सक्रिय हैं। चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए पुलिस समय-समय पर कबाड़ी की दुकानों की जांच करती है, लेकिन अब तक शहर के सभी कबाड़ियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया है। कई मामलों में चोरी की बाइक, लोहे का सामान और बिजली के उपकरण कबाड़ियों के यहां मिले थे। 
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