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Varanasi News: 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का चेहल्लुम जुलूस अकीदत से निकला, अकीदतमंदों का उमड़ा सैलाब
Tue, 04 Aug 2026 03:09 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 04 Aug 2026 03:09 PM IST
सार
हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में वाराणसी में चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। जुलूस का नेतृत्व अंजुमन जावादिया ने किया। यह दालमंडी, नई सड़क, फाटक, सलीम काली महाल और पितरकुंडा से गुजरा।
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वाराणसी में चेहल्लुम जुलूस अकीदत से निकला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। शहर में 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का आलम पूरे अकीदत और गमगीन माहौल के बीच उठाया गया। यह जुलूस सुबह करीब 11 बजे इमामबाड़ा कच्ची सराय, दालमंडी से शुरू हुआ।
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आलम की देखरेख सैयद इकबाल हुसैन और जफर हसन ने की। जुलूस का नेतृत्व अंजुमन जावादिया ने किया। यह दालमंडी, नई सड़क, फाटक, सलीम काली महाल और पितरकुंडा से गुजरा। जुलूस फातमान पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश की।
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अंजुमन जावादिया के नोहाख्वां साजिद हुसैन ने नोहा पढ़े। इनमें शायर कविश बनारसी का लिखा नोहा "गूंजी है कर्बला में सदा, मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा, मैं हुसैन हूं" शामिल था। नोहाख्वानी और मातम से वातावरण गम और अकीदत से भर गया। कई अकीदतमंद इस दौरान भावुक भी हो उठे।
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जुलूस में इनकी रही भागीदारी
जुलूस में इमरान हुसैन जैदी, जरगम हैदर, शकील हुसैन जैदी और हैदर मुलाई जैसे कई लोग शामिल हुए। सागर हसन, शाहीन हुसैन, शारिक हुसैन और शरीफ भी मौजूद थे। जीशान, बादशाह अली, सकलैन हैदर, मसकन हैदर ने भी भागीदारी की। रेहान हुसैन और शाह आलम सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने जुलूस में हिस्सा लिया। जुलूस का संचालन शकील अहमद जादूगर ने किया।
सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन की ओर से पूरे जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की मौजूदगी और कड़ी निगरानी सुनिश्चित की गई। चेहल्लुम का यह पारंपरिक जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।