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वाराणसी: मणिकर्णिका घाट पर धरने पर बैठीं नगरवधुएं, पीएम और सीएम से 378 साल पुरानी परंपरा को बचाने की गुहार

Tue, 05 Apr 2022 12:30 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 05 Apr 2022 12:30 AM IST
सार

मणिकर्णिका घाट पर काशी की नगरवधुएं कार्यक्रम स्थल पर अतिक्रमण के खिलाफ धरने पर बैठ गईं। महाश्मशान नाथ मंदिर के आयोजन स्थल पर अतिक्रमण का विरोध किया। 

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City brides sit on dharna at Manikarnika Ghat against encroachment
नगरवधुएं मणिकर्णिका घाट पर धरने पर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में महाश्मशान नाथ मंदिर के आयोजन स्थल पर अतिक्रमण के विरोध में सोमवार से नगरवधुएं मणिकर्णिका घाट पर धरने पर बैठ गईं। आयोजन स्थल को लकड़ी व्यापारियों के अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग के साथ ही नगर वधुओं ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से 378 साल पुरानी परंपरा को बचाने की गुहार लगाई है।

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सोमवार की शाम मणिकर्णिका घाट पर काशी की नगरवधुएं कार्यक्रम स्थल पर अतिक्रमण के खिलाफ धरने पर बैठ गईं। महाश्मशान सेवा समिति के संरक्षक जंत्रलेश्वर यादव ने बताया कि राजा मानसिंह के जमाने से यह परंपरा चली आ रही है। इस बार कार्यक्रम स्थल पर अवैध कब्जा हो गया है, इसके कारण आयोजन पर संकट के बादल हैं।
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बाबा महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बाबा श्मशान नाथ का तीन दिवसीय शृंगार महोत्सव इस बार छह अप्रैल से शुरू होगा। इसमें पहले दिन बाबा का रुद्राभिषेक पूजन हवन का कार्यक्रम है। दूसरे दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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आठ अप्रैल को प्राचीन परंपरा को निभाते हुए नगरवधुएं बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगी। दिलीप ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर जहां मंच लगते हैं, वहीं अवैध रूप से लकड़ी रखकर कब्जा जमा लिया गया है। इसके कारण आयोजन पर संशय बना हुआ है। नगर निगम की ओर से चेतावनी के बाद भी लकड़ी कारोबारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया।

नगर वधुओं ने स्वीकार किया था राजा मानसिंह का आमंत्रण

महाश्मशान नाथ सेवा समिति के संरक्षक जंत्रलेश्वर यादव बताते हैं कि राजा मानसिंह द्वारा स्थापित बाबा मसाननाथ के दरबार में कार्यकम पेश करने के लिए उस समय की जानी-मानी नर्तकियों और कलाकारों को बुलाया गया था। चूंकि मंदिर श्मशानघाट के बीचों बीच था, लिहाजा ख्यातिलब्ध कलाकारों ने इनकार कर दिया। राजा ने कार्यक्रम का ऐलान करवा दिया था। अब समस्या यह कि कार्यक्रम कैसे हो? तब नगरवधुओं को आमंत्रित किया गया। नगरवधुओं ने राजा मानसिंह का निमंत्रण स्वीकार किया और तब से यह परंपरा चली आ रही है।

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