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कफ सिरप: भगोड़े शुभम के मददगारों की पर एसआईटी की नजर, तीन साल में हुई रजिस्ट्री के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 08 Apr 2026 10:32 AM IST
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सार

Varanasi News: कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल और उसके  मददगारों की तीन साल में हुई रजिस्ट्री के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इनमें टॉप पर रियल एस्टेट, होटल-कैटरिंग और साड़ी कारोबारी हैं। 

Cough Syrup case SIT Scrutinizes Registry Records of Fugitive Shubham and Associates Spanning Three Years
अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना शुभम जायसवाल। - फोटो : संवाद
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विस्तार

कफ सिरप तस्करी से अर्जित काले धन को भगोड़े शुभम जायसवाल ने कई धंधों में लगाया। शराब के अलावा रियल इस्टेट, बैंक्वेट-कैटरिंग, होटल, साड़ी और खनन में निवेश किया है। एसआईटी शुभम के मददगारों की कुंडली तैयार कर रही है। प्रदेश भर के रजिस्ट्री कार्यालय से शुभम और उसके रिश्तेदारों, दोस्तों, करीबियों के नाम पिछले तीन साल में हुई रजिस्ट्री के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। 

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शुभम ने युवाओं की अपनी एक टीम खड़ी की और वाराणसी समेत लखनऊ, नोएडा, धनबाद, कोलकाता, हिमाचल, उत्तराखंड में धंधे को आगे बढ़ाया। शुभम जायसवाल की 1111 नंबर की छह से सात लग्जरी गाड़ियों के बारे में भी एसआईटी जानकारी जुटा रही है।
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शहर के होटल और कैटरिंग के बड़े कारोबारी भी शुभम से ब्लैक मनी लेकर अपने धंधे में खपाते रहे। छावनी क्षेत्र में कैटरिंग कारोबारी ने पिछले तीन साल में अकूत संपत्ति खड़ी की है। महमूरगंज, चौकाघाट और चांदपुर में कीमती प्रापर्टी खरीदी है। शुभम से नकदी लेनदेन में प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कैटरिंग कारोबारी का नाम सामने आया। नोटिस जारी होने के बाद वह लखनऊ ईडी कार्यालय गया और फिर किसी तरह मामला शांत कराया। 

शुभम ने 15 करोड़ से अधिक की रकम सिंडिकेट इंटरप्राइजेज फर्म के प्रोपराइटर औसानगंज निवासी मनोज यादव के साथ उसकी रियल इस्टेट कंपनी एलएमएस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड में लगाई गई है। मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य यादव को जेल भेजा जा चुका है। एक बिल्डर के साथ गंजारी स्टेडियम के आसपास बड़ी जमीन खरीदने और एक साड़ी कारोबारी के साथ साझेदारी का भी एसआईटी पता लगा रही है। लखनऊ में साड़ी शोरूम खोले जाने का भी पता लगाया जा रहा है।

एसआईटी को भनक है कि शुभम के फरारी में इन लोगों की अहम भूमिका है। फेस टाइम पर बातचीत करने की भी जानकारियां मिली हैं। पूर्व में गिरफ्तार हवाला कारोबारी वैभव जायसवाल हवाला से रकम पहुंचाता था और फेस टाइम पर शुभम के हमेशा संपर्क में बना रहा।

सफेदपोशों के लिए मजबूत फाइनेंसर था शुभम

शहर से लेकर दूसरे जिलों के प्रभावशाली सफेदपोशों के लिए शुभम एक मजबूत फाइनेंसर के रूप में था। जिला पंचायत और विधानसभा चुनाव में शुभम का जलवा देखने को मिलता। जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़ और भदोही में शुभम के कई करीबी चुनावी ताल ठोक रहे थे। कई हजार करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर चुके शुभम ने सभी को आश्वस्त किया था कि पैसे के दम पर चुनाव जीतना है। कोई ब्लॉक प्रमुख तो कोई जिला पंचायत सदस्य, किसी को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना था। खुद शुभम एमएलसी के लिए प्रयासरत था। माननीय बनने के बाद वह तस्करी के धंधे को पश्चिमी प्रदेश के युवाओं को सौंपने वाला था।
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