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संकट मोचन संगीत समारोह: शिवमणि के ड्रम और प्रो. विश्वंभर नाथ के पखावज से गूंजा महावीर का आंगन, देखें- तस्वीरें

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 08 Apr 2026 02:57 PM IST
सार

Varanasi News: संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा पर शिवमणि के ड्रम्स, महंत के पखावज और यू राजेश की मेंडोलिन की जुगलबंदी से महावीर का आंगन गूंज उठा। 

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Sankat Mochan Music Festival Temple Resounds with Shivamani Drums and Prof. Vishwambhar Nath Pakhawaj
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला

103वें संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा पर पांच मुस्लिम कलाकारों ने अपने शास्त्रीय सुरों से हनुमत वंदना की। वहीं पहली प्रस्तुति में महावीर का आंगन कभी शास्त्रीय संगीत की फैक्ट्री तो भी वेस्टर्न का लैब लगा। आंगन में ड्रम, बाल्टी, घंट, थाली, परात के साथ पखावज और मेंडोलिन की संगत ने 'रघुपति राघव राजाराम' और 'गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो' गाने को नया अवतार दे दिया और साउथ इंडो-वेस्टर्न स्टाइल के साथ भक्तों को बरसों पुराने गाने का नया और आक्रामक वर्जन सुनने को मिला। जैसे ही इस धुन की गूंज उठी तो संकट मोचन परिसर में जो जहां था वहीं झूमना शुरू कर दिया। मंगलवार के रूटीन और खास भक्तों की कतारें भी नृत्य रूप में आ गई। आंगन में खड़े और बैठे श्रोता तो धक्का-मुक्की खाकर भी नाचते दिखे। तभी प्रस्तुति पूरी होते ही पैकअप के समय तेज आंधी आ गई, मगर आंगन में बैठे श्रोता वहां से टस से मस भी न हुए।

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Sankat Mochan Music Festival Temple Resounds with Shivamani Drums and Prof. Vishwambhar Nath Pakhawaj
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
ऐसा लगा शिवमणि नहीं उनके ड्रम्स ही उन्हें कर रहे कंट्रोल
रोजा, ताल, रंग दे बसंती, रॉक स्टार जैसी फिल्मों में ड्रम का जादू दिखा चुके पंडित शिवमणि का हाथ पचासों ड्रम, घंट घड़ियाल, बर्तन, बाल्टी किसी मशीन की तरह से फड़फड़ाने लगा। बिना कोई यंत्र छुए ही मुंह बजाकर वैसी ही वेस्टर्न म्यूजिक जैसी ध्वनि निकाली तो श्रोता अवाक रह गए। उनका शरीर का हर अंग ड्रम के दिशा के साथ ही झूमता रहा। एक बार लगा कि वो नहीं बल्कि ड्रम्स ही उनको कंट्रोल कर रहे थे।
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Sankat Mochan Music Festival Temple Resounds with Shivamani Drums and Prof. Vishwambhar Nath Pakhawaj
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
हवा से पानी तक घंट की ध्वनियों की अलग-अलग फ्रिक्वेंसी सुनी
पंडित शिवमणि के साथ जुगलबंदी कर रहे पंडित यू राजेश के मेंडोलिन और महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के पखावज की धमक ने इस वेस्टर्न साज पर शास्त्रीय और दैवीय तड़का लगा रहा था। हवा से बाल्टी भरे पानी तक जाने में घंट से निकली ध्वनियों की अलग-अलग फ्रिक्वेंसी सुन कर भक्त हक्का-बक्का रह गए। शृंगी और शंख से भी संगीत श्रोता की तरह से फूट रहा था।
Sankat Mochan Music Festival Temple Resounds with Shivamani Drums and Prof. Vishwambhar Nath Pakhawaj
संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
समारोह का वॉलंटियर अब प्रस्तुतिकर्ता- महंत
प्रस्तुति के बीच में पंडित शिवमणि ने काशी के युवा म्यूजिशियन प्रियेश पाठक को मंच पर बुला लिया। प्रियेश ने माइक और मुंह के संयोजन से ड्रम-पैड की तेज बीट निकालना शुरू किया। कभी किक तो कभी स्नेयर निकालते-निकालते तुरंत तबले की थिरकिट और ता-था-थईया ध्वनि तो कई बार वेस्टर्न ड्रम की हरकतें भी निकाली। पहली प्रस्तुति के बाद महंत प्रो. मिश्रा ने कहा कि प्रियेश संकट मोचन संगीत समारोह में वॉलंटियर था और शिवमणि के वाद्य यंत्रों का सेट अप करने लगा और अब मंच और देश भर में प्रस्तुतियां भी दे रहा। अपने आप को छोटा न समझे, कोई कभी भी इस मंच पर आकर प्रस्तुति दे सकता है।
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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
मोहन और सात्विक वीणा की तबले संग ना-धिन-धिन-ना
दूसरी पंडित विश्व मोहन भट्ट ने मोहनवीणा और बेटे सलील भट्ट ने सात्विक वीणा के साथ जुगलबंदी कर संकट मोचन की आराधना की। उनके साथ तबले पर पं. राम कुमार मिश्र और कौशिक कंवर ने संगत किया। 'ग्रैमी अवार्ड विजेता' पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट की मोहनवीणा उनकी और 'तंत्री सम्राट' सात्विक वीणा वादक पंडित सलिल भट्ट ने भक्तों को पुरातन संगीत की शैली से श्रोताओं का परिचय कराया। उन्होंने विश्व शांति के लिए राग विश्व रंजिनी में मोहनवीणा और सात्विक वीणा की जुगलबंदी हुई। आलाप, जोड़, झाला के साथ दोनों वाद्य यंत्रों के बीच तबले के साथ ना-धिन-धिन-ना की धुन पर बातचीत भी होती दिखी। विलंबित, द्रुत गति की रचनाओं को प्रस्तुत कर राग विश्व रंजनी और श्री राम भजन पर प्रस्तुति दी। तीसरी प्रस्तुति तबला युगलबंदी अजराड़ा घराना के जरगाम अकरम खां और दिल्ली घराना के खुर्रम अली नियाजी की रही। संवादिनी पर काशी के मोहित साहनी और सारंगी पर कोलकाता के अमान खां ने संगत किया।चौथी प्रस्तुति रामपुर घराना के उस्ताद गुलाम अब्बास खां ने गायन और अजराड़ा घराना के उस्ताद अकरम खां ने तबले पर संगत किया। साथ में संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र और सारंगी पर विनायक सहाय ने संगत की।
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