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Varanasi News: विवाद हुआ तो कूड़े में फेंक दीं टीबी की महंगी दवाएं, सीएमओ बोले- होगी जांच; अनियमितता

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 24 Apr 2026 01:23 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के सेवापुरी पीएचसी परिसर में एक्सपायरी तिथि से पहले दवाइयों को जलाने का मामला सामने आया है। सीएमओ ने कहा कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी। बरामद दवाओं में मुख्य रूप से आइसोनियाजीड, लिंजोलीड और पायरीडॉक्सिन टैबलेट शामिल हैं।

Expensive TB Medicines Dumped in Garbage Following Dispute CMO Says An Investigation Conducted
पीएचसी में जलाई गईं महंगी दवाईयां। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi News: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शासन के ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही इस अभियान को पलीता लगा रही है। ताजा मामला सेवापुरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का है, जहां बृहस्पतिवार को अस्पताल परिसर से सटे कर्मचारी आवास के पास भारी मात्रा में टीबी के गंभीर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाएं फेंकी मिलीं।

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फेंकी गई दवाओं के रैपर पर निर्माण वर्ष 2024 और एक्सपायरी तिथि 2027 दर्ज है। यानी ये दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग के लायक थीं। बरामद दवाओं में मुख्य रूप से आइसोनियाजीड, लिंजोलीड और पायरीडॉक्सिन टैबलेट शामिल हैं। फार्मासिस्ट अमित कुमार सेठ ने बताया कि ये दवाएं एमडीआर-टीबी यानी बिगड़ी हुई टीबी के उपचार में रामबाण मानी जाती हैं। 
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सरकारी अस्पतालों में यह दवाएं निशुल्क मिलती हैं, जबकि प्राइवेट अस्पतालों की फार्मेसी में यह दवाएं काफी महंगी मिलती हैं। अस्पताल परिसर में दवाएं फेंके जाने पर तीमारदारों ने आरोप लगाया कि जब वे दवा लेने काउंटर पर जाते हैं, तो अक्सर स्टॉक खत्म है या ऊपर से सप्लाई नहीं आई कहकर वापस भेज दिया जाता है। गरीब मरीजों को जो दवा मुफ्त मिलनी चाहिए, उसके लिए उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों पर मोटी रकम चुकानी पड़ती है। 

कर्मचारियों के बीच होता रहता है विवाद : अस्पताल परिसर में मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि टीबी कार्यक्रम के लिए नियुक्त विशेष कर्मचारी और अस्पताल के अन्य स्टाफ के बीच अक्सर विवाद होता रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, टीबी यूनिट के कर्मचारी नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते। इस वजह से दवाओं के वितरण और रिकॉर्ड में भारी अनियमितता बरती जा रही है। संभवतः इसी रिकॉर्ड को मैनेज करने या वितरण न करने की स्थिति में पकड़े जाने के डर से दवाओं को बाहर फेंक दिया गया।

अधिकारियों ने दिया रटा-रटाया जवाब : इस मामले में जब सेवापुरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. अमित कुमार सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। वहीं, टीबी सुपरवाइजर ने भी मामले से पल्ला झाड़ लिया।

दवाओं को कूड़े में फेंके जाने का मामला गंभीर है। इस संबंध में पीएचसी प्रभारी से पूछताछ करते हुए पूरे मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेश प्रसाद, प्रभारी सीएमओ।

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