आस्था: 51 थाल में सजा बाबा के तिलक का चढ़ावा, पंचबदन चल प्रतिमा का पूजन; लोक परंपरा का निवर्हन
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान श्रीविश्वेश्वर के तिलक उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास से मनाया गया। मंदिर के शास्त्रियों द्वारा बाबा विश्वेश्वर की पंचबदन प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन के श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण हुआ। तिलक उत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
विस्तार
Varanasi News: बाबा विश्वनाथ की काशी में वसंत पंचमी पर सदियों पुरानी लोक परंपरा निभाई गई। बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा का विधि-विधान से तिलक की रस्म निभाई गई। डमरुओं की निनाद से शीतलाधाम के लिंगिया महाराज ने बाबा को तिलक चढ़ाया।
दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के श्रीमहंत शिवप्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने पहली बार काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढ़ाया। शीतलाधाम महंत परिवार की ओर से बाबा के तिलकोत्सव का यह पहला लोकाचार था।
बांसफाटक स्थित श्रीयंत्र पीठ से श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में भव्य तिलक यात्रा निकाली गई। यात्रा में 21 वैदिक बटुक मंत्रोच्चार, शहनाई की मधुर धुन, डमरूओं के निनाद और शंखध्वनि के बीच 51 थालों में सजे बाबा के तिलक का चढ़ावा और 56 भोग की थालियां लेकर काशीवासी टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पहुंचे।
पूर्व महंत के आवास पर तिलकोत्सव से पूर्व परिवार की वरिष्ठ सदस्य मोहिनी देवी के सानिध्य में अंकशास्त्री महंत वाचस्पति तिवारी ने विशेष वैदिक पूजन किया। आचार्य सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में चारों वेदों के वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा की पूजा की।
