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पाइए सलमान और माधुरी सी मुस्कान
वाराणसी, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Dec 2014 12:35 AM IST
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मोहिनी मुस्कान बिखेरना कौन नहीं चाहता है। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ अपनी मुस्कान डिजाइन कराना संभव हो गया है। महानगरों में डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग (डीएसडी) तकनीक के जरिये मोहक मुस्कान पाने का क्रेज युवक-युवतियों में तेजी से बढ़ा है। बीएचयू में चल रहे यूपी डेंटल कांफ्रेस में आए मुंबई के वरिष्ठ दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव वर्मा ने बताया कि इस तकनीक के जरिये कोई भी सलमान खान, माधुरी दीक्षित और प्रियंका चोपड़ा जैसी मुस्कान पा सकता है।
डॉ. राजीव ने बताया कि ब्राजील के दंत चिकित्सक क्रिस्टियान कोचवन ने इस तकनीक को ईजाद किया था, जिसका महानगरों में तेजी से विस्तार हो रहा है। बताया कि 13 साल से ऊपर किसी भी उम्र का व्यक्ति इस तकनीक के माध्यम से मोम के दांतों की मनपसंद डिजाइन तैयार कराकर आकर्षक मुस्कान पा सकता है। बताया कि डुप्लीकेट दांतों की डिजाइन तैयार करते समय युवक-युवती के स्वभाव का खास ध्यान रखना पड़ता है।
बताया कि एक या दो डुप्लीकेट दांत लगाने पर भी मनपसंद मुस्कान मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर यह संख्या बढ़ा दी जाती। एक डुप्लीकेट दांत लगवाने का खर्च दो से सात हजार रुपये तक आता है।
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डॉ. राजीव ने बताया कि पूरे देश में 90 दंत चिकित्सक हैं, जो इस कार्य को बखूबी कर रहे हैं। यूपी में वाराणसी की डॉ. आरती गुप्ता, बीएचयू के डॉ. फराह दुर्रानी, इलाहाबाद के डॉ. संदीप सिंह और डॉ. मनीष राज इस दिशा में काम कर रहे हैं। डॉ. आरती ने बताया कि उनके यहां इस तरह के आने वाले केस में युवाओं की संख्या ज्यादा होती है।
क्या है ‘डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग’
वाराणसी। डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग एक ट्रीटमेंट प्लानिंग तकनीक है। पेशेंट की तस्वीर लेकर कंप्यूटर में उसके चेहरे के आधार पर दांतों की आकर्षक डिजाइन तैयार की जाती है। इसके बाद उसके मुंह और दांतों की माप ली जाती है फिर विशेष प्रकार की मोम (मॉकप वैक्स) से उसी आकार के आकर्षक दांतों का सेट तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे कंपोजिट मैटेरियल के जरिए असली दांतों पर फिट कर दिया जाता है।
दांतों की सुरक्षा का रखें ध्यान
वाराणसी। कांफ्रेंस में डॉ. अंशुमान बनर्जी ने कहा कि हर किसी को अपने दांतों की सेहत और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आकर्षक व्यक्तित्व में दांतों का प्रमुख स्थान होता है। बताया कि छह माह तक के बच्चों को उंगली से मसूड़ों पर हल्का मसाज करना चाहिए। पहला दांत आने के बाद से से ही ब्रश कराना शुरू कर देना चाहिए। सुबह-शाम दो बार दांतों की सफाई अवश्य करें। एक ब्रश को तीन महीने से अधिक इस्तेमाल न करें। अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। विटामिन सी से युक्त आहार पर्याप्त लें और मिठाई, चाकलेट कम खाएं।
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डॉ. राजीव ने बताया कि ब्राजील के दंत चिकित्सक क्रिस्टियान कोचवन ने इस तकनीक को ईजाद किया था, जिसका महानगरों में तेजी से विस्तार हो रहा है। बताया कि 13 साल से ऊपर किसी भी उम्र का व्यक्ति इस तकनीक के माध्यम से मोम के दांतों की मनपसंद डिजाइन तैयार कराकर आकर्षक मुस्कान पा सकता है। बताया कि डुप्लीकेट दांतों की डिजाइन तैयार करते समय युवक-युवती के स्वभाव का खास ध्यान रखना पड़ता है।
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बताया कि एक या दो डुप्लीकेट दांत लगाने पर भी मनपसंद मुस्कान मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर यह संख्या बढ़ा दी जाती। एक डुप्लीकेट दांत लगवाने का खर्च दो से सात हजार रुपये तक आता है।
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डॉ. राजीव ने बताया कि पूरे देश में 90 दंत चिकित्सक हैं, जो इस कार्य को बखूबी कर रहे हैं। यूपी में वाराणसी की डॉ. आरती गुप्ता, बीएचयू के डॉ. फराह दुर्रानी, इलाहाबाद के डॉ. संदीप सिंह और डॉ. मनीष राज इस दिशा में काम कर रहे हैं। डॉ. आरती ने बताया कि उनके यहां इस तरह के आने वाले केस में युवाओं की संख्या ज्यादा होती है।
क्या है ‘डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग’
वाराणसी। डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग एक ट्रीटमेंट प्लानिंग तकनीक है। पेशेंट की तस्वीर लेकर कंप्यूटर में उसके चेहरे के आधार पर दांतों की आकर्षक डिजाइन तैयार की जाती है। इसके बाद उसके मुंह और दांतों की माप ली जाती है फिर विशेष प्रकार की मोम (मॉकप वैक्स) से उसी आकार के आकर्षक दांतों का सेट तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे कंपोजिट मैटेरियल के जरिए असली दांतों पर फिट कर दिया जाता है।
दांतों की सुरक्षा का रखें ध्यान
वाराणसी। कांफ्रेंस में डॉ. अंशुमान बनर्जी ने कहा कि हर किसी को अपने दांतों की सेहत और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आकर्षक व्यक्तित्व में दांतों का प्रमुख स्थान होता है। बताया कि छह माह तक के बच्चों को उंगली से मसूड़ों पर हल्का मसाज करना चाहिए। पहला दांत आने के बाद से से ही ब्रश कराना शुरू कर देना चाहिए। सुबह-शाम दो बार दांतों की सफाई अवश्य करें। एक ब्रश को तीन महीने से अधिक इस्तेमाल न करें। अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। विटामिन सी से युक्त आहार पर्याप्त लें और मिठाई, चाकलेट कम खाएं।