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काशी में बकरा मंडी पर ताला: हजारों व्यापारियों और किसानों की रोजी-रोटी पर संकट, गेट पर पुलिस तैनात; जानें वजह

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 25 May 2026 03:36 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी की बेनिया बकरा मंडी पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन ने ताला लगा दिया, जिससे ईद से पहले कारोबार ठप हो गया। मंडी बंद होने से हजारों व्यापारी, किसान और मजदूर प्रभावित हुए हैं। व्यापारियों ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से पुनर्विचार और दूसरी जगह मंडी की मांग की है।

Goat Market in Kashi Locked Down Livelihoods of Thousands of Traders and Farmers at Risk Police Deployed
गेट के बाहर पुलिस टीम। - फोटो : संवाद
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विस्तार

शहर के बेनिया स्थित चर्चित बकरा मंडी पर सोमवार को नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंडी को खाली करा दिया और मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से वर्षों से संचालित हो रहा बकरा कारोबार अचानक ठप हो गया। ईद-उल-अज़हा से पहले मंडी बंद होने से हजारों व्यापारियों, किसानों, पशुपालकों और मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

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जानकारी के अनुसार बेनिया बकरा मंडी का संचालन साजिद खान द्वारा कराया जा रहा था। मंडी को 18 मई से 27 मई तक संचालन की अनुमति दी गई थी, लेकिन शनिवार को स्मार्ट सिटी प्रशासन ने अचानक मंडी का आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद सोमवार सुबह नगर आयुक्त के निर्देश पर नगर निगम और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और पूरी मंडी खाली कराते हुए मुख्य गेट पर सरकारी ताला लगा दिया।

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पुलिस ने की कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान मंडी क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में मौजूद व्यापारी और किसान प्रशासनिक फैसले से नाराज दिखे। व्यापारियों का कहना है कि ईद-उल-अज़हा से पहले बेनिया बकरा मंडी उनका सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र होती है, जहां प्रतिदिन लगभग 700 से 800 बकरों की खरीद-फरोख्त होती थी। उनका दावा है कि मंडी के जरिए रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता था और सैकड़ों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई थी।

दूर-दराज़ जिलों और गांवों से आए किसानों ने बताया कि वे कई दिनों की तैयारी और खर्च के बाद बकरे लेकर वाराणसी पहुंचे थे, लेकिन अचानक मंडी बंद होने से उनकी पूंजी फंस गई है। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के मंडी बंद करना उनके रोजगार पर सीधा प्रहार है। किसानों का कहना था कि प्रशासन को कम से कम दूसरी जगह मंडी लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि त्योहार से ठीक पहले मंडी बंद करने से व्यापारियों और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि यह कार्रवाई कथित तौर पर आरएसएस से जुड़े एक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद की गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

फिलहाल मंडी बंद होने से व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से जल्द वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने या फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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