ज्ञानवापी: 1991 के एक मामले में टली सुनवाई, अब इस दिन होगी; वाद मित्र को हटाने के केस में आपत्ति दाखिल
Gyanvapi News: ज्ञानवापी के 1991 के मामले में सुनवाई टल गई। पक्षकार बनने की अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई थी। वहीं, वाद मित्र को हटाए जाने की अर्जी पर आपत्ति दाखिल की गई है।
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सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) भावना भारती की अदालत में गुरुवार को ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के पुराने मामले में सुनवाई टल गई। पीठासीन अधिकारी अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। अब इस मामले में अगली सुनवाई एक मई को होगी।
पिछली तिथि पर पक्षकार बनने के अर्जी पर बेटियों की ओर से आशीष श्रीवास्तव ने बहस शुरू की है। उधर, पिछले तिथि पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने वाली अर्जी पर वाद मित्र ने आपत्ति दाखिल की है।
पिछले तिथि पर मुकदमे के वादी पं. हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय की ओर से मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने का दाखिल प्रार्थना पत्र पर लंबित है। उधर, इस वाद में पिछले तिथि पर भी एक अर्जी अनुष्का तिवारी की ओर से दाखिल की गई।
इसमें लघु देवता वादी, स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की प्राचीन मूर्ति के वाद मित्र के रूप में विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग की गई है। इस मामले वादी रहे सभी की मृत्यु हो चुकी है। पंडित सोमनाथ व्यास (पुजारी) का निधन 7 मार्च 2000 को हो गया था। उनके निधन के बाद 11 अक्तूबर 2019 को विजय शंकर रस्तोगी को मुकदमे में देवता के हित का प्रतिनिधित्व जारी रखने के लिए देवता स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के अगले मित्र के रूप में नियुक्त किया गया था।
स्थानांतरण आवेदन का विरोध करके देवता के अनेक भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं। अनुष्का ने प्रस्तावित वाद मित्र का नाम विष्णु शंकर जैन, अश्विनी कुमार उपाध्याय, विश्वंभर नाथ मिश्रा (संकट मोचन मंदिर के महंत), जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम पर गुहार लगाई है।