लता मंगेशकर: बाबा विश्वनाथ को सुप्रभातम सुनाने की इच्छा रह गई अधूरी, काशी के विद्वानों ने किया था लता जी से संपर्क
काशी विश्वनाथ सुप्रभातम गाने के लिए काशी के विद्वानों ने लता जी से संपर्क किया था। प्रस्ताव मिलने के बाद लता मंगेशकर सहर्ष तैयार थीं।
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भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर बाबा विश्वनाथ को सुप्रभातम सुनाने की इच्छा अधूरी ही रह गई। काशी के विद्वानों को आज भी यह कसक महसूस होती है कि काश लता जी ने श्री काशी विश्वनाथ सुप्रभातम को अपना स्वर दे दिया होता। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व कुलपति प्रो. राममोहन पाठक ने बताया कि 1978 में काशी के विद्वानों के मन में यह विचार आया कि बाबा विश्वनाथ का सुप्रभातम भी होना चाहिए।
गायक और गायिका के नाम पर विचार किया गया तो तय हुआ कि भारत रत्न एम एस सुब्बुलक्ष्मी से गवाया जाए। उन्होंने जब इसकी रिकॉर्डिंग पूरी की तो विद्वानों ने विमर्श किया कि इसको लता मंगेशकर से भी गवा लिया जाए। इसके बाद लता जी से संपर्क करने का प्रयास शुरू हो गया। सुप्रभातम के राजकिशोर 80 के दशक में दो बार मुंबई गए। लता मंगेशकर के सचिव से मुलाकात हुई और सभी दस्तावेज हम लोग उनको सौंपकर आ गए।
उन्होंने कहा कि आप थोड़े दिन इंतजार करिए, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया तो हम लोगों ने फिर मिलने की पहल की। लता जी के प्रभुकुंज बंगले पर सचिव से दोबारा मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि जबसे उन्हें प्रस्ताव दिया गया है वह बेहद उत्साहित हैं। लता जी ने कहा कि मेरे सपने में काशी के शिव आते हैं।
उन्होंने कहा कि हम यह सुप्रभातम गा देंगे और इसके लिए हमें कुछ फीस भी नहीं चाहिए लेकिन रिकॉर्डिंग के पहले बाबा विश्वनाथ के दरबार में हम उनको सुनाना चाहते हैं। इसके बाद सुप्रभातम संस्था वाले कुंभ में व्यस्त हो गए और यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका।